- उत्तराखंड में फॉरेस्ट फायर सीजन 15 फरवरी से शुरू हो चुका है और वन विभाग ने मॉक ड्रिल आयोजित कर तैयारी पूरी
- 1 नवंबर 2025 से 18 फरवरी 2026 तक कुल 63 फॉरेस्ट फायर घटनाएं हुईं, जिनसे 35.91 हेक्टेयर जंगल प्रभावित हुआ है
- पिछले दस वर्षों में राज्य में कुल 14,638 आग की घटनाएं दर्ज हुईं और 23,697.77 हेक्टेयर जंगल जल चुका है
उत्तराखंड में फॉरेस्ट फायर सीजन 15 फरवरी से शुरू हो चुका है. उत्तराखंड फॉरेस्ट डिपार्टमेंट इसको लेकर सभी तरह की तैयारी पूरी कर चुका है. गुरुवार, यानी 18 फरवरी को वन विभाग ने फॉरेस्ट फायर सीजन को लेकर राज्यभर में मॉक ड्रिल आयोजित की. प्रदेश के सभी वन प्रभाग, राष्ट्रीय उद्यान और अभ्यारण्यों द्वारा फॉरेस्ट फायर मॉक ड्रिल एक्सरसाइज की गई. इस मॉक ड्रिल में आपदा प्रबंधन, राजस्व विभाग, पुलिस संचार, SDRF, NDRF, चिकित्सा स्वास्थ्य विभाग की टीमें शामिल हुईं. साथ ही वन पंचायत, ग्राम स्तरीय वनाग्नि सुरक्षा समितियां, महिला/युवा मंगल दल और स्वयंसेवी संस्थाओं ने भी प्रतिभाग किया.

63 घटनाएं दर्ज, 35.91 हेक्टेयर जंगल प्रभावित
फॉरेस्ट फायर सीजन में उत्तराखंड में वन संपदा के साथ वन्यजीवों और मानव जीवन को भी नुकसान पहुंचता है. 1 नवंबर 2025 से 18 फरवरी 2026 तक उत्तराखंड में कुल 63 आग लगने की घटनाएं रिकॉर्ड की गई हैं, जिनमें 35.91 हेक्टेयर जंगल प्रभावित हुआ है. सिविल सोयम और वन पंचायत क्षेत्रों में 6.35 हेक्टेयर जंगल प्रभावित हुआ है.
किस जिले में कितनी आग लगी?—डिविजनवार विवरण
- टोंस पुरोला डिवीजन: 7 घटनाएं, 1.7 हेक्टेयर जंगल प्रभावित
- चकराता डिवीजन: 6 घटनाएं, 0.5 हेक्टेयर जंगल प्रभावित
- बद्रीनाथ गोपेश्वर डिवीजन: 6 घटनाएं, 2.7 हेक्टेयर जंगल प्रभावित
- अलकनंदा सोली कंजर्वेशन (गोपेश्वर): सिविल सोयम वन पंचायत क्षेत्र में 1 घटना
- नंदा देवी नेशनल पार्क डिवीजन: 8 घटनाएं, कुल 21.5 हेक्टेयर जंगल प्रभावित;
- इसमें 4.5 हेक्टेयर सिविल सोयम वन पंचायत क्षेत्र
- केदारनाथ वाइल्डलाइफ डिवीजन: 35 घटनाएं, कुल 15.86 हेक्टेयर जंगल प्रभावित;
- इनमें से 1.85 हेक्टेयर सिविल सोयम वन पंचायत क्षेत्र

10 साल के आंकड़े: 14,638 घटनाएं, 23,697.77 हेक्टेयर जंगल जला
पिछले 10 सालों के आंकड़ों में हर साल जंगल जलने की घटनाएं दर्ज हुई हैं. 10 वर्षों में:
- 14,638 आग की घटनाएं
- 23,697.77 हेक्टेयर जंगल प्रभावित
- 35 लोगों की मौत
- 66 लोग घायल
वर्षवार फॉरेस्ट फायर डाटा
2016
- घटनाएं: 2074
- प्रभावित क्षेत्र: 4433.75 हेक्टेयर
- मौतें: 6
- घायल: 21
2017
- घटनाएं: 805
- प्रभावित क्षेत्र: 1244.64 हेक्टेयर
- घायल: 1
2018
- घटनाएं: 2150
- प्रभावित क्षेत्र: 4480.04 हेक्टेयर
- घायल: 6
2019
- घटनाएं: 2158
- प्रभावित क्षेत्र: 2981.55 हेक्टेयर
- मौतें: 1
- घायल: 15
2020
- घटनाएं: 135
- प्रभावित क्षेत्र: 172.69 हेक्टेयर
- मौतें: 2
- घायल: 1
2021
- घटनाएं: 2813
- प्रभावित क्षेत्र: 3943.89 हेक्टेयर
- मौतें: 8
- घायल: 3
2022
- घटनाएं: 2186
- प्रभावित क्षेत्र: 3425.05 हेक्टेयर
- मौतें: 2
- घायल: 7
2023
- घटनाएं: 773
- प्रभावित क्षेत्र: 933.55 हेक्टेयर
- मौतें: 3
- घायल: 3
2024
- घटनाएं: 1276
- प्रभावित क्षेत्र: 1771.66 हेक्टेयर
- मौतें: 13
- घायल: 7
2025
- घटनाएं: 268
- प्रभावित क्षेत्र: 310.95 हेक्टेयर
- घायल: 2

बारिश–बर्फबारी कम, ड्राई सीजन लंबा, आग का खतरा ज्यादा
मुख्य वन संरक्षक और वनाग्नि एवं आपदा प्रबंधन के नोडल अधिकारी सुशांत कुमार पटनायक ने जानकारी दी कि इस बार बारिश और बर्फबारी कम हुई है, जिससे ड्राई सीजन लंबा हो गया है. ऐसे में जंगलों में आग लगने का खतरा काफी बढ़ गया है. इसी वजह से पूरे राज्य में मॉक ड्रिल आयोजित की गई, ताकि आग लगने की स्थिति में तुरंत और प्रभावी कार्रवाई की जा सके.
फॉरेस्ट फायर से निपटने के लिए तैयारियां
- 1438 फॉरेस्ट फायर क्रू स्टेशन
- 40 मास्टर फायर कंट्रोल रूम
- 5600 फॉरेस्ट फायर वॉचर तैनात
- हर फायर वॉचर का 10–10 लाख रुपये का बीमा
पटनायक के अनुसार, वन विभाग ने इस बार फॉरेस्ट फायर को रोकने और नियंत्रित करने के लिए पूरी तैयारी कर ली है
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