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उत्तराखंड में घुसने के बाद लौटे निहंगों ने पांवटा साहिब में डाला डेरा, DM-SSP ने ताजा हालात पर क्या बताया

पूरा विवाद 16 जून को कर्णप्रयाग में निहंगों और स्थानीय लोगों के झगड़े से शुरू हुआ था, जिसके बाद 4 निहंग गिरफ्तार हुए और 20 जून को नगरासू गुरुद्वारे में बुजुर्ग को बंधक बनाने की घटना भी हुई थी.

सीमा इलाके पर उत्तराखंड पुलिस बल और डीएम-एसएसपी.
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पंजाब से हिमाचल के रास्ते उत्तराखंड कूच की कोशिश कर रहे निहंग सिखों को लेकर पांवटा साहिब सीमा पर (हिमाचल और उत्तराखंड बॉर्डर) पुलिस बल अभी भी तैनात है. हालांकि, निहंगों और देहरादून प्रशासन के बीच कई घंटों से जारी गतिरोध बातचीत के बाद समाप्त हो गया और निहंग हिमाचल प्रदेश के पांवटा साहिब लौट गए, जिससे विकासनगर क्षेत्र के कुल्हाल जांच चौकी पर उत्पन्न तनावपूर्ण स्थिति समाप्त हो गई. हालांकि, किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए शुक्रवार को भी जिला प्रशासन अभी भी पूरी तरह एक्शन मोड में नजर आया था.

मौके पर पहुंचे जिलाधिकारी डॉ. आशीष चौहान और एसएसपी प्रमेन्द्र डोबाल ने खुद सीमा का निरीक्षण कर सुरक्षा इंतजामों का जायजा लिया और साफ कर दिया कि किसी भी सूरत में बड़े जत्थों को उत्तराखंड में प्रवेश नहीं करने दिया जाएगा, लेकिन उत्तराखंड में आस्था और विश्वास का भाव लेकर छोटे समूह में आने वालों पर कोई रोक नहीं होगी.

एसएसपी ने NDTV से क्या कहा?

इस दौरान मौके पर पहुंचे SSP देहरादून प्रमेन्द्र सिंह डोभाल ने एनडीटीवी से खास बातचीत में कहा कि पांवटा साबित गुरुद्वारे में जाकर सभी बात हुई है. कई लोगों ने हमारी बात को माना है और प्रशासन ने भी उनकी दो-तीन मांगों के बारे में उच्च अधिकारियों को बताया है.

गुरुवार-शुक्रवार की रात निहंगों की पुलिस से हुई थी झड़प.

गुरुवार-शुक्रवार की रात निहंगों की पुलिस से हुई थी झड़प (Photo- IANS).

एसएसपी इस दौरान साफ किया कि निहंगों की उत्तराखंड में प्रवेश नहीं करने दिया जाएगा. अगर विश्वास या आस्था का प्रश्न है तो उसके लिए चारधाम पहले से खुले हुए हैं. हेमकुंड साहिब धाम भी खुले हुए हैं. छोटे समहू में अगर जाना चाहें तो जा सकते, लेकिन इस तरह से नहीं. इसके साथ ही उन्होंने कहा कि तोड़-फोड़ और व्यवधान करने वालों पर अग्रिम कार्यवाही की जाएगी.

निहंगों की मांगों पर सरकार के अनुसार होगी कार्यवाही

मौके पर पहुंचे जिला अधिकारी आशीष चौहान ने बताया कि फिलहाल हालात सामान्य हैं और हमारा शीर्षमडंल गुरूद्वारे में निहंग साहिबानों के साथ वार्ता कर रहा है. गुरुवार रात से ही हमारी बात बहुत पॉजिटिव तरीके से हो रही है. उनका जो भी मांग पत्र होगा, उसपर जो आवश्यक कार्यवाही होगी वह मुख्यमंत्री या सरकार के निर्देश के अनुसार की जाएगी.

क्या है पूरा मामला

गौरतलब है कि 16 जून को कर्णप्रयाग बाजार में स्थानीय लोगों और निहंगों के एक अन्य समूह के बीच विवाद हिंसक हो गया था, जिसमें कुछ स्थानीय लोग और एक निहंग घायल हो गए थे। घटना के बाद पुलिस ने मामला दर्ज कर चार निहंगों को गिरफ्तार कर लिया था. सिख समुदाय के एक वर्ग ने इस कार्रवाई को प्रशासन की ‘‘एकतरफा'' कार्रवाई बताया था.

इससे जुड़े एक अन्य घटनाक्रम में 20 जून को करीब आधा दर्जन निहंग बदरीनाथ राजमार्ग स्थित नगरासू गुरुद्वारे की छत पर चढ़ गए थे और गिरफ्तार निहंगों की रिहाई की मांग करते हुए एक बुजुर्ग को बंधक बना लिया था. स्थानीय प्रशासन, गुरुद्वारा प्रबंधन और पंजाब से आए समुदाय के प्रतिनिधियों के साथ वार्ता के बाद मंगलवार को गुरुद्वारा खाली करा लिया गया था.

किया था देहरादून कूच का ऐलान

उधर, निहंगों ने इसी मामले में देहरादून कूच का ऐलान किया था और सरकार ने बृहस्पतिवार को उत्तराखंड-हिमाचल प्रदेश सीमा पर भारी पुलिस बल तैनात किया गया था. जब वह सीमा इलाके उत्तराखंड में विकासनगर क्षेत्र के कुल्हाल जांच चौकी के पास पहुंचे तो तनाव उत्तपन्न हो गया. पुलिस बल ने बैरिकेडिंग लगाकर उनको आगे बढ़ने से रोक दिया था. इस दौरान पुलिस से झड़प भी हुई थी.

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पांवटा में रुके निहंग, कई मांगों पर बनी सहमति

उत्तराखंड कूच के ऐलान के बीच शुक्रवार को पांवटा साहिब गुरुद्वारे में प्रशासन, पुलिस और निहंग सिख प्रतिनिधियों के बीच अहम वार्ता हुई. बैठक में गिरफ्तार चार निहंगों की रिहाई, एम्स ऋषिकेश में भर्ती निहंग से मुलाकात और हेमकुंड साहिब यात्रा पूरी कराने की मांग उठाई गई. निहंग प्रतिनिधियों ने सरकार को मांगों पर निर्णय के लिए दो दिन का समय दिया है. तब तक करीब 250 निहंग पांवटा साहिब में ही डेरा डाले रहेंगे.

वार्ता में इस बात पर भी सहमति बनी कि भविष्य में निहंगों के साथ किसी प्रकार की अभद्रता नहीं होगी और बिना पगड़ी कोर्ट ले जाने के मामले की जांच कर दोषियों पर विभागीय कार्रवाई की जाएगी. वहीं, कानून-व्यवस्था का हवाला देते हुए पुलिस ने जत्थे को टुकड़ियों में यात्रा की अनुमति देने का प्रस्ताव रखा, जिस पर सकारात्मक चर्चा हुई.

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