- मोहम्मद दीपक उर्फ दीपक कुमार कोटद्वार के एक जिम ट्रेनर हैं, जो फिटनेस ट्रेनिंग देने का काम करते हैं
- 26 जनवरी 2026 को दीपक ने हिंदू-मुस्लिम विवाद के बीच खुद को मोहम्मद दीपक बताकर इंसानियत का संदेश दिया
- सोशल मीडिया पर दीपक का नाम तेजी से वायरल हो रहा है, उनके फॉलोअर्स भी काफी बढ़ गए हैं
मोहम्मद दीपक, ये नाम इन दिनों सोशल मीडिया पर ट्रेंड कर रहा है. हर किसी की जुबान पर मोहम्मद दीपक नाम है. राहुल से लेकर ओवैसी तक, हर कोई उनकी तारीफ में कसीदे पढ़ रहा है. आखिर यह मोहम्मद दीपक है कौन? यह नाम कहां से आया. इसके पीछे की कहानी उत्तराखंड के कोटद्वार से शुरू होती है. कोटद्वार जिसे उत्तराखंड का गेट कहा जाता है यानी उत्तराखंड का द्वार.मोहम्मद दीपक नाम सुनकर लगता है कि यह कैसा नाम है आधा मुस्लिम और आधा हिंदू . लेकिन जिस शख्स का यह नाम है उसका असली नाम दीपक कुमार है. उन्होंने खुद को मोहम्मद दीपक क्यों कहा, इसकी कहानी 26 जनवरी 2026 से शुरू हुई, जिस दिन देश 77 गणतंत्र दिवस मना रहा था.
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कौन हैं मोहम्मद दीपक?
मोहम्मद दीपक उर्फ दीपक कुमार एक पेशे से जिम ट्रेनर हैं. वह कोटद्वार में बॉडी बिल्डिंग की ट्रेनिंग देते हैं. दीपक का जिम कोटद्वार के बद्रीनाथ मार्ग के पास है. पिछले कई सालों से वह युवाओं को फिट रहने की ट्रेनिंग देते हैं. उनके पिता का देहांत करीब 15 साल पहले हो गया था दीपक शादीशुदा है और उनकी एक बेटी भी है. उनकी मां आज भी कोटद्वार में एक टी स्टॉल चलती हैं.
सोशल मीडिया पर क्यों छाये दीपक कुमार?
दीपक कुमार पिछले 30 सालों से जिम फिटनेस और जिम ट्रेनिंग का काम कर रहे हैं. उन्होंने एनडीटीवी को बताया कि उनका जन्म और पढ़ाई-लिखाई कोटद्वार में ही हुई है. ग्रेजुएशन उन्होंने श्रीनगर गढ़वाल यूनिवर्सिटी से किया. वह बॉडीबिल्डिंग चैंपियनशिप में मुंबई भी जा चुके हैं. बॉडीबिल्डिंग ओलंपियाड में वह टॉप सिक्स में रहे थे. लेकिन 26 जनवरी को हुई घटना के बाद दीपक के सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म फेसबुक और इंस्टाग्राम पर फॉलोअर्स की बाढ़ आ गई है. लगातार लोग उनको फॉलो कर रहे हैं. दीपक कुमार बेहद सामान्य घर से आते . वह न सिर्फ जिम में फिटनेस की ट्रेनिंग देते हैं बल्कि अपने फेसबुक, इंस्टाग्राम से भी ऑनलाइन फिटनेस टिप्स देते हैं.
खुद को मोहम्मद दीपक क्यों कहा?
दीपक कुमार ने क्यों मोहम्मद दीपक नाम अपना बताया. इसके पीछे की कहानी यह है कि 26 जनवरी को कोटद्वार में एक दुकान के नाम को लेकर हिंदूवादी संगठनों ने आपत्ति दर्ज कराई थी. क्योंकि इस दुकान का नाम बाबा स्कूल गारमेंट्स था. हिंदूवादी संगठनों का कहना था कि मुस्लिम दुकानदार बाबा नाम नहीं रख सकता, क्योंकि बाबा नाम हिंदुओं से जुड़ा है. इसके पीछे की वजह वे लोग कोटद्वार के प्रसिद्ध हनुमान मंदिर जिनका नाम सिद्धबली बाबा से जोड़ रहे थे.
ऐसे में वकील अहमद नाम के मुस्लिम दुकानदार ने कहा कि उनकी दुकान पिछले 30 साल पुरानी है. वह कोटद्वार में पिछले 30 साल से कारोबार कर रहे हैं. ऐसे में किसी ने भी बाबा नाम शब्द पर आपत्ति दर्ज नहीं कराई. उन्होंने कहा कि बाबा नाम सभी धर्मों में लिया जाता है. इसका सिद्धबली बाबा से कोई लेना-देना नहीं. इसी दौरान दीपक कुमार उर्फ मोहम्मद दीपक वकील अहमद के बचाव में आए और उन्होंने बजरंग दल और हिंदूवादी संगठन के लोगों से बातचीत की, लेकिन इस दौरान मामला गंभीर हो गया.
इंसानियत सबसे बड़ा धर्म
इस बहस में दीपक कुमार ने हिंदूवादी संगठन और बजरंग दल के लोगों के सवाल पूछे जाने पर कहा कि मेरा नाम मोहम्मद दीपक है. और यही नाम 26 जनवरी 2026 से देशभर में ट्रोल कर रहा है. इस पर सोशल मीडिया पर रील भी बन रही हैं. दीपक कुमार से जब पूछा गया कि आप ने क्या सोचकर मोहम्मद दीपक नाम लिया और क्या कारण था कि आप उसे भीड़ में बीच बचाव में गए. इस पर उन्होंने कहा कि मैं एक आम इंसान हूं. मैं ना हिंदू हूं ,न मुसलमान, न सिक्ख और न ईसाई. उन्होंने इंसानियत को सबसे बड़ा धर्म बताया. उन्होंने कहा कि मरने के बाद इंसान के कर्म ही देखे जाते हैं कि उसने कैसा कर्म किया है.
देश में सभी को रहने का हक, किसी को टारगेट करना गलत
दीपक कुमार ने एनडीटीवी को बताया कि जब बजरंग दल के 8 से 10 कार्यकर्ता वकील अहमद की दुकान में जब उनका नाम पूछ रहे थे को अचानक से उनकी जुबान पर मोहम्मद दीपक नाम आया. ये नाम बोलने का मकसद बजरंग दल कार्यकर्ताओं को ये बताना था कि वह एक आम इंसान हैं और देश के नागरिक हैं. भारत में सभी को रहने का हक है. किसी एक व्यक्ति को बेवजह टारगेट करना बिल्कुल गलत है.
सही का रास्ता चुनो. नफरत फैलाने से कुछ नहीं होता
दीपक कुमार ने कहा कि सभी को अपने धर्म के आधार पर पूजा करने का अधिकार है. इस घटना के बाद उनकी जिंदगी पूरी तरह से बदल गई है. लोग उनको फोन कर रहे हैं. उन्होंने कभी ये सोचा नहीं था कि ये सब हो जाएगा और उनको लोग इतना पसंद करेंगे. वह बेहद सामान्य घर से आते हैं. उनके परिवार का पेट इसी जिम से चलता है. लेकिन इस घटना के बाद जिम का काम भी बंद है. उनकी मां लगातार चाय की दुकान चला रही हैं, ताकि घर का खर्च चल सके. उन्होंने कहा कि लोगों का बहुत प्यार मिल रहा है. वह लोगों से अपील करना चाहते हैं कि सही का रास्ता चुनो. नफरत फैलाने से कुछ नहीं होता. सभी को भारत में रहने का अधिकार है. सभी को अपने धर्म को मानने का अधिकार है.
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