- अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने मिफेप्रिस्टोन गोली की टेलीमेडिसिन प्रिस्क्रिप्शन और डिलीवरी पर लगी रोक को पलट दिया है
- पांचवें यूएस सर्किट कोर्ट ऑफ अपील्स ने मिफेप्रिस्टोन की ऑनलाइन प्रिस्क्रिप्शन और डाक से डिलीवरी पर रोक लगाई थी
- सर्किट कोर्ट में रिपब्लिकन नियुक्त जजों की संख्या अधिक है, जो रूढ़िवादी विचारधारा के माने जाते हैं
अमेरिका में अबॉर्शन की एक गोली को लेकर अमेरिकी अदालतों में टकराव शुरू हो गया है. इस दवा का नाम है- मिफेप्रिस्टोन (Mifepristone). इस दवा को टेलीमेडिसिन के जरिए प्रिस्क्राइब करने और पोस्ट के जरिए डिलिवर करने पर अपील कोर्ट ने रोक लगा दी थी. लेकिन अब अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने इस फैसले को पलट दिया है और एक बार फिर से इसकी बिक्री को चालू कर दिया है.
अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने 2022 में अबॉर्शन को लेकर एक अहम फैसला दिया था और इस परत प्रतिबंध लगाने की अनुमति राज्यों को दे दी थी. इसके बाद से ही कई बार अदालतें ऐसे फैसले दे चुकी हैं, जिन पर सुप्रीम कोर्ट को दखल देना पड़ा है.
क्या है पूरा मामला?
अब यह मामला अमेरिका के न्यू ऑरलियन्स स्थित 5वें यूएस सर्किट कोर्ट ऑफ अपील्स का 1 मई को आया एक फैसला है. इस फैसले में सर्किट कोर्ट ऑफ अपील्स ने मिफेप्रिस्टोन को टेलीमेडिसिन के जरिए प्रिस्क्राइब करने और पोस्ट से भेजे जाने पर रोक लगा दी थी.
यह कोर्ट अमेरिका के 12 रीजनल अपील कोर्ट में से एक है, जो सुप्रीम कोर्ट से एक पायदान नीचे है. यह कोर्ट लुइसियाना, टेक्सास और मिसिसीप के मामलों की सुनवाई करता है. तीनों राज्यों रिपब्लिकन है. इस अदालत के 17 में से 12 जजों को रिपब्लिकन राष्ट्रपतियों ने नियुक्त किया था, जिनमें से 6 को तो डोनाल्ड ट्रंप ने नियुक्त किया है. इन जजों को कट्टर और दक्षिणपंथी सोच का माना जाता है.
5वां सर्किट कोर्ट उन रूढ़िवादी सोच वालों के लिए एक पसंदीदा कोर्ट बन गया है जो अपने एजेंडे को आगे बढ़ाना चाहते हैं. इसने गर्भपात, गन राइट्स और धार्मिक आजादी जैसे मुद्दों पर फैसले दिए हैं.
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सुप्रीम कोर्ट का फैसला क्या है?
न्यूज एजेंसी रॉयटर्स के मुताबिक, 5वें सर्किट कोर्ट के कई फैसले इतने आगे निकल गए हैं कि उन्हें रूढ़ीवादी सुप्रीम कोर्ट भी मंजूरी नहीं दे रहा है. अब 1 मई के फैसले पर ही सुप्रीम कोर्ट ने रोक लगा दी है. यह रोक तब तक जारी रहेगी जब तक लुइसियाना में चल रही सुनवाई पूरी नहीं हो जाती. लुइसियाना में भी इस गोली को सीमित करने की मांग की गई है.
सुप्रीम कोर्ट ने 6-3 से इस फैसले पर अस्थायी रोक लगा दी है. ये सभी 6 जज रूढ़िवादी जज हैं. इनमें से सिर्फ दो जज- क्लेरेंस थॉमस और सैमुअल एलिटो ने ही इस फैसले का विरोध किया था.
सुप्रीम कोर्ट और अपील कोर्ट में होता रहा है टकराव
5वें सर्किट कोर्ट के फैसलों के खिलाफ अक्सर लिबरल सोच वाले सुप्रीम कोर्ट में अपील करते हैं. हालिया सालों में सुप्रीम कोर्ट ने जिन मामलों को सुना है, उनमें 5वें सर्किट कोर्ट के फैसले सबसे ज्यादा हैं.
रॉयटर्स के मुताबिक, 2025-26 के 9 महीनों के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने 5वें सर्किट कोर्ट से जुड़े 10 मामलों में सुनवाई की है. इससे पहले 2024-25 में सुप्रीम कोर्ट ने 13 मामलों पर सुनवाई की थी. इन 13 में से 10 मामलों पर सुप्रीम कोर्ट ने फैसला पलट दिया था.
ओक्लाहोमा यूनिवर्सिटी के लॉ प्रोफेसर माइकल स्मिथ ने कहा कि ऐसे कई उदाहरण हैं जहां सुप्रीम कोर्ट 5वें सर्किट का इस्तेमाल करके खुद को ज्यादा संतुलित या लिबरल दिखाने की कोशिश करता है.
2025-26 में सुप्रीम कोर्ट ने 5वें सर्किट कोर्ट से जुड़े 4 मामलों पर फैसला सुनाया है, जिनमें से सिर्फ एक मामले में ही फैसले को सही ठहराया है. 5वें सर्किट कोर्ट से जुड़े दो और मामलों पर अगले महीने तक फैसला आने की उम्मीद है.
मिफेप्रिस्टोन का मामला क्या है?
2023 में बाइडेन सरकार के दौरान अमेरिका के फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (FDA) ने एक नया नियम लागू किया था. इस नियम के तहत अबॉर्शन की गोली मिफेप्रिस्टोन को टेलीमेडिसिन के जरिए प्रिस्क्राइब करने और डाक से भेजने की अनुमति दी गई थी.
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