
प्रियंका योशिकावा
टोक्यो:
प्रियंका योशिकावा सोमवार को मिस वर्ल्ड जापान चुनी गईं. उनके पिता भारत से ताल्लुक रखते हैं. 22 वर्षीया प्रियंका ने यहां NDTV को दिए एक इंटरव्यू में कहा, ''मुझे ढेर सारे बधाई संदेश भारत से आ रहे हैं. मैंने उनसे कहा है कि मैं भारतीय नहीं हूं लेकिन वे अभी भी बधाई संदेश भेज रहे हैं.''
गौरतलब है कि प्रियंता के पिता कोलकाता से ताल्लुक रखते हैं और जब वहां छात्र के रूप में गए थे तो प्रियंका की मां से मिले. अब प्रियंका दिसंबर में वाशिंगटन में आयोजित होने जा रहे मिस वर्ल्ड प्रतियोगिता में हिस्सा लेंगी.
प्रियंका पेशेवर एलीफेंट ट्रेनर हैं और जापान में जातीय पूर्वाग्रहों के खिलाफ लड़ाई जारी रखने का उन्होंने संकल्प लिया है. उल्लेखनीय है कि जापान में हर साल पैदा होने वाले कुल बच्चों में बहुजातीय बच्चों की हिस्सेदारी महज दो प्रतिशत है.
दरअसल प्रियंका ऐसे वक्त चुनी गई हैं जब इससे पिछले साल पहली अश्वेत महिला के रूप में जापान के प्रतिनिधित्व का मौका अरियाना मियामोटो को मिला था. उस वक्त देश में उनको काफी विरोध झेलना पड़ा था.
सोशल मीडिया पर यह मुद्दा छाया रहा और इस आधार पर आलोचना हुई कि मिस यूनिवर्स जापान उनकी जगह किसी ''खालिस'' जापानी को चुना जाना चाहिए था और मिक्स रेस (अर्ध-जापानी) की किसी शख्सियत को नहीं चुना जाना चाहिए. जापान में इन लोगों को 'हाफू' (हाफ या आधा) कहा जाता है.
प्रियंका का कहना है कि वह नियमित रूप से भारत जाती हैं और कोलकाता में बेघर बच्चों की मदद को लेकर आशान्वित हैं. उन्होंने कहा, ''मैं वहां पर बच्चों के लिए एक घर बनाना चाहती हूं और मेरे पिता पहले से ही इसके लिए तैयारियां कर रहे हैं.''
ये बातें उन्होंने प्रतियोगिता के दौरान जजों से भी कहीं. हालांकि साथ ही अपनी पहचान को लेकर भी वह एकदम स्पष्ट हैं. उन्होंने कहा, ''कुछ लोग ऐसे हैं जो कहते हैं कि मैं जापानी नहीं हूं लेकिन मैं कोई मदद नहीं कर सकती-मैं जापानी हूं.''
गौरतलब है कि प्रियंता के पिता कोलकाता से ताल्लुक रखते हैं और जब वहां छात्र के रूप में गए थे तो प्रियंका की मां से मिले. अब प्रियंका दिसंबर में वाशिंगटन में आयोजित होने जा रहे मिस वर्ल्ड प्रतियोगिता में हिस्सा लेंगी.
प्रियंका पेशेवर एलीफेंट ट्रेनर हैं और जापान में जातीय पूर्वाग्रहों के खिलाफ लड़ाई जारी रखने का उन्होंने संकल्प लिया है. उल्लेखनीय है कि जापान में हर साल पैदा होने वाले कुल बच्चों में बहुजातीय बच्चों की हिस्सेदारी महज दो प्रतिशत है.
दरअसल प्रियंका ऐसे वक्त चुनी गई हैं जब इससे पिछले साल पहली अश्वेत महिला के रूप में जापान के प्रतिनिधित्व का मौका अरियाना मियामोटो को मिला था. उस वक्त देश में उनको काफी विरोध झेलना पड़ा था.
सोशल मीडिया पर यह मुद्दा छाया रहा और इस आधार पर आलोचना हुई कि मिस यूनिवर्स जापान उनकी जगह किसी ''खालिस'' जापानी को चुना जाना चाहिए था और मिक्स रेस (अर्ध-जापानी) की किसी शख्सियत को नहीं चुना जाना चाहिए. जापान में इन लोगों को 'हाफू' (हाफ या आधा) कहा जाता है.
प्रियंका का कहना है कि वह नियमित रूप से भारत जाती हैं और कोलकाता में बेघर बच्चों की मदद को लेकर आशान्वित हैं. उन्होंने कहा, ''मैं वहां पर बच्चों के लिए एक घर बनाना चाहती हूं और मेरे पिता पहले से ही इसके लिए तैयारियां कर रहे हैं.''
ये बातें उन्होंने प्रतियोगिता के दौरान जजों से भी कहीं. हालांकि साथ ही अपनी पहचान को लेकर भी वह एकदम स्पष्ट हैं. उन्होंने कहा, ''कुछ लोग ऐसे हैं जो कहते हैं कि मैं जापानी नहीं हूं लेकिन मैं कोई मदद नहीं कर सकती-मैं जापानी हूं.''
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