उत्तराखंड हाईकोर्ट ने सीजेपी के प्रदर्शन में शामिल होने दिल्ली जा रहे एक शख्स को पुलिस द्वारा नियमों के खिलाफ जाकर उसे अज्ञात स्थान पर ले जाने को लेकर दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए सख्त टिप्पणी की. जस्टिस रविंद्र मैठानी और जस्टिस सिद्धार्थ साह की पीट ने सरकार से कई सवाल किए. कोर्ट ने पूछा कि आखिर किस अपराध के लिए उत्तराखंड परिवर्तन पार्टी के अध्यक्ष प्रभात ध्यानी को उठा लिया गया? कोर्ट 16 सितंबर को इस मामले की सुनवाई करेगी.
आरोप है कि उत्तराखंड पुलिस ने ऋषिकेश रेलवे स्टेशन से 19 जुलाई की शाम को पुलिस द्वारा नियमों के खिलाफ जाकर ध्यानी को रेल के डिब्बे से जबरन उठाकर उन्हें अज्ञात स्थान पर उठाकर ले गए. इसी के खिलाफ याचिका दाखिल की गई थी. मामले की सुनवाई के बाद जस्टिस मैठानी और जस्टिस साह की खंडपीठ ने राज्य सरकार सहित अन्य पक्षकारों से चार सप्ताह मे जवाब पेश करने को कहा है.
कोर्ट में हुई सुनवाई पर राज्य सरकार ने घटना की स्थिति से अवगत कराया कि पुलिस ने उनके खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धारा 172 के तहत कार्रवाई की है. क्योंकि वे छात्रों और सीजेपी के दिल्ली प्रोटेस्ट में भाग लेने जा रहे थे. इस संबंध मे दिल्ली पुलिस ने सभी राज्यों को एक नोटिस जारी कर कहा था कि जो भी व्यक्ति इसमें शामिल होने को आ रहा है उन्हें वे राज्य अपने ही बॉर्डर एरिया पर रोक दें. इसपर कोर्ट ने सरकार से कई सवाल किए? कोर्ट ने पूछा कि किस नियम के तहत किस अपराध के लिए उन्हें रेल से उठा लिया? आपको कैसे पता कि वे प्रोटेस्ट मे शामिल होने जा रहे थे? क्या यह नागरिकों कि स्वतंत्रता का हनन नहीं है. जो कहीं आ जा नहीं सकते?
उत्तराखंड परिवर्तन पार्टी के केंद्रीय सचिव लाल मणि ने ध्यानी को पुलिस द्वारा उठाने के खिलाफ हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की थी. उत्तराखंड परिवर्तन पार्टी के केंद्रीय अध्यक्ष प्रभात ध्यानी सोनम वांगचुक के विरोध प्रदर्शन में भाग लेने के लिए कल शाम ऋषिकेश से दिल्ली जा रहे थे. उन्होंने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट डाली थी कि हम और उत्तराखंड परिवर्तन पार्टी के लोग छात्रों की शिक्षा की मांग और सोनम वांगचुक के समर्थन मे भाग लेने जा रहे हैं. तभी उन्हें ऋषिकेश रेलवे स्टेशन में उत्तराखंड पुलिस ने हिरासत में ले लिया गया. प्रभात ध्यानी का जब कुछ पता नही चल सका कि उन्हें पुलिस कहा लेकर गई है और उनका स्वास्थ्य कैसा है तो उनके परिवार को कई परेशानियों का सामना करना पड़ा. ध्यानी का मोबाइल भी जब्त कर लिया गया था. याचिका में कहा गया है कि इस तरह से एक वयस्क व्यक्ति को रेलवे स्टेशन से हिरासत में लिया जाना मौलिक अधिकारों का हनन है. जिसके लिए पुलिस की जवाबदेही तय की जानी चाहिए. याचिका में कहा गया था कि बिना किसी कारण के शख्स को उठाना नियम के विरूद्ध है.
NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं