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हार के सबूत, 200 ताबूत और खौफनाक तस्वीरें... क्या बलूचों के सामने घुटने टेक चुके हैं पाकिस्तान के जनरल मुनीर?

बलूचिस्तान की पथरीली वादियों में इस वक्त पाकिस्तान की सैन्य साख के परखच्चे उड़ रहे हैं. अंतरराष्ट्रीय मंचों पर जनरल आसिम मुनीर भले ही 'ऑल इज वेल' का राग अलाप रहे हों. लेकिन जमीन पर बिछी 200 से ज्यादा सैनिकों की लाशें और उनके ताबूत कुछ और ही कहानी बयां कर रहे हैं.

हार के सबूत, 200 ताबूत और खौफनाक तस्वीरें... क्या बलूचों के सामने घुटने टेक चुके हैं पाकिस्तान के जनरल मुनीर?
  • बलूचिस्तान में बीते 26 वर्षों से चल रहे विद्रोह में बलूच आर्मी ने पाकिस्तान से स्वतंत्रता का लक्ष्य रखा है.
  • बलूच विद्रोहियों ने 200 से अधिक पाकिस्तानी सैनिकों को मार गिराया है जिससे पाक सेना की विफलता उजागर हुई है.
  • पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ने स्वीकार किया कि बलूच विद्रोहियों के पास अत्याधुनिक हथियार हैं.
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बलूचिस्तान में मौजूदा हालात पाकिस्तान की सैन्य लीडरशिप के दावों के ठीक उलट नजर आ रहे हैं. भले ही अंतरराष्ट्रीय मंचों पर यह दावा कर रहे हों कि स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में है. लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही बयां कर रही है. हालिया, संघर्षों में बलूच विद्रोहियों द्वारा 200 से अधिक पाकिस्तानी सैनिकों को ताबूत में वापस भेजने की खबरों ने मुनीर के इन दावों की पोल खोल दी है. पाकिस्तान की सैन्य विफलता के इन सबूतों के सामने आने के बाद अब यह सवाल जोर पकड़ने लगा है कि क्या जनरल मुनीर ने सरेंडर कर दिया है.

बलूचिस्तान की जंग.. 26 साल का संघर्ष 

दिल्ली से लगभग 1000 किलोमीटर दूर, बलूचिस्तान अपनी आजादी के लिए एक निर्णायक जंग लड़ रहा है. करीब 26 साल पहले गठित 'बलूच लिबरेशन आर्मी' (BLA) का मुख्य उद्देश्य बलूचिस्तान को पाकिस्तान से अलग कर एक स्वतंत्र राष्ट्र के रूप में स्थापित करना है, जिसका अपना अलग झंडा और विशिष्ट पहचान हो. हालांकि, दशकों से पाकिस्तानी सेना ने इस विद्रोह को बेरहमी से कुचलने की नीति अपनाई है. इस दौरान अनगिनत बलूच युवाओं के 'गायब' होने और सेना के गुप्त टॉर्चर रूम्स की खौफनाक कहानियों ने बलूच नागरिकों के दिलों में पाकिस्तानी हुकूमत और सेना के खिलाफ नफरत की आग को और तेज कर दिया है.

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बलूचिस्तान में विरोध प्रदर्शन कोई नई बात नहीं है, लेकिन इस बार BLA ने जिस स्तर का 'आजादी आंदोलन' छेड़ा है, उसने इस्लामाबाद और रावलपिंडी की सत्ता को हिला कर रख दिया है. स्थिति इतनी गंभीर हो चुकी है कि पाकिस्तान के मंत्री खुद स्वीकार कर रहे हैं कि उनके पास बलूच विद्रोहियों का मुकाबला करने के लिए पर्याप्त संसाधन और आधुनिक हथियार नहीं हैं. 200 से 300 पाकिस्तानी सैनिकों के मारे जाने की खबरों ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पाकिस्तान की सैन्य शक्ति पर सवाल खड़े कर दिए हैं. वर्तमान हालातों को देखते हुए अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या पाकिस्तानी जनरल ने बलूचिस्तान में अपनी हार स्वीकार कर ली है और विद्रोहियों के सामने घुटने टेक दिए हैं?

जमीन पर बिछी लाशें.... बलूचिस्तान में मुनीर की सेना का सच

बलूचिस्तान में पाकिस्तानी सेना की जो दुर्दशा हो रही है, उसके आंकड़े चौंकाने वाले हैं. यह गिनती अब 10-20 तक सीमित नहीं रही, बल्कि 200 से अधिक पाकिस्तानी सैनिकों के शवों ने आसिम मुनीर के सैन्य नेतृत्व पर गहरे सवाल खड़े कर दिए हैं. जनरल मुनीर भले ही अपनी वर्दी पर 'फर्जी' तमगे और मेडल सजाकर अपनी बहादुरी का ढोंग करते हों. लेकिन बलूचिस्तान के लड़ाकों ने युद्ध के मैदान में उन्हें कड़वी हकीकत से रूबरू करा दिया है. जिन सैनिकों के दम पर रावलपिंडी का अहंकार टिका था, आज उनकी लाशों के ढेर मुनीर की रणनीतिक विफलता और बलूचिस्तान में उनके नियंत्रण के दावों की पोल खोल रहे हैं.

डॉ. महरंग बलूच की दोटूक चेतावनी

मशहूर एक्टिविस्ट डॉ. महरंग बलूच ने पाकिस्तानी हुकूमत को आईना दिखाते हुए स्पष्ट कर दिया है कि बलूचिस्तान ने अपना इरादा और रास्ता चुन लिया है. उन्होंने याद दिलाया कि बलूच वह कौम है जिसने 1971 के दौर में भी ऐसे आंदोलन खड़े किए थे, जिनकी मिसाल पूरे पाकिस्तान में कहीं और नहीं मिलती. डॉ. महरंग ने तीखे शब्दों में कहा कि उनके पूर्वजों और पिताओं ने पाकिस्तान को विरोध की राजनीति का सही हुनर और तरीका सिखाया था. लेकिन सत्ता के नशे में चूर हुक्मरानों ने उससे कोई सबक नहीं लिया. उन्होंने साफ चेतावनी दी कि पाकिस्तान की सेना और सरकार वर्तमान में देश को जिस बर्बादी की ओर ले जा रही है. 

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'हम कातिल नहीं, वतन के रखवाले हैं'

बलूच लिबरेशन आर्मी (BLA) के कमांडर ने अपने इरादे साफ करते हुए कहा है कि दुश्मन का आमने-सामने मुकाबला करना और उसे नेस्तनाबूद करना उनके लिए कोई कठिन चुनौती नहीं है. उन्होंने संगठन की विचारधारा को स्पष्ट करते हुए कहा कि वे न तो कातिल हैं, न तानाशाह और न ही कोई बर्बर जल्लाद या आतंकवादी. लेकिन, जब बात बलूचिस्तान की अखंडता और सुरक्षा की आती है, तो वे अपनी मातृभूमि की हिफाजत के लिए किसी भी हद तक जाने को तैयार हैं. कमांडर के अनुसार, उनका यह जज्बा और प्रतिशोध की क्षमता उस सीमा तक जा सकती है, जिसकी कल्पना तक उनके दुश्मन ने कभी नहीं की होगी. यह उनके अपने वतन के प्रति अटूट प्रेम और समर्पण का परिचायक है.

सरेंडर का पुराना नाता

यही वह अटूट जज्बा और वतन के प्रति समर्पण है, जिसने खुद को दुनिया की '14वीं सबसे ताकतवर सेना' बताने वाले पाकिस्तान को एक बार फिर सरेंडर की दहलीज पर ला खड़ा किया है. बलूचिस्तान के लड़ाकों के सामने पाकिस्तानी सेना आज उसी 'सरेंडर मोड' में नजर आ रही है, जो उसकी ऐतिहासिक नियति रही है. सच तो यह है कि आत्मसमर्पण और पाकिस्तान का नाता कोई आज का नहीं, बल्कि दशकों पुराना है. इतिहास गवाह है कि जब-जब हौसले और हक की बात आई है, कागजी तौर पर ताकतवर दिखने वाली यह सेना मैदान छोड़कर घुटने टेकने पर मजबूर हुई है. आज बलूचिस्तान की वादियों में वही पुराना इतिहास एक बार फिर दोहराया जा रहा है.

'संघर्ष के अलावा कोई दूसरा विकल्प शेष नहीं'

फतेह ब्रिगेड के सदस्य गाजी दूरजान बलूच ने एक निर्णायक संदेश देते हुए स्पष्ट कर दिया है कि अब बलूच कौम के पास संघर्ष के अलावा कोई दूसरा विकल्प शेष नहीं है. उन्होंने आह्वान किया है कि समय आ गया है जब हर बलूच को इस जंग का हिस्सा बनकर अपने भाइयों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर आगे बढ़ना होगा. बलूचिस्तान की आजादी और BLA के समर्थन में उठती ये आवाजें अब केवल पुरुषों तक सीमित नहीं हैं, बलूच बहन-बेटियां भी जनरल मुनीर की फौज का सामना करने के लिए रणक्षेत्र में उतर चुकी हैं. आसिफा मेंगल और हवा बलोच जैसी वीरांगनाओं ने अपने बलिदान और अदम्य साहस से यह साबित कर दिया है कि मिशन के लिए शहादत कैसे दी जाती है. यह इस बात का प्रमाण है कि अब यह लड़ाई एक जन-आंदोलन का रूप ले चुकी है जिसे दबाना पाकिस्तान के लिए नामुमकिन नजर आ रहा है.

पाकिस्तानी मंत्रियों का कबूलनामा: 'बलूचों के सामने बेबस है हमारी फौज'

जनरल मुनीर के सरेंडर की कहानी अब किसी से छिपी नहीं है, क्योंकि खुद पाकिस्तान के मंत्रियों ने अंतरराष्ट्रीय मंच पर अपनी सैन्य विफलता को स्वीकार कर लिया है. पाकिस्तान सरकार के प्रतिनिधियों ने खुलेआम यह कबूल किया है कि बलूच लड़ाकों ने पाकिस्तानी सेना को भारी नुकसान पहुँचाया है. स्थिति यहाँ तक पहुँच गई कि विद्रोहियों ने न केवल सैनिकों को मौत के घाट उतारा, बल्कि उनसे उनके आधुनिक हथियार और यहाँ तक कि उनकी वर्दियाँ तक छीन लीं.

पाकिस्तानी रक्षा मंत्री की लाचारी: "विद्रोहियों के पास हमसे बेहतर हथियार हैं"

पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने खुद दुनिया के सामने अपनी सेना की तकनीकी हार स्वीकार करते हुए एक चौंकाने वाला खुलासा किया है. उन्होंने स्वीकार किया कि बलूच लड़ाकों के पास मौजूद आधुनिक हथियारों का मुकाबला करने की क्षमता पाकिस्तानी फौज में नहीं है. ख्वाजा आसिफ के अनुसार, विद्रोहियों के पास ऐसी अत्याधुनिक राइफलें हैं जिनकी कीमत 20 लाख रुपये से अधिक है, जबकि पाकिस्तानी सेना के पास वैसा गियर उपलब्ध नहीं है. उन्होंने विस्तार से बताया कि लड़ाके ऐसी लेजर तकनीक और थर्मल सेंसर्स का उपयोग कर रहे हैं जो शरीर की गर्मी को डिटेक्ट कर सटीक निशाना लगाते हैं. मंत्री ने बेबसी जताते हुए कहा कि विद्रोहियों का एक-एक सेट, जिसमें नाइट विजन गॉगल्स और एडवांस राइफलें शामिल हैं, करीब 20 हजार डॉलर का है. 

बलूचिस्तान में सेना की रणनीतिक विफलता: बंद गली में फंसे जनरल मुनीर

बलूचिस्तान के नक्शे पर नजर डालें तो रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ की लाचारी साफ समझ आती है. 'ऑपरेशन हेरोफ 2' के दौरान बलूच लिबरेशन आर्मी (BLA) ने नोश्की, क्वेटा, ग्वादर, मस्तंग और तर्बत जैसे रणनीतिक इलाकों में पाकिस्तानी सेना को सीधे युद्ध की चुनौती दी. इस संघर्ष ने न केवल पाकिस्तानी फौज के होश उड़ा दिए, बल्कि अब सोशल मीडिया पर पाकिस्तानी सैनिकों के सरेंडर के वीडियो वैश्विक स्तर पर वायरल हो रहे हैं. पीटीआई नेता शहबाज गिल ने एक डॉक्यूमेंट्री का हवाला देते हुए स्पष्ट किया कि बलूचिस्तान में यह कोई 'चंद लोगों' का विद्रोह नहीं, बल्कि एक व्यापक जन-आंदोलन है. यह सेना की सियासी और सामाजिक नाकामी का परिणाम है, जहाँ गरीबी और बेरोजगारी ने आग में घी का काम किया है. अंतरराष्ट्रीय मीडिया, जैसे अल-जजीरा, का भी मानना है कि पाकिस्तान अपनी नाकामियों को छिपाने के लिए भारत पर दोष मढ़कर मामले को अंतरराष्ट्रीय रंग देने की कोशिश कर रहा है.

जमीनी हकीकत और आंकड़ों के खेल में भी भारी विरोधाभास है. जहां BLA ने 200 से अधिक पाकिस्तानी सैनिकों को मार गिराने का दावा किया है, वहीं पाकिस्तानी सेना अपनी 'तथाकथित' कामयाबी के दावे कर रही है. वरिष्ठ पत्रकार मोइद पीरजादा का विश्लेषण डराने वाला है; उनका कहना है कि जनरल आसिम मुनीर अपने तरकश के सभी तीर चला चुके हैं, लेकिन हर फैसला पाकिस्तान को और कमजोर कर रहा है. मुनीर अब एक ऐसी 'बंद गली' में फंस चुके हैं जहाँ से निकलने का कोई रास्ता नहीं सूझ रहा. जनता में सेना के प्रति नफरत लगातार बढ़ती जा रही है, जो भविष्य के लिए एक बड़े खतरे का संकेत है.

इस सैन्य विफलता का सबसे बड़ा असर ग्वादर में दिख रहा है, जो चीन के CPEC प्रोजेक्ट का केंद्र है. BLA द्वारा चीनी कॉम्प्लेक्स को निशाना बनाए जाने के बाद बीजिंग ने अपनी कूटनीतिक शालीनता छोड़ शहबाज शरीफ सरकार को सीधी लताड़ लगाई है. चीन ने साफ कह दिया है कि या तो सुरक्षा सुनिश्चित करें या अपना बोरिया-बिस्तर समेटें. CPEC में करीब 65 अरब डॉलर के निवेश और सुरक्षा पर खर्च किए गए अरबों रुपयों के बावजूद, बलूच लड़ाकों ने जनरल मुनीर की सुरक्षा गारंटी को धुआं-धुआं कर दिया है. पाकिस्तान अब न केवल अपनों के सामने हार रहा है, बल्कि अपने सबसे बड़े कर्जदाता चीन का भरोसा भी खो चुका है.

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