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एपस्टीन के दोस्त से 'दोस्ती' ब्रिटिश PM को पड़ी भारी, क्या 'प्रिंस ऑफ डार्कनेस' छीन लेंगे कीर स्टार्मर की कुर्सी?

ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर अमेरिकी यौन अपराधी एपस्टीन और अपने करीबी रहे पीटर मैंडेलसन की दोस्ती के भंवर में फंस गए हैं. उन पर इस्तीफा देने का दबाव लगातार बढ़ता जा रहा है.

एपस्टीन के दोस्त से 'दोस्ती' ब्रिटिश PM को पड़ी भारी, क्या 'प्रिंस ऑफ डार्कनेस' छीन लेंगे कीर स्टार्मर की कुर्सी?
जेफरी एपस्टीन (बीच में) के दोस्त पीटर मैंडेलसन (दाएं) की वजह से पीएम कीर स्टार्मर की कुर्सी खतरे में है.
  • ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर अपने करीबी रहे पीटर मैंडेलसन के कारण बड़े राजनयिक विवाद में घिर गए हैं
  • मैंडेलसन को अमेरिका में राजदूत नियुक्त करने को लेकर स्टार्मर पर इस्तीफा देने का दबाव डाला जा रहा है
  • मैंडेलसन के अमेरिकी यौन अपराधी जेफरी एपस्टीन के साथ करीब दो दशकों तक कथित गहरे संबंध सामने आए हैं
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ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर (Keir Starmer) एक बड़े डिप्लोमैटिक स्कैंडल में घिर गए हैं. इसे ब्रिटेन का पिछले कुछ दशकों में सबसे बड़ा राजनयिक विवाद बताया जा रहा है. उनकी कुर्सी खतरे में आ गई है. इस्तीफा देने का दबाव डाला जा रहा है. स्टार्मर के इस संकट के पीछे उनका ही एक करीबी शख्स है. इतना करीबी कि स्टार्मर ने उसे अमेरिका में राजदूत भी बना दिया था. लेकिन अब पीटर मैंडेलसन (Peter Mandelson) नाम का यही शख्स उनके गले की फांस बन गया है. इसी शख्स की वजह से स्टार्मर अमेरिका के कुख्यात यौन अपराधी जेफरी एपस्टीन (Jeffrey Epstein) विवाद में घिर गए हैं. आइए बताते हैं पूरा मामला.

कौन हैं 'प्रिंस ऑफ डार्कनेस'? 

  • 72 साल के पीटर मैंडेलसन की पहचान ब्रिटिश राजनीति में एक प्रभावशाली लेकिन विवादित चेहरे के रूप में रही है. 
  • उन्हें लेबर पार्टी को सत्ता में लाने का मुख्य रणनीतिकार माना जाता है, इसलिए उन्हें अक्सर 'प्रिंस ऑफ डार्कनेस' भी कहा जाता था. 
  • पीटर मैंडेलसन ब्रिटेन की पिछली टोनी ब्लेयर और गॉर्डन ब्राउन की सरकारों में कैबिनेट मंत्री भी रहे हैं.  
  • कीर स्टार्मर ने भारतीय मूल के ऋषि सुनक की जगह 5 जुलाई 2024 को ब्रिटेन के प्रधानमंत्री का पद संभाला तो वह मैंडेलसन के करीब आए. 
अमेरिकी यौन अपराधी जेफरी एपस्टीन के साथ पीटर मैंडेलसन की कई तस्वीरें मीडिया में आ चुकी हैं.

अमेरिकी यौन अपराधी जेफरी एपस्टीन के साथ पीटर मैंडेलसन की कई तस्वीरें मीडिया में आ चुकी हैं.

स्टार्मर ने मैंडेलसन को भेजा अमेरिका

राजनीति में मैंडेलसन के अनुभव को देखते हुए स्टार्मर ने उन्हें अपना करीबी सलाहकार बना लिया. इसके बाद वो घटना हुई, जिस पर स्टार्मर अब तक पछताते हैं. साल था 2024, दिसंबर का महीना. प्रधानमंत्री स्टार्मर ने पीटर मैंडेलसन को अमेरिका में ब्रिटेन का राजदूत नियुक्त कर दिया. ये नियुक्ति इसलिए भी चौंकाने वाली थी क्योंकि मैंडेलसन को राजनयिक होने का कोई अनुभव नहीं था. हालांकि स्टार्मर को लगा था कि मैंडेलसन का पिछला अनुभव और लॉबीइंग करने की कला डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन को प्रभावित करने में उनके काम आ सकती है. 

मैंडेलसन की मदद से स्टार्मर को 'मिशन ट्रंप' में कुछ सफलता मिलती भी दिख रही थी, कि तभी ईमेल बम फूटने लगे. सामने आए ईमेल्स में दावा किया गया कि यौन अपराधी एपस्टीन को सजा के बाद भी मैंडेलसन उसकी मदद करते रहे थे. इसके बाद तो मैंडेलसन की कारगुजारियों का एक के बाद एक पिटारा फूटने लगा. नतीजा ये हुआ कि मैंडेलसन की अमेरिका में पारी ज्यादा नहीं चली. सितंबर 2025 में उन्हें बर्खास्त कर दिया गया.

एपस्टीन से कितनी गहरी दोस्ती?

मैंडेलसन की इस बर्खास्तगी की वजह बनी अमेरिकी यौन अपराधी जेफरी एपस्टीन से उनकी नजदीकियां. मैंडेलसन के एपस्टीन के साथ कई फोटो सामने आए तो बवाल हो गया. खुलासा हुआ कि मैंडेलसन और एपस्टीन के बीच करीब दो दशकों तक गहरे संबंध रहे थे. मैंडेलसन जब यूरोपीय संघ के व्यापार आयुक्त थे, तब उन्हें एपस्टीन के प्राइवेट आईलैंड में छुट्टियां बिताते देखा गया था. वह पेरिस और न्यूयॉर्क में भी एपस्टीन के मेहमान रहे. 

खुलासा हुआ है कि पीटर मैंडेलसन 2008 में एपस्टीन को सजा होने के बाद भी उसके संपर्क में थे.

खुलासा हुआ है कि पीटर मैंडेलसन 2008 में एपस्टीन को सजा होने के बाद भी उसके संपर्क में थे.

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दोस्ती में 'दांव' पर लगाया देश?

एपस्टीन को जब 2008 में पहली बार यौन अपराधों के लिए दोषी करार दिया गया था, उसके बाद भी मैंडेलसन से उसकी दोस्ती जारी रहे. पिछले साल हुए खुलासों से पता चला कि मैंडेलसन ने एपस्टीन के जेल से बाहर आने के बाद भी कई बार उससे मुलाकात की थी. दोनों के बीच वित्तीय लेनदेन की जानकारी भी सामने आई थी. ऐसे भी आरोप हैं कि मैंडेलसन ने मंत्री रहते एपस्टीन को कई सीक्रेट जानकारियां दी थीं, जिसका उसने फायदा उठाया था. 23 फरवरी को मैंडेलसन की गिरफ्तारी हुई, लेकिन 9 घंटे में ही रिहाई हो गई. 

मैंडेलसन और एपस्टीन के बीच इतनी नजदीकियों के बावजूद स्टार्मर ने उन्हें अमेरिका में ब्रिटेन का राजदूत बना दिया था. हाल ही में खुलासा हुआ है कि राजदूत बनाए जाने से पहले मैंडेलसन सिक्योरिटी जांच में फेल हो गए थे. जांच एजेंसियों का मानना था कि एपस्टीन के साथ उनके संबंध और कुछ विदेशी संपर्क देश की सुरक्षा के लिए खतरा साबित हो सकते हैं. इतना सब कुछ होने के बावजूद ब्रिटेन के विदेश मंत्रालय ने इस बात को दबा दिया था. 

स्टार्मर की इमेज पर लगा बट्टा

हालांकि सच्चाई ज्यादा दिनों तक छिपी नहीं रह सकी. आखिरकार पर्दा उठ गया और मैंडेलसन को बर्खास्त करना पड़ा. इस बर्खास्तगी ने प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर की साफ-सुथरी नेता की इमेज पर बट्टा लगा दिया. आरोप लगने लगे कि स्टार्मर ने मैंडेलसन के सिक्योरिटी जांच में फेल होने के बावजूद उन्हें राजदूत बनाए रखा. 

मैंडेलसन और एपस्टीन की नजदीकियों के बावजूद स्टार्मर ने उन्हें अमेरिका में राजदूत बनाया था.

मैंडेलसन और एपस्टीन की नजदीकियों के बावजूद स्टार्मर ने उन्हें अमेरिका में राजदूत बनाया था.

ब्रिटिश पीएम पर आरोपों की बौछार 

प्रधानमंत्री स्टार्मर पर अब ब्रिटिश संसद को गुमराह करने के आरोप लग रहे हैं, क्योंकि मैंडलसन की नियुक्ति के वक्त स्टार्मर ने ही संसद को पूरी प्रक्रिया के पालन का भरोसा दिलाया था. सवाल उठ रहे हैं कि क्या स्टार्मर ने जानबूझकर मैंडलसन के खिलाफ रिपोर्ट को दबाया था? स्टार्मर बार-बार दावा कर रहे हैं कि उन्हें इस सिक्योरिटी जांच की जानकारी नहीं थी और विदेश मंत्रालय ने उन्हें अंधेरे में रखा था. इस मामले में विदेश मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी ऑली रॉबिन्स को इस्तीफा देना पड़ा है. 

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संकट में कीर स्टार्मर की कुर्सी

अब स्टार्मर की कुर्सी पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं. हालांकि इस वक्त स्टार्मर की लेबर पार्टी संसद में मजबूत स्थिति में है, और प्रधानमंत्री की कुर्सी पर कौन बैठेगा, कौन नहीं, इसका फैसला उसी के हाथ में है. लेबर पार्टी के ही कुछ नेता स्टार्मर को हटाने की मांग कर रहे हैं. अगर आने वाले वक्त में पार्टी के और नेता उनके खिलाफ खड़े हो गए तो स्टार्मर की कुर्सी जाना तय है. 

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