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This Article is From May 30, 2025

उत्‍तराखंड की अंकिता के तीनों गुनाहगारों को उम्रकैद, मां-बाप के आंसुओं से इंसाफ तक की पूरी कहानी

करीब दो साल और आठ महीने तक चली सुनवाई में अभियोजन पक्ष की ओर से जांच अधिकारी समेत 47 गवाह अदालत में पेश किए गए.

अंकिता भंडारी हत्याकांड में मिला न्याय
कोटद्वार:

नौकरी ज्वाइन किए उसे 20 दिन भी पूरे नहीं हुए थे कि वह 18 सितंबर 2022 को लापता हो गई. घटना की जानकारी मिलने के बाद अंकिता के पिता बीरेंद्र सिंह लगातार तीन दिनों तक पौड़ी, मुनिकीरेती और ऋषिकेश के चक्कर काटते रहे. धरने पर बैठे फिर कहीं जाकर पुलिस हरकत में आई.  24 सितंबर 2022 को चीला नदी से अंकिता भंडारी का शव बरामद हुआ. अंकिता भंडारी की हत्या करके उसका शव चीला की शक्ति नहर में फेंक दिया गया था. इसके बाद अंकिता के माता-पिता ने लंबी कानूनी लड़ाई लड़ी और आखिर इंसाफ मिला. अंकिता के तीनों गुनाहगारों को कोर्ट ने उम्रकैद की सजा सुनाई है. 

आखिरकार मिला न्‍याय

उत्तराखंड के बहुचर्चित अंकिता हत्याकांड में कोटद्वार कोर्ट फैसला सुना दिया है. कोर्ट ने तीनों आरोपियों को दोषी करार और उम्रकैद की सजा सुनाई है. यह मामला सितंबर 2022 से ही विचाराधीन था. अंकिता भंडारी हत्याकांड में कोटद्वार की अदालत लंबी बहस चली और आखिरकार गुनाहगारों को दोषी करार दे दिया गया है. उत्‍तराखंड के पौड़ी जिले के यमकेश्वर ब्लॉक की 19 साल की अंकिता भंडारी की 18 सितंबर 2022 को हत्या कर दी गई थी. वह यमकेश्वर ब्लॉक में ही बने वनतरा रिजॉर्ट में रिसेप्शनिस्ट का काम करती थी. यहीं से वह गायब हो गई थी. 

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माता-पिता को करना पड़ा लंबा संघर्ष  

अंकिता के पिता की आंखों में उनकी बेटी को खोने का गम साफ झलक रहा था. फैसले से ठीक पहले उन्होंने कहा था कि उन्होंने मेरी बेटी को मारा है. इस मामले में उत्तराखंड के लोगों ने उनके साथ दिया है, उसके लिए वह हाथ जोड़कर सभी का अभिनंदन करते हैं. अंकिता की मां ने कहा था कि उन्हें कोर्ट पर पूरा भरोसा है कि उनकी बेटी को न्याय मिलेगा. पौड़ी जिले के यमकेश्वर में स्थित वनंत्रा रिजॉर्ट में रिसेप्शनिस्ट के तौर पर काम करने वाली 19 वर्षीया अंकिता की 18 सितंबर 2022 को कथित तौर पर रिजॉर्ट संचालक पुलकित आर्य ने अपने दो कर्मचारियों सौरभ भास्कर और अंकित गुप्ता के साथ मिलकर हत्या कर दी थी.

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ऋषिकेश की चीला नहर में मिला था शव

अभियोजन पक्ष के अनुसार, किसी बात को लेकर अंकिता और पुलकित में विवाद हो गया था जिसके बाद पुलकित ने भास्कर और गुप्ता के साथ मिलकर अंकिता को ऋषिकेश की चीला नहर में कथित तौर पर धक्का दे दिया था. नहर से अंकिता का शव मिलने के बाद पुलिस ने तीनों को गिरफ्तार कर उन्हें जेल भेज दिया था. अंकिता भंडारी 18 सितंबर 2022 को यमकेश्वर के वनतरा रिजॉर्ट से लापता हो गई थी. छह दिन बाद 24 सितंबर को चीला पावर हाउस इनटेक में नहर से एसडीआरएफ ने अंकिता भंडारी का शव बरामद किया था. इस मामले में पुलकित आर्य, सौरभ भास्कर और अंकित गुप्ता को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया था. पुलकित को मुख्य आरोपी बनाया गया था. मामले के खुलासे को लेकर डीआईजी (कानून-व्यवस्था) पी. रेणुका देवी के नेतृत्व में एसआईटी टीम गठित की गई थी.

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SIT जांच हुई, 500 पेज की चार्जशीट 

एसआईटी जांच के बाद अभियोजन पक्ष की ओर से अदालत में 500 पेज का आरोपपत्र दाखिल किया गया. तीनों हत्यारोपियों रिजॉर्ट के मालिक पुलकित आर्य, उसके कर्मचारी सौरभ भास्कर और अंकित गुप्ता पर आरोप तय होने के बाद 28 मार्च 2023 से अभियोजन पक्ष की गवाही शुरू हुई. कोटद्वार स्थित एडीजे कोर्ट में 30 जनवरी 2023 को मामले की पहली सुनवाई हुई थी. इसके बाद पक्ष और विपक्ष की ओर से दलीलों का लंबा दौर शुरू हुआ. अब फाइनली ये मामला अपने अंतिम पड़ाव पर पहुंच गया है. अदालत ने दोनों पक्षों की बहस और दलीलें सुनने के बाद फैसला सुनाने के लिए 30 मई की तिथि निर्धारित की थी.
  

एसआईटी ने पेश किये 97 गवाह


करीब दो साल और आठ महीने तक चली सुनवाई में अभियोजन पक्ष की ओर से जांच अधिकारी समेत 47 गवाह अदालत में पेश किए गए. हालांकि, एसआईटी ने इस मामले में 97 गवाह बनाए थे, जिनमें से 47 अहम गवाहों को ही अदालत में पेश किया गया. गत 19 मई को अभियोजन पक्ष के अधिवक्ता विशेष लोक अभियोजक अवनीश नेगी की ओर से बचाव पक्ष की बहस का जवाब देकर सुनवाई का सिलसिला समाप्त किया गया था. पुलकित, भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के तत्कालीन नेता विनोद आर्य का पुत्र है. मामला सामने आते ही पार्टी ने आर्य को बाहर का रास्ता दिखा दिया था. मामले के प्रकाश में आने के बाद स्थानीय लोग सड़क पर उतर गए और लोगों को शांत करने के वास्ते राज्य सरकार को मामले की जांच के लिए विशेष जांच दल गठित करना पड़ा. साथ ही सरकार ने आरोपियों को सख्त से सख्त सजा दिलाने का भी ऐलान किया था.

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