- उत्तरकाशी के धराली गांव में 5 अगस्त को आए सैलाब ने कल्प केदार मंदिर सहित पूरे इलाके को मलबे में दफन कर दिया.
- कल्प केदार मंदिर प्राचीन पांडवकालीन था. यहां कुल 240 छोटे मंदिर थे, जो अब लुप्त हो चुका है.
- मंदिर का आधा हिस्सा पहले से जमीन के नीचे था, 12 फीट खुदाई कर मंदिर के कुछ हिस्से को बाहर निकाला गया था.
Dharali Kalp Kedar Mandir: उत्तराखंड के उत्तरकाशी जिले में स्थित धराली गांव में 5 अगस्त को आए भीषण सैलाब ने सब कुछ तबाह कर दिया. इस गांव में कल्प केदार का एक ऐतिहासिक मंदिर था. जो अब मलबे में समाधि ले चुका है. ग्राउंड जीरो पर पहुंची एनडीटीवी की टीम उस जगह पर भी पहुंची, जहां 5 अगस्त को दोपहर से पहले तक कल्प केदार मंदिर हुआ करता था. लेकिन आज यहां केवल बड़े-बड़े पत्थरों का ढेर लगा है. स्थानीय लोगों ने बताया कि यहीं भगवान कल्प केदार का मंदिर था. जो अब मलबे के नीचे जा चुका है.

हालांकि स्थानीय लोगों का कहना है कि यह मंदिर फिर से सुरक्षित बाहर निकलेगा. एनडीटीवी से स्थानीय लोगों ने कहा कि हमें पूरा विश्वास है कि धरती में समाया मंदिर टूटा नहीं होगा. वह सुरक्षित होगा. वह इसी शैली में बना है. बरसों पहले भी मंदिर धरती के अंदर से सुरक्षित निकला था.
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कल्प केदार मंदिर के पुजारी और स्थानीय लोग.
पुजारी ने कहा- हम लोग उन्हीं के सहारे यहां रहते थे
कल्प केदार के पुजारी प्रथम सिंह पवार ने कहा कि पांडवों ने यहां 240 मंदिर बनाए थे. हम लोगों रोज शाम 7 बजे यहां आरती किया करते थे. उन्होंने सरकार से मांग की इस मलबे से मंदिर को बाहर निकालें. हम लोग उन्हीं के सहारे यहां जीते थे. पूरे गांव के लोग और टूरिस्ट भी यहां आते थे. मंदिर 15 से 20 फीट नीचे थे. शिवलिंग सफेद रंग का था.

यह वहीं जगह है, जहां कल्प केदार मंदिर था.
कल्प केदार में 240 छोटे-छोटे मंदिर थे
यहां के स्थानीय लोगों का कहना है कि हजारों साल से यह मंदिर था. इस मंदिर का जिक्र केदार खंड में भी था. यहां पर 240 छोटे-छोटे मंदिर थे. लेकिन पहले के हादसों में कई मंदिर लुप्त होते गए. पांडवों ने यहां पर यह मंदिर बनाया था. कहा जाता है कि पांडवों के ब्रह्म हत्या, पितृ हत्या, महाभारत युद्ध के हुए हत्याओं के पापों से मुक्ति के लिए यहां मंदिरों का निर्माण किया गया था.
धरती में समाए कल्प केदार प्रकट हो जाएंगे!
— NDTV India (@ndtvindia) August 9, 2025
उत्तराखंड के उत्तरकाशी जिले में स्थित धराली गांव में 5 अगस्त को आए भीषण सैलाब ने सब कुछ तबाह कर दिया. इस गांव में कल्प केदार का एक ऐतिहासिक मंदिर था. जो अब मलबे में समाधि ले चुका है. ग्राउंड जीरो पर पहुंची एनडीटीवी की टीम उस जगह पर भी… pic.twitter.com/r3MaLJbpAA
कल्प केदार अब समाधि में पहुंच चुका है. हालांकि लोगों का कहना है कि वो कल्प केदार को मलबे से बाहर निकालेंगे और पहले की तरह से फिर यहां पर पूजा होगी. कल्प केदार मंदिर आधा पहले भी मलबे में डूब चुका था. लेकिन फिर भी यहां पूजा हुआ करती थी.

12 फीट की खुदाई के बाद निकाला गया था कल्प केदार मंदिर
धराली का कल्प केदार मंदिर के आधा हिस्से को सतह से करीब 12 फुट नीचे खोदकर बाहर निकाला गया था. मंदिर का आधा हिस्सा पहले से धरती के नीचे ही था. लेकिन 5 अगस्त को आए सैलाब ने अब कल्प केदार को पूरी तरह से मलबे के नीचे दफन कर दिया है. स्थानीय लोगों की मांग है कि जैसे केदार नाथ मंदिर का पुननिर्माण हुआ वैसे ही कल्प केदार का भी पुननिर्माण होना चाहिए.
मंदिर का शिखर नजर आने पर हुई थी खुदाई
भागीरथी नदी के किनारे स्थित धराली का कल्प केदार मंदिर न सिर्फ प्राचीन वास्तुकला और समृद्ध इतिहास का प्रतीक था, बल्कि इलाके में आई भीषण महाआपदा का सबूत भी था. स्थानीय लोग और इतिहासकार बताते हैं कि ये मंदिर कभी 240 मंदिरों के समूह का हिस्सा हुआ करता थी. इन्हें पांडवकालीन बताया जाता है. बरसों पहले आई भीषण आपदा में ये मंदिर जमीन के नीचे दब गए. बाद में मंदिर का शिखर नजर आने के बाद खुदाई की गई.

मंदिर के आस-पास खुदाई कर शिवलिंग तक आने-जाने का रास्ता बनाया गया था.
5 अगस्त से पहले यहां रोज होती थी पूजा, अब सिर्फ पत्थर और मलबा
कल्प केदार मंदिर के आस-पास करीब 12 फुट तक खुदाई करके मंदिर के द्वार तक जगह बनाई गई. मंदिर के चारों तरफ मिट्टी हटाकर आने-जाने का रास्ता बनाया गया. 5 अगस्त से पहले तक मंदिर जमीन के नीचे आधा धंसा हुआ था. मंदिर में शिव की प्रतिमा स्थापित थी. आसपास नंदी, शेर आदि की प्रतिमाएं भी थी.
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