- देहरादून में बीते 16 दिनों में पांच लोगों की दिनदहाड़े गोली मारकर हत्या की गई
- विक्रम शर्मा नाम के प्रॉपर्टी डीलर की शुक्रवार सुबह जिम के बाहर गोली मारकर हत्या कर दी गई
- पुलिस ने हत्या को गैंगवार से जोड़ा है. गढ़वाल आईजी और एसएसपी मामले की जांच कर रहे हैं
उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में अपराध और दिनदहाड़े हत्या करने का सिलसिला थम नहीं रहा है. बीते तीन दिनों में दो लोगों की सरेआम गोली मारकर हत्या कर दी गई है. पिछले 16 दिनों में देहरादून में ही पांच लोगों की हत्याएं हो चुकी हैं. शुक्रवार सुबह फिर एक वारदात को अंजाम दिया गया. यहां राजपुर रोड सिल्वर सिटी कॉम्प्लेक्स में विक्रम शर्मा नाम के एक शख्स को गोली मार दी गई. तीन दिन पहले ही 11 फरवरी को तिब्बती मार्केट के बाहर एक कारोबारी की दिनदहाड़े गोली मारकर हत्या की गई थी.
इन वारदातों ने पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. बेखौफ बदमाशों ने सरेआम वारदात को अंजाम देकर देहरादून पुलिस को खुली चुनौती दी है.
घटना की सूचना मिलते ही आईजी गढ़वाल राजीव स्वरूप, एसएसपी अजय सिंह, एसएसपी एसटीएफ नवनीत भुल्लर भी मौके पर पहुंचे. सभी एंगलों से जांच की जा रही है. बताया जाता है कि मृतक विक्रम शर्मा खुद भी गैंगस्टर था. उस पर 50 से अधिक मुकदमे दर्ज हैं. इनमें 20 से अधिक हत्या के मुकदमे हैं. मामले के तार झारखंड गैंग से जुड़े हैं. पुलिस इस घटना को गैंगवार से जोड़ रही है.

उत्तराखंड में बढ़ता जा रहा है अपराध का ग्राफ
उत्तराखंड जैसे हिमालय राज्य में भी अपराध लगातार बढ़ता जा रहा है. देहरादून, हरिद्वार ,उधम सिंह नगर और नैनीताल जिले में अपराध की संख्या राज्य के अन्य जिलों की तुलना में ज्यादा बड़ी है, फिर चाहे इसमें हत्या हो, लूटपाट हो या फिर महिला अपराध से जुड़े मामले हों, हर किसी में आंकड़े बढ़े हैं. उत्तराखंड को कभी क्राइम फ्री राज्य माना जाता था, लेकिन राज्य गठन के बाद यहां पर तेजी से अपराध बढ़ता रहा है. इसके पीछे की वजह जानकार बताते हैं कि राज्य में जैसे-जैसे फाइनेंशियल इन्वेस्टमेंट और अन्य तरह का विकास हुआ है, उसे यहां पर क्राइम का ग्राफ बढ़ रहा है. उत्तराखंड में 13 जिले हैं जिसमें हरिद्वार और उधम सिंह नगर पूर्ण रूप से मैदानी जिला है. तो देहरादून और नैनीताल जिला का कुछ भाग पर्वतीय लेकिन ज्यादातर मैदानी क्षेत्र है. देहरादून, हरिद्वार और उधम सिंह नगर से अपराध की सबसे ज्यादा खबरें आती रही हैं.
राजधानी देहरादून में पिलेछ में16 दिनों पांच लोगों की हत्याएं हो चुकी हैं. लगातार कानून व्यवस्था खराब हो रही है. उत्तराखंड कांग्रेस बिगड़ती कानून व्यवस्था को लेकर 16 फरवरी को राजभवन का घेराव करने जा रही है. वहीं शुक्रवार को ही एनएसयूआई के कार्यकर्ताओं ने पुलिस मुख्यालय का घेराव किया.

आंकड़े ये भी बताते हैं कि राज्य में महिलाओं के साथ अपराध भी तेजी से बढ़ा है. 2021 से 2023 के बीच उत्तराखंड में करीब 1822 महिलाओं के साथ दुष्कर्म के मामले दर्ज हुए हैं. वहीं 1796 महिलाओं का अपहरण किया गया है.
उत्तराखंड में पिछले पांच सालों में 10500 महिलाएं और बालिकाएं गुमशुदा हुईं. जिसमें पुलिस 9733 को ढूंढने में सफल रही, लेकिन 757 महिलाएं आज भी लापता हैं.
- 2021: गुमशुदा 1494 महिलाओं व 404 बालिकाओं में से 62 महिलाएं और छह बालिकाएं आज भी लापता
- 2022: गुमशुदा 1632 महिलाओं व 425 बालिकाओं में से 79 महिलाएं और आठ बालिकाएं अब तक नहीं मिलीं
- 2023: गुमशुदा 1764 महिलाओं व 716 बालिकाओं में से 75 महिलाएं और नौ बालिकाएं आज भी लापता
- 2024: गुमशुदा 1953 महिलाओं व 838 बालिकाओं में से 153 महिलाएं और 25 बालिकाएं आज भी गायब
वर्षवार अज्ञात शवों की स्थिति
- 2021: 74 शव, केवल 27 की पहचान
- 2022: 50 शव, 17 की पहचान
- 2023: 77 शव, 18 की पहचान
- 2024: 88 शव, 19 की पहचान
- 2025: 29 शव, सिर्फ 6 की पहचान
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