- एलन मस्क अंतरिक्ष में AI डेटा सेंटर स्थापित करने की योजना बना रहे हैं
- अंतरिक्ष में सौर ऊर्जा से चलने वाले सैटेलाइट के रूप में AI डेटा सेंटर बनाने का विचार अभी शुरुआती चरण में है
- मस्क के अनुसार अंतरिक्ष में AI कंप्यूटिंग करना भविष्य है और यह लागत कम करने तथा तकनीकी विकास के लिए बेहतर होगा
एलन मस्क ऐसे ही दुनिया के सबसे अमीर शख्स नहीं बने हैं, उनकी सोच भी सबसे अलग होती है. न्यूज एजेंसी रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार एलन मस्क अपनी दो कंपनियों को एक में मिलाने की तैयारी कर रहे हैं. दुनिया में सबसे पावरफुल रॉकेट बनाने वाली स्पेस कंपनी SpaceX और मस्क की AI कंपनी, xAI के विलय का प्रस्ताव सामने आया है. अब इस कदम से अंतरिक्ष में AI डेटा सेंटर बनाने के एलन मस्क के सपने को नई गति मिल सकती है. एलन मस्क का सपना है कि सैटेलाइट के रूप में AI डेटा सेंटर बनाकर लॉन्च किया जाए और उसके धरती के ऑर्बिट में स्थापित कर दिया जाए.
आपको इस एक्सप्लेनर में हम इन तीन सवालों का जवाब देंग:
- अंतरिक्ष में चक्कर काटते AI डेटा सेंटर क्या हैं?
- मस्क ऐसा क्यों करना चाहते हैं?
- यह इतना भी आसान क्यों नहीं है?
Q- अंतरिक्ष में चक्कर काटते AI डेटा सेंटर क्या हैं?
सबसे पहले तो जान लीजिए कि अंतरिक्ष में डेटा सेंटर बनाने का विचार अभी भी अपने शुरुआती चरण में है, यानी अभी इसपर काम चल रहा है, किसी ने सच में अंतरिक्ष में इसे स्थापित नहीं किया है. तो प्लान यह है कि डेटा सेंटर्स को धरती पर बनाने की जगह सैटेलाइट के एक समूह के रूप में बनाया जाए और इन्हें रॉकेट पर बैठाकर अंतरिक्ष में लॉन्च कर दिया जाए. जिस तरह चांद धरती के चक्कर काटता है, उसी तरह ये सैटेलाइट चक्कर काटेंगे. इन सैटेलाइट में सोलर पैनल लगे होंगे और उनसे ही इन्हें इनर्जी मिलेगी.

Q- मस्क ऐसा क्यों करना चाहते हैं?
एलन मस्क की स्पेस कंपनी SpaceX मानव इतिहास में सबसे पावरफुल रॉकेट बनाती है. इसने अपनी स्टारलिंक इंटरनेट सर्विस के लिए पहले ही हजारों सैटेलाइट को ऑर्बिट में सफलतापूर्वक लॉन्च किया है. एलन मस्क को लगता है कि अंतरिक्ष में डेटा सेंटर बनाकर AI कंप्यूटिंग करना ही भविष्य है. ऐसे में वह SpaceX के जरिए AI-डेटा सेंटर वाले सैलेटलाइट के समूहों को अंतरिक्ष में स्थापित करना चाहते हैं और इस रेस में सबसे आगे जाना चाहते हैं.
मस्क ने जनवरी की शुरुआत में दावोस में वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम में कहा, "अंतरिक्ष में सौर-ऊर्जा से चलने वाले डेटा सेंटर्स का निर्माण करना आसान है... AI लगाने के लिए सबसे कम लागत वाली जगह अंतरिक्ष होगी, और यह दो साल के भीतर सच हो जाएगा, बहुत से बहुत तीन साल में."
Q- यह इतना भी आसान क्यों नहीं है?
सुनने में भले यह काम सिंपल लगे लेकिन यह इतना आसान भी नहीं है. दुनिया में रॉकेट साइंस को ऐसे ही सबसे कठिन नहीं माना जाता है. जिस ऑर्बिट में इन सैटेलाइट को तैनात किया जाना है वहां पहले से ही अंतरिक्ष मलबे (डेबरिज) का खतरा है. ब्लैक होल और तारों से आती कॉस्मिक किरणें से सैलेटाइट के इन हार्डवेयर को बचाना होगा. कुल मिलाकर इंजीनियर्स और स्पेस साइंटिस्ट्स को डर है कि क्या यह प्लान आर्थिक और व्यवहारिक रूप से सही है भी या नहीं.
रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार डॉयचे बैंक को उम्मीद है कि पहले हमें 2027-28 में छोटे पैमाने के ऑर्बिटल डेटा-सेंटर को तैनात करना होगा. देखना होगा कि क्या यह व्यवहारिक साबित हो रहा है या नहीं. अगर यह सफल रहा तब जाकर 2030 के दशक में संभावित रूप से सैकड़ों या हजारों ऐसे सैटेलाइट भेजे जा सकते हैं.
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