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This Article is From Dec 19, 2025

केदारनाथ धाम से 'गायब' बर्फ, दिसंबर भी बीतता जा रहा, वैज्ञानिक भी मौसमी बदलाव से हैरान

दिसंबर का आधा माह बीत जाने के बाद भी बाबा केदार की नगरी फिलहाल 'बर्फ विहीन' है. जहां आमतौर पर इन दिनों केदारनाथ धाम 5 फीट से अधिक बर्फ की चादर में लिपटा रहता था, वहीं इस साल मौसम के बदले मिजाज ने वैज्ञानिकों और स्थानीय लोगों को हैरान कर दिया है.

केदारनाथ धाम से 'गायब' बर्फ, दिसंबर भी बीतता जा रहा, वैज्ञानिक भी मौसमी बदलाव से हैरान
  • केदारनाथ धाम में दिसंबर के मध्य तक भी बर्फबारी नहीं हुई है, जिससे स्थानीय और वैज्ञानिक हैरान हैं
  • इस बार केदारनाथ में रात का तापमान अधिक गिरने के बावजूद बर्फ नहीं जमने से मजदूर केवल सीमित समय काम कर पा रहे
  • द्वितीय चरण के पुनर्निर्माण कार्यों में भूमिगत बिजली और पेयजल लाइनों की स्थापना तेजी से जारी है

दिसंबर का आधा माह बीत जाने के बाद भी बाबा केदार की नगरी फिलहाल 'बर्फ विहीन' है. जहां आमतौर पर इन दिनों केदारनाथ धाम 5 फीट से अधिक बर्फ की चादर में लिपटा रहता था, वहीं इस साल मौसम के बदले मिजाज ने वैज्ञानिकों और स्थानीय लोगों को हैरान कर दिया है. बर्फबारी न होने का सीधा असर यहां चल रहे विकास कार्यों पर पड़ रहा है, जो कड़ाके की ठंड के बावजूद थमे नहीं हैं.

बर्फबारी नहीं, पर 'कोरी ठंड' का सितम

पिछले सालों के विपरीत, केदारनाथ धाम में आखिरी बर्फबारी 20 नवंबर को हुई थी. दिसंबर का तीसरा सप्ताह शुरू होने के बाद भी चोटियां सूखी हैं. धाम में रात का तापमान -10 डिग्री सेल्सियस तक गिर रहा है. सुबह 10 बजे धूप आती है और दोपहर बाद ओझल हो जाती है, जिससे मजदूर केवल 5 से 6 घंटे ही काम कर पा रहे हैं. फिलहाल धाम में लगभग 150 मजदूर मौजूद हैं, जो बिना बर्फ वाली इस 'कोरी ठंड' में भी विकास कार्यों को गति दे रहे हैं.

क्या-क्या निर्माण कार्य हैं प्रगति पर?

बर्फबारी न होने के कारण द्वितीय चरण के पुनर्निर्माण कार्य लगातार जारी हैं. हालांकि, अत्यधिक ठंड के कारण सीमेंट (Concrete) से जुड़े काम रोक दिए गए हैं, लेकिन अन्य महत्वपूर्ण कार्य चल रहे हैं. बिजली और पेयजल की लाइनों को भूमिगत (Underground) करने का कार्य तेजी से किया जा रहा है. 2013 की आपदा में ध्वस्त हुए इस ऐतिहासिक मार्ग को दुरुस्त किया जा रहा है. यहां करीब 80 श्रमिक रैलिंग और मार्ग सुधार के कार्य में लगे हैं. इस मार्ग के खुलने से आगामी यात्रा सीजन में श्रद्धालुओं को आवागमन के लिए एक वैकल्पिक और सुगम रास्ता मिल सकेगा.

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आपदा के 'श्राप' को बनाया 'वरदान'

2013 की त्रासदी में चौराबाड़ी से बहकर आए विशालकाय बोल्डर (पत्थर) अब केदारपुरी की भव्यता बढ़ा रहे हैं. इन पत्थरों को तराश कर अद्भुत कलाकृतियां उकेरी जा रही हैं. रुद्रप्रयाग के जिलाधिकारी प्रतीक जैन ने बताया, "भक्त बाबा केदार के दर्शन के बाद जब केदारपुरी का भ्रमण करेंगे, तो ये कलाकृतियां उन्हें एक अलग आध्यात्मिक अनुभव प्रदान करेंगी." 

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पत्थरों पर क्या-क्या उकेरा गया है?

धाम में बोल्डरों पर मंदिर, गौ माता, भगवान गणेश, शंकर, विष्णु, लक्ष्मी, सरस्वती, पार्वती, कार्तिकेय, ऋषि मुनियों के चित्र उकेरे जा रहे हैं। इन कलाकृतियों में देवी-देवताओं के विभिन्न आसन दर्शाए गए हैं, जबकि पंच पांडव भी बनाए गए हैं तो पशु-पक्षियों को भी बहुत ही सुंदर तरीके से बनाया गया है, जिन्हें देखकर केदारपुरी की भव्यता और अधिक बढ़ रही है.

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