धर्मनगरी हरिद्वार में खाने के एक नाम को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है. ‘वेज बिरयानी' के खिलाफ साधु-संतों ने मोर्चा खोल दिया है और इसे धर्म व संस्कृति के खिलाफ बताया. शहर में कई जगहों पर साधु-संतों ने दुकानों और ठेलों पर जाकर ‘वेज बिरयानी' के बोर्ड हटवाए और उनकी जगह ‘वेज पुलाव' लिखने की मांग की.
राहुल चौहान की रिपोर्ट...
दुकानों पर पहुंचकर किया विरोध प्रदर्शन
अखंड परशुराम अखाड़े के नेतृत्व में साधु-संतों ने शहर के अलग-अलग इलाकों में अभियान चलाया. इस दौरान वे उन दुकानों और ठेलों तक पहुंचे, जहां ‘वेज बिरयानी' के बोर्ड लगे हुए थे. संतों ने इन बोर्डों का विरोध जताया और कई जगहों पर ‘वेज पुलाव' के स्टिकर चिपका दिए. साथ ही दुकानदारों से अपील की कि वे हरिद्वार की धार्मिक भावना का सम्मान करें.
संतों की बड़ी संख्या में भागीदारी
इस अभियान में अखाड़े के अध्यक्ष पंडित अधीर कौशिक, स्वामी कार्तिक गिरी महाराज और कथा व्यास पंडित पवन कृष्ण आचार्य समेत बड़ी संख्या में साधु-संत शामिल हुए. सभी ने मिलकर इस मुहिम को आगे बढ़ाया और दुकानदारों से संवाद भी किया.
‘व्यापार के खिलाफ नहीं, संस्कृति के पक्ष में'
पंडित अधीर कौशिक ने साफ कहा कि उनका उद्देश्य किसी व्यक्ति या व्यापार का विरोध करना नहीं है. उन्होंने दुकानदारों को समझाते हुए कहा कि यह पहल हरिद्वार की धार्मिक और सांस्कृतिक मर्यादाओं को बनाए रखने के लिए की जा रही है. उनका कहना था कि धर्मनगरी की पहचान और परंपराओं को बचाए रखना सभी की जिम्मेदारी है.
सावन और कुंभ से पहले बढ़ी सक्रियता
अधीर कौशिक ने बताया कि संगठन को काफी समय से इस मुद्दे पर शिकायतें मिल रही थीं. उन्होंने कहा कि आने वाले समय में सावन और कुंभ जैसे बड़े धार्मिक आयोजन हैं, ऐसे में शहर की पहचान और ज्यादा महत्वपूर्ण हो जाती है. उनका कहना था कि हरिद्वार गंगा जी का पवित्र स्थल है और यहां ‘वेज बिरयानी' जैसे शब्दों का इस्तेमाल उचित नहीं है.
प्रशासन से भी की कार्रवाई की मांग
संतों ने प्रशासन से भी सहयोग की अपील की है. उन्होंने मांग की कि जिन ठेलों या दुकानों पर ‘वेज बिरयानी' लिखा हो, उनके खिलाफ कार्रवाई की जाए और यह सुनिश्चित किया जाए कि ‘वेज पुलाव' ही लिखा जाए. उनका कहना था कि धर्मनगरी में वही शब्द और परंपराएं चलनी चाहिए जो सनातन संस्कृति के अनुरूप हों.
स्वामी कार्तिक गिरी ने जताया समर्थन
स्वामी कार्तिक गिरी ने इस अभियान का समर्थन करते हुए कहा कि जहां-जहां ‘वेज बिरयानी' लिखा है, वहां इसका विरोध जारी रहेगा. उन्होंने बताया कि दुकानदारों को समझाया गया है और कई लोगों ने बात को मान भी लिया है. उनका कहना था कि हरिद्वार जैसे धार्मिक स्थान पर ऐसे शब्दों का प्रयोग नहीं होना चाहिए जो संस्कृति से मेल नहीं खाते.
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