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पाक रह जाएगा हाफ...अगर बलूचों ने करा लिया मुल्क आजाद तो क्या होगा? Explained

पाकिस्तान के सबसे बड़े प्रांत बलूचिस्तान ने अपनी आजादी का ऐलान कर दिया है. बलूचिस्तान के अलग होने का मतलब है लगभग आधे पाकिस्तान का साफ हो जाना.

पाक रह जाएगा हाफ...अगर बलूचों ने करा लिया मुल्क आजाद तो क्या होगा? Explained
बलूचिस्तान ने अपनी आजादी का ऐलान कर दिया है.
नई दिल्ली:

पाकिस्तान एक बार फिर टूट की कगार पर है. 1971 में बांग्लादेश तो पहले ही अलग हो चुका है. और अब बलूचिस्तान ने भी अपनी आजादी का ऐलान कर दिया है. बलूच नेताओं ने दावा किया है कि 85% बलूचिस्तान पर बलूचों का कंट्रोल है और अब यह आजाद है. बलूच नेताओं ने अपील की है कि उन्हें अब 'पाकिस्तान की जनता' न कहा जाए.

बलूचिस्तान ने अपनी आजादी का ऐलान तब किया है, जब पिछले कुछ दिन से लगातार वहां पर पाकिस्तानी सेना की कार्रवाई चल रही है. पाकिस्तानी सेना की कार्रवाई में बलूचिस्तान में सैकड़ों लोगों के मारे जाने का दावा किया जा रहा है. 

इसी बीच बलूच नेता मीर यार बलोच ने सोशल मीडिया पर बलूचिस्तान की आजादी का ऐलान किया. उन्होंने संयुक्त राष्ट्र से 'डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ बलूचिस्तान' को संप्रभु देश के तौर पर मान्यता देने की अपील की है. 

झंडा और करंसी भी जारी की

बलूचिस्तान ने अपनी आजादी के ऐलान के साथ ही अपना झंडा, करंसी और राष्ट्रगान भी जारी कर दिया. दावा है कि इस साल के आखिरी तक पाकिस्तान की सेना को पूरी तरह से बलूचिस्तान से खदेड़ दिया जाएगा.

बयान में कहा गया है- 'बलूचिस्तान ने अपनी आजादी का ऐलान कर दिया है. अपना राष्ट्रगान 'मा चुकैन बलोचानी' अपनाया है, हमारा अपना राष्ट्रीय झंडा होगा और हमारी अपनी करंसी 'बलोची फलूस' होगी. अब बलूचिस्तान की डिफेंस और सिक्योरिटी फोर्स का 85% इलाके पर कब्जा है.'

इसमें कहा गया है कि अब बलूचिस्तान की सोने और तांबे की खदानों, 150 से ज्यादा एक्टिव गैस फील्ड और 1,200 से ज्यादा कोयल खदानों पर हमारा नियंत्रण है. 

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बयान में आगे कहा गया है कि 'हमारे पास लड़ाकू विमान, हेलीकॉप्टर, टैंक, मिसाइलें या भारी तोपखाने भले न हों, लेकिन हम अपनी जमीन पर नियंत्रण रखते हैं. बलूचिस्तान की 5,000 लड़ाकों की सेना पाकिस्तान की सेनाओं को 2026 के आखिर तक उखाड़ फेंकने के लिए तैयार खड़ी है.'

इसमें अंतरराष्ट्रीय समुदाय से बलूचिस्तान को एक स्वतंत्र देश के तौर पर मान्यता देने की अपील भी की गई है. 

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आजाद क्यों हुआ बलूचिस्तान?

बलूचिस्तान ने कभी खुद को पाकिस्तान का हिस्सा ही नहीं माना. बलूच नेता मीर यार बलोच ने पिछले साल X पर एक पोस्ट में लिखा, 'एक जाने-माने पत्रकार ने मुझसे पूछा कि क्या बलूचिस्तान की आजादी का ऐलान तब होगा जब पाकिस्तानी सेना यहां से चली जाएगी? तो मैंने कहा- हमने अपनी आजादी का ऐलान 11 अगस्त 1947 को ही कर दिया था, जब अंग्रेज यहां से गए थे.'

1947 में बंटवारे के बाद जब बलूचिस्तान पाकिस्तान के हिस्से में चला गया तो बलूचों ने कहा कि वे आजाद रहना ही चाहते हैं. तब से ही बलूच अपनी आजादी के लिए लड़ाई लड़ रहे हैं.

11 अगस्त 1947 को मोहम्मद अली जिन्ना की मुस्लिम लीग और बलूचिस्तान की सबसे ताकतवर रियासत कलात के बीच एक समझौता हुआ. इसमें मुस्लिम लीग ने माना कि कलात की अपनी पहचान है और उसकी आजादी का सम्मान करते हैं.

लेकिन धीरे-धीरे बलूचिस्तान की बाकी रियासतें पाकिस्तान में चली गईं. कलात अलग-थलग पड़ गया. कलात ने भारत में आने की इच्छा जताई तो पाकिस्तान ने उस पर हमला कर दिया, कलात के खान को अगवा कर लिया गया और जबरदस्ती विलय के दस्तावेज पर दस्तखत करवा लिए. बस इसके बाद से ही बलूचिस्तान और पाकिस्तानी सेना के बीच ऐसा संघर्ष शुरू हुआ जो आज तक जारी है.

बलूचिस्तान का अलग होना कितना बड़ा झटका?

बलूचिस्तान के अलग होने का सीधा सा मतलब है लगभग आधे पाकिस्तान का साफ हो जाना. 1971 की जंग में पाकिस्तान ने अपनी जमीन का 15-16% हिस्सा खो दिया था. अब अगर बलूचिस्तान भी अलग होता है तो यह उसके लिए किसी सदमे से कम नहीं होगा, क्योंकि बलूचिस्तान सबसे बड़ा प्रांत है.

पाकिस्तान लगभग 8.82 लाख वर्ग किलोमीटर इलाके में फैला है. इसमें सबसे बड़ा बलूचिस्तान है, जो 3.47 लाख वर्ग किमी में फैला हुआ है. पाकिस्तान की जमीन में 44 फीसदी हिस्सा सिर्फ बलूचिस्तान का है.

बलूचिस्तान ने आजादी का ऐलान तो कर ही दिया है लेकिन इसे अगर अंतरराष्ट्रीय मान्यता मिलती है तो इसका मतलब होगा कि पाकिस्तान और छोटा हो जाएगा. अभी 8.82 लाख वर्ग किमी से ज्यादा इलाके में फैला पाकिस्तान 5.34 लाख वर्ग किमी में सिमट जाएगा. 

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Photo Credit: balochistan.gov.pk

सिर्फ पाकिस्तान ही नहीं, चीन को भी लगेगा झटका?

बलूचिस्तान का अलग होना सिर्फ पाकिस्तान ही नहीं, बल्कि चीन के लिए भी एक बड़ा झटका होगा, क्योंकि उसने यहां बहुत सारा पैसा लगा रखा है.

चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग की महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव के तहत यहां पर चीन-पाकिस्तान इकोनॉमिक कॉरिडोर (CPEC) बन रहा है. 65 अरब डॉलर से ज्यादा की कीमत वाले इस कॉरिडोर का मकसद चीन के पश्चिमी शिनजियांग को अरब सागर से जोड़ना है. इस कॉरिडोर में चीन हाईवे, रेलवे, पावर प्रोजेक्ट्स और बंदरगाह बना रहा है.

चीन के लिए बलूचिस्तान इसलिए भी मायने रखता है, क्योंकि इसी के दम पर उसकी मलक्का स्ट्रेट पर निर्भरता कम हो जाती है. चीन ग्वादर पोर्ट भी बना रहा है कि बलूचिस्तान के अरब सागर तट पर स्थित है. इसे CPEC का सबसे अहम हिस्सा माना जाता है. चीन को उम्मीद है कि यह पोर्ट आगे चलकर एक बड़े लॉजिस्टिक हब के तौर पर काम करेगा, जिससे चीन का माल मिडिल ईस्ट, अफ्रीका और यूरोप तक आसानी से पहुंच सकेगा.

चीन ने जिस तरह से यहां पर भारी-भरकम पैसा लगाया है, उससे बलूचिस्तान के लोग खुश नहीं हैं. बलूचों का कहना है कि चीन और पाकिस्तान मिलकर उनके संसाधनों का गलत इस्तेमाल कर रही है. यह सही भी है, क्योंकि पाकिस्तान का सबसे बड़ा प्रांत होने के साथ-साथ प्राकृतिक गैस और कोयले की खदानों के बावजूद बलूचिस्तान सबसे गरीब भी है.

पाकिस्तान के पीएम शहबाज शरीफ और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग.

पाकिस्तान के पीएम शहबाज शरीफ और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग.
Photo Credit: IANS

आखिर में- कैसा है बलूचिस्तान?

बलूचिस्तान भले ही बहुत बड़े इलाके में फैला हो, लेकिन यहां की आबादी बहुत कम है. इतनी बड़ी जमीन पर लगभग 1.5 करोड़ लोग रहते हैं. यहां की राजधानी क्वेटा है.

बलूचिस्तान की सीमाएं खैबर पख्तूनख्वाह, पंजाब और सिंध से मिलती है. इसकी सीमाएं पश्चिम में ईरान और उत्तर में अफगानिस्तान से भी लगती है, जबकि दक्षिण में अरब सागर है. 

यहां की जमीन ऊबड़-खाबड़ पहाड़ों और गहरी घाटियों वाली है. यहां की आबोहवा सूखी और रेगिस्तानी है और बारिश भी बहुत कम होती है. इसलिए यहां की केवल 5% जमीन ही खेती के लायक है. इसके बावजूद यहां की अर्थव्यवस्था में 47% योगदान खेती का है. यहां गैस, कोयला, तांबा और सोना की खदानें हैं.

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