ढाका:
बांग्लादेश की एक अदालत ने आज दक्षिणपंथी जमात-ए-इस्लामी का पंजीकरण रद्द कर दिया, जिससे भविष्य में यह दल चुनावों में हिस्सा नहीं ले सकेगा।
बांग्लदेशी हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति एम मोअज्जम हुसैन, न्यायमूर्ति एम इनायतुर रहीम तथा काजी रेजाउल हक की पीठ ने जमात के राजनीतिक दल के तौर पर पंजीकरण को चुनौती देने वाली याचिका को स्वीकार करते हुए यह फैसला दिया।
बांग्लादेश तारिकात फैडरेशन के महासचिव रेजाउल हक चंदपुरी और 24 अन्य लोगों ने 25 मई, 2009 को याचिका दायर की थी।
याचिका में इन लोगों ने कहा था कि जमात एक धर्म आधारित राजनीतिक दल है और यह बांग्लादेश की स्वतंत्रता तथा संप्रभुता पर यकीन नहीं करता है।
आज का फैसला उस वक्त आया है जब यहां 1971 के मुक्ति संग्राम के दौरान युद्ध अपराधों को अंजाम देने के मामले को लेकर जमात को प्रतिबंधित करने की मांग उठ रही है।
जमात के प्रमुख गुलाम आजम (91) सहित इस दल के कई नेताओं को युद्ध अपराध के मामले में मौत अथवा उम्रकैद की सजा सुनाई जा चुकी है।
बांग्लदेशी हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति एम मोअज्जम हुसैन, न्यायमूर्ति एम इनायतुर रहीम तथा काजी रेजाउल हक की पीठ ने जमात के राजनीतिक दल के तौर पर पंजीकरण को चुनौती देने वाली याचिका को स्वीकार करते हुए यह फैसला दिया।
बांग्लादेश तारिकात फैडरेशन के महासचिव रेजाउल हक चंदपुरी और 24 अन्य लोगों ने 25 मई, 2009 को याचिका दायर की थी।
याचिका में इन लोगों ने कहा था कि जमात एक धर्म आधारित राजनीतिक दल है और यह बांग्लादेश की स्वतंत्रता तथा संप्रभुता पर यकीन नहीं करता है।
आज का फैसला उस वक्त आया है जब यहां 1971 के मुक्ति संग्राम के दौरान युद्ध अपराधों को अंजाम देने के मामले को लेकर जमात को प्रतिबंधित करने की मांग उठ रही है।
जमात के प्रमुख गुलाम आजम (91) सहित इस दल के कई नेताओं को युद्ध अपराध के मामले में मौत अथवा उम्रकैद की सजा सुनाई जा चुकी है।
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