- ईरान ने युद्ध जारी रखने का ऐलान किया है और किसी भी हालत में सीजफायर की मांग नहीं करेगा
- होर्मुज स्ट्रेट बंद होने से वैश्विक तेल सप्लाई में बाधा और कच्चे तेल की कीमतों में भारी वृद्धि हुई है
- ईरान, इजरायल और खाड़ी देशों में मिसाइल हमले और ड्रोन हमलों के चलते मध्य पूर्व में संघर्ष बढ़ा है
ईरान में शुरू हुई जंग को 11 दिन हो गए हैं. अमेरिका और इजरायल भी जिद पर अड़े हैं तो ईरान भी हार मानने को तैयार नहीं है. ईरान ने साफ कह दिया है कि वह किसी भी हाल में सीजफायर की मांग नहीं करेगा. वह और लंबी जंग लड़ने के लिए तैयार है. वहीं, अमेरिका का कहना है कि आज रात ईरान पर और जबरदस्त हमले होंगे. ईरान जंग के बाद होर्मुज स्ट्रेट बंद होने से दुनियाभर में तेल और गैस की किल्लत होने की आशंका बढ़ गई है.
28 फरवरी को ईरान पर अमेरिका और इजरायल ने हमला किया था. इन हमलों में ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह अली खामेनेई की मौत हो गई थी. इसके बाद से जंग खतरनाक हो गई है. जंग सिर्फ ईरान या इजरायल तक सीमित नहीं रही, बल्कि मिडिल ईस्ट तक फैल गई है. लेकिन इसका असर दुनियाभर में पड़ रहा है. कच्चे तेल की कीमतों में आग लग गई है. सोमवार को ब्रेंट क्रूड की कीमत 120 डॉलर प्रति बैरल पहुंच गई थी. हालांकि, मंगलवार को इसमें गिरावट आई और यह 90 डॉलर तक पहुंच गई. फिर भी 28 फरवरी से जंग शुरू होने के बाद से ये 24% ज्यादा है.
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सीबीएस न्यूज को दिए इंटरव्यू में कहा था कि युद्ध लगभग खत्म हो गया है. हालांकि, कुछ देर बाद ही उन्होंने यह भी कहा था कि जंग जीत गए हैं लेकिन अभी भी बहुत कुछ जीतना बाकी है. वहीं, इजरायल का कहना है कि उसके ईरान पर हमले जारी रहेंगे.
होर्मुज स्ट्रेट को लेकर ट्रंप-ईरान में ठनी
ईरान ने ऑयल टैंकरों को होर्मुज स्ट्रेट का इस्तेमाल करने से रोक दिया है. दुनिया का 20% कच्चा तेल इसी रास्ते से जाता है. होर्मुज स्ट्रेट के पास ऑइल टैंकरों पर ईरान हमले भी कर रहा है. इंटरनेशनल मैरीटाइम ऑर्गनाइजेशन के मुताबिक, होर्मुज स्ट्रेट के पास मर्चेंट शिप पर हुए हमलों में कम से कम 7 नाविक मारे गए हैं.
इसे लेकर ट्रंप और ईरान में ठन गई है. सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में ट्रंप ने धमकाते हुए लिखा, 'अगर ईरान ऐसा कुछ करता है जिससे होर्मुज स्ट्रेट से तेल का फ्लो रुक जाता है तो अमेरिका ने हमलों में अब तक जितना नुकसान पहुंचाया है, उससे 20 गुना ज्यादा नुकसान होगा.'

वहीं, ईरान की इस्लामिक रिवॉल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने भी धमकी देते हुए कहा कि यहां से एक लीटर तेल भी नहीं ले जाने देंगे. IRGC ने कहा कि 'ईरान अगले नोटिस तक इस इलाके से दुश्मन देश और उसके पार्टनर्स को एक लीटर भी तेल एक्सपोर्ट नहीं करने देगा.'
इस बीच सऊदी अरब की सबसे बड़ी सरकारी तेल कंपनी सऊदी अरामको के सीईओ अमीन नासिर ने कहा कि 'होर्मुज स्ट्रेट की स्थिति पूरे इलाके से तेल की सप्लाई को रोक रही है.' उन्होंने कहा कि सप्लाई कम होने से तेल की कीमत और भी बढ़ सकती है, जिसका मतलब है गैसोलीन और जेट फ्यूल की कीमतें बढ़ सकती हैं. उन्होंने कहा कि अगर इसमें लंबा समय लगता है तो इसका ग्लोबल इकनॉमी पर गंभीर असर पड़ेगा.

जंग के 11वें दिन कहां-कहां हुए हमले?
मंगलवार को ईरान ने इजरायल और खाड़ी के अरब देशों पर नए हमले किए, ताकि अमेरिका और इजरायल पर दबाव बना रहे.
दुबई के फ्यूचरिस्टिक बिजनेस हब में आने वाली मिसाइलों की चेतावनी सायरन से दी गई और बहरीन में अधिकारियों ने कहा कि ईरानी हमले ने राजधानी में एक रिहायशी इमारत को निशाना बनाया, जिसमें एक 29 साल की महिला की मौत हो गई और आठ लोग घायल हो गए.
सऊदी अरब ने कहा कि उसने अपनी ऑयल फील्ड में दो ड्रोन नष्ट किए हैं. वहीं, कुवैत का कहना है कि उसने 6 ईरानी ड्रोन मार गिराए. इजरायल में येरुशलम और तेल अवीव में धमाकों की आवाजें सुनी गईं.
ईरानी संसद के स्पीकर मोहम्मद बाघेर कलीबाफ ने X पर पोस्ट किया, 'हम सीजफायर नहीं चाहते. हमारा मानना है कि हमलावर को मुंह पर घूंसा मारना चाहिए, ताकि उसे सबक मिले और वह हमारे ईरान पर दोबारा हमला करने के बारे में कभी न सोचे.'

ईरान के एक और बड़ी सुरक्षा अधिकारी अली लारीजानी ने तो सीधे-सीधे ट्रंप को धमकी दे डाली. उन्होंने X पर लिखा 'ईरान आपकी खोखली धमकियों से नहीं डरता. आपसे बड़े लोग भी ईरान को खत्म नहीं कर सके. ध्यार रखिए, कहीं आप खुद खत्म न हो जाएं.'
वहीं, इजरायल की ओर से भी लगातार मिसाइलें दागी जा रही हैं. ईरान की राजधानी तेहरान में दिनभर में कई धमाकों की आवाजें सुनाई दीं. इजरायल ने लेबनान में हिज्बुल्लाह के कई ठिकानों को निशाना बनाया. इजरायली सेना ने दक्षिणी लेबनान के लोगों से अपने घर खाली करने की अपील की है और कहा कि वह हिज्बुल्लाह के खिलाफ जबरदस्त ऑपरेशन करने जा रहा है.
अधिकारियों के मुताबिक, जब से लड़ाई शुरू हुई है, तब से ईरान में 13सौ से ज्यादा लोग मारे चुके हैं. लेबनान में लगभग 400 लोगों की मौत हो चुकी है. वहीं इजरायल में 11 लोग मारे गए हैं. इस जंग में अमेरिका के 7 सैनिक भी मारे गए हैं.
जंग में अब पुतिन की भी हुई एंट्री
ईरान में चल रही इस जंग में अब रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की भी एंट्री हो गई है. सोमवार देर रात ट्रंप ने पुतिन को फोन किया.
क्रेमलिन के विदेश नीति सलाहकार यूरी उशाकोव ने बताया कि दोनों नेताओं में तकरीबन एक घंटे तक बात हुई. दोनों के बीच रूस-यूक्रेन के साथ-साथ ईरान-इजरायल जंग पर भी चर्चा हुई. उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति पुतिन ने ईरान में चल रही जंग पर भी अपनी राय रखी और ट्रंप को खाड़ी देशों के नेताओं और ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान के साथ पिछले हफ्ते हुई बातचीत के बारे में बताया.

बाद में पुतिन ने चेतावनी दी कि मिडिल ईस्ट में जारी संघर्ष से दुनियाभर में तेल और गैस की सप्लाई में रुकावट आने का खतरा है. उन्होंने यह भी कहा कि रूस उन देशों को तेल और गैस देता रहेगा, जिन्हें वह भरोसेमंद पार्टनर मानता है.
ट्रंप से बात करने के बाद मंगलवार को पुतिन ने ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान से फोन पर बात की. पुतिन ने तनाव को जल्द से जल्द कम करने और राजनीतिक तरीकों से इसे सुलझाने की बात कही.
अमेरिका ने कहा- अब और जबरदस्त हमले होंगे
अमेरिका के वॉर सेक्रेटरी (रक्षा मंत्री) पीट हेगसेथ ने कहा कि मंगलवार ईरान के अंदर अमेरिकी हमलों का अब तक का सबसे जोरदार दिन होगा. उन्होंने कहा, 'ईरानी सरकार परमाणु बम बनाने की कोशिश कर रही है लेकिन प्रेसिडेंट ट्रंप ऐसा नहीं होने देंगे.'
.@SECWAR “On day 10 of Operation Epic Fury: We are WINNING, with an overwhelming and unrelenting focus on our objectives...
— DOW Rapid Response (@DOWResponse) March 10, 2026
They are straightforward, and we are executing them with ruthless precision:
1) DESTROY their missile stockpiles, their missile launchers, and their… pic.twitter.com/p5dAP1N151
वहीं, इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने दावा करते हुए कहा कि 'हम उनकी हड्डियां तोड़ रहे हैं.' उन्होंने कहा कि 'हमारा मकसद ईरानी लोगों को जुल्म के बंधन से आजाद कराना है.' उन्होंने कहा कि उनका मकसद ईरानी सरकार को उखाड़ फेंकना है.
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