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This Article is From Jan 13, 2026

उत्तराखंड में फूलों की घाटी के पास क्यों सुलग रहे जंगल? लोग बेबस, अब सेना से मांगी मदद

Uttarakhand Forest Fire: वनाग्नि एवं आपदा प्रबंधन के नोडल अधिकारी और सीसीएफ सुशांत कुमार पटनायक ने बताया कि आग काफी ऊंचाई वाले क्षेत्र में फैल चुकी है. हमारी टीम वहां तक पहुंच नहीं पा रही है इसलिए वन विभाग ने जिला प्रशासन की मदद से राज्य आपदा प्रबंधन विभाग को एक पत्र लिखा है.

उत्तराखंड में फूलों की घाटी के पास क्यों सुलग रहे जंगल? लोग बेबस, अब सेना से मांगी मदद
कैसे बुझेगी चमोली के जंगल में लगी आग.
  • उत्तराखंड के चमोली जिले के फूलों की घाटी से सटे दुर्गम जंगलों में लगी आग पर काबू पाना चुनौतीपूर्ण हो गया है
  • आग क्षेत्र की ऊंचाई लगभग तीन हजार पांच सौ मीटर है, जहां वनकर्मी और एसडीआरएफ की टीमें पहुंच नहीं पा रही हैं
  • वन विभाग ने आपदा प्रबंधन विभाग को पत्र लिखकर वायु सेना से हेलीकॉप्टर द्वारा आग बुझाने में मदद मांगी है
देहरादून:

उत्तराखंड के चमोली जिले के विश्व विख्यात और विश्व धरोहर फूलों की घाटी से सटे जंगलों में लगी आग लगातार बढ़ती जा रही है. आग पर काबू पाना इसलिए मुश्किल हो गया है, क्योंकि जिस क्षेत्र में आग लगी है वह ऊंचाई वाला और बेहद दुर्गम है. यही वजह है कि एसडीआरएफ और वनकर्मी उस क्षेत्र में पहुंच ही नहीं पा रहे हैं, जिसकी वजह से आग काफी विकराल हो गई है. अब इस आग पर काबू पाने के लिए डीएम चमोली ने आपदा प्रबंधन विभाग को एक पत्र लिखा है. पत्र में कहा गया है कि आग काफी विकराल है और काफी ऊंचाई वाले क्षेत्र में है. इस पर काबू पाने के लिए वायु सेना से मदद ली जाए.

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बढ़ रहीं जंगलों में आग की घटनाएं

बता दें कि पिछले लंबे समय से उत्तराखंड में न तो बारिश हुई है और ना ही ऊंचाई वाले क्षेत्रों में बर्फबारी हुई है. साल 2025 का नवंबर और दिसंबर का महीना बिना बारिश के ही गुजर गया. 2026 जनवरी के महीने के 13 दिन गुजर गए हैं, लेकिन बारिश अब तक नहीं हुई. ऐसे में जंगलों में लगने वाली आग की घटनाएं बढ़ती जा रही हैं. राज्य में 13 जनवरी 2026 तक 33 जगह पर आग लगने की घटनाएं सामने आई हैं, जिसकी वजह से 13.54 हेक्टेयर जंगल प्रभावित हुआ है.

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9 जनवरी को लगी आग, अब तक नहीं बुझी

फूलों की घाटी से सटे जंगलों में आग 9 जनवरी को लगी थी. कुछ जगहों पर काबू पा लिया गया था, लेकिन आग फिर से काफी भड़क चुकी है. चमोली के भ्यूंडार पुलना की पहाड़ियों में आग लगी है, यह क्षेत्र बेहद ही दुर्गम और खड़ी चट्टानों वाला है. जिसकी वजह से बंद कमी और एसडीआरएफ की टीमें अभी तक ऊपरी क्षेत्र में नहीं पहुंच पाई हैं. आग लगने की वजह से पहाड़ों से पत्थर गिर रहे हैं, जिससे पैदल रास्ते में जाना बहुत मुश्किल होता जा रहा है.

हेलीकॉप्टर से छिड़काव की एकमात्र विकल्प

समुद्र तल से लगभग 3500 मीटर की ऊंचाई पर स्थित पुलना और भ्यूंडार गांव के ठीक सामने की पहाड़ियों पर 9 जनवरी से आग धधक रही है. वन विभाग की टीम ने जान जोखिम में डालकर आग पर काबू पाने का प्रयास किया, लेकिन क्षेत्र की विषम भौगोलिक परिस्थितियों और हाड़ कंपा देने वाली ठंड की वजह से टीम को पीछे हटना पड़ा. अब इस आग को नियंत्रित करने के लिए केवल हेलीकॉप्टर की मदद से हवाई छिड़काव ही एकमात्र विकल्प नजर आ रहा है.

वनाग्नि की गंभीरता को देखते हुए वन क्षेत्राधिकारी चेतना कांडपाल के नेतृत्व में 10 सदस्यीय टीम घटनास्थल के लिए रवाना हुई थी. विभाग ने सर्वप्रथम स्थानीय ग्राम पुलना के महिला मंगल दल और अन्य ग्रामीणों से सहयोग की अपील की, ताकि सामूहिक प्रयासों से आग को बुझाया जा सके. हालांकि, आग वाले स्थान के अत्यधिक दुर्गम और जोखिम भरा होने के कारण ग्रामीणों ने वहां जाने में असमर्थता जताई. ग्रामीणों का स्पष्ट कहना था कि ऐसी खड़ी और खतरनाक पहाड़ियों पर जाना जीवन को सीधे तौर पर संकट में डालना है.

प्रकृति की चुनौतियों ने रोका रास्ता

विभागीय टीम ने प्रतिकूल परिस्थितियों के बावजूद आगे बढ़ने का निर्णय लिया और दांडीसाल के रास्ते लक्ष्मण गंगा को पार किया. लेकिन जैसे-जैसे टीम ऊपर की ओर बढ़ी, प्रकृति की चुनौतियों ने रास्ता रोक दिया. भीषण ठंड की वजह से रास्ते में पड़ने वाले झरने पूरी तरह जम चुके हैं, जिससे चट्टानों पर बर्फ की चादर बिछ गई है और फिसलन बढ़ गई है. पहाड़ियों के एकदम सीधे और खड़े (वर्टिकल) होने के कारण टीम 2 किलोमीटर से आगे नहीं बढ़ सकी और सुरक्षा कारणों से उन्हें वापस लौटना पड़ा.

जमीनी स्तर पर पहुंच संभव न देख, विभाग ने आधुनिक तकनीक का सहारा लिया. एक दूसरी टीम ने भ्यूंडार की ओर से ड्रोन सर्वेक्षण कर आग के विस्तार का जायजा लिया. ड्रोन फुटेज में वर्तमान में कोई बड़ी सक्रिय लपटें तो दिखाई नहीं दी हैं, लेकिन ऊंचाइयों पर धुआं उठ रहा है, जो वन संपदा के सुलगने का संकेत है. वन क्षेत्राधिकारी चेतना कांडपाल ने बताया कि 3500 मीटर की ऊंचाई पर स्थित इन चोटियों तक पैदल पहुंचना फिलहाल नामुमकिन है. स्थानीय जानकारों और अधिकारियों का मानना है कि अगर आग दोबारा फैलती है, तो इसे बुझाने के लिए हेलीकॉप्टर ही अंतिम सहारा होगा. फिलहाल वन विभाग की टीम मुस्तैदी के साथ स्थिति की निगरानी कर रही है.

सेना से मांगी जा रही मदद

जिला अधिकारी चमोली गौरव कुमार ने बताया की फूलों की घाटी के पीछे के पर्वतों में आग की घटना हुई है, जिसमें वन विभाग की और से आग बुझाने की चुनौतियों को देखते हुए सेना की मदद की बात कही है. जिसके लिए जिला प्रशासन ने शासन को पत्राचार किया. सेना की ओर से आग प्रभावित क्षेत्रों में निगरानी की जा रही है जिसके बाद आग बुझाने का कार्य शुरू होगा.

वनाग्नि एवं आपदा प्रबंधन के नोडल अधिकारी और सीसीएफ सुशांत कुमार पटनायक ने बताया कि आग काफी ऊंचाई वाले क्षेत्र में फैल चुकी है. हमारी टीम वहां तक पहुंच नहीं पा रही है इसलिए वन विभाग ने जिला प्रशासन की मदद से राज्य आपदा प्रबंधन विभाग को एक पत्र लिखा है. उन्होंने बताया कि अभी सिविल एविएशन से एक हेलीकॉप्टर लेकर फॉरेस्ट के अधिकारी और कर्मचारी उसे क्षेत्र का दौरा करेंगे और प्रभावित क्षेत्र का अध्ययन करेंगे. जिला प्रशासन से मदद मांगी गई है कि वह इसमें वायुसेना के हेलीकॉप्टर से ऊंचाई वाले क्षेत्रों में आग बुझाने में मदद करें.

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