- सीतापुर विधानसभा सीट उत्तर प्रदेश के अवध क्षेत्र में स्थित है और यह नैमिषारण्य के धार्मिक महत्व से जुड़ी है
- इस सीट पर पहला चुनाव 1952 में हुआ था, जिसमें भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के बशीर अहमद विजयी रहे थे
- 1996 से 2012 तक समाजवादी पार्टी के राधेश्याम जायसवाल ने लगातार चार बार यहां से जीत हासिल की
सीतापुर विधानसभा सीट (संख्या 146) उत्तर प्रदेश की बेहद प्रतिष्ठित और ऐतिहासिक विधानसभा सीटों में से एक है.अवध क्षेत्र के अंतर्गत आने वाली यह सीट सीतापुर लोकसभा क्षेत्र का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है. पौराणिक तपोभूमि नैमिषारण्य के करीब होने के कारण इस क्षेत्र का न सिर्फ धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व है, बल्कि इसका राजनीतिक इतिहास भी बेहद दिलचस्प रहा है.
सीतापुर विधानसभा सीट का इतिहास
सीतापुर विधानसभा सीट पर पहला चुनाव देश के पहले आम चुनाव के साथ साल 1952 में आयोजित किया गया था. शुरुआत में इस सीट पर भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (INC) का वर्चस्व रहा और 1952 के पहले चुनाव में कांग्रेस के हाकिम बशीर अहमद यहां से विधायक चुने गए. मगर 1962 में भारतीय जनसंघ के शारदानंद दीक्षित ने कांग्रेस के किले में सेंध लगाते हुए जीत हासिल कर ली.
1967 में भी जनसंघ के ही तांबरेश्वर प्रसाद यहां से विधायक चुने गए.फिर सीतापुर की राजनीति में राजेंद्र कुमार गुप्ता एक बड़ा नाम बनकर उभरे. उन्होंने पहले 1977 में जनता पार्टी के टिकट पर चुनाव जीता और फिर आगे चलकर भारतीय जनता पार्टी (BJP) के टिकट पर यहां से कुल 6 बार विधायक चुने गए, जो इस सीट के इतिहास में एक कीर्तिमान है. 90 के दशक के उत्तरार्ध में सीतापुर के राजनीतिक समीकरणों में बड़ा बदलाव आया. साल 1996 में समाजवादी पार्टी (SP) के राधेश्याम जायसवाल ने यहां अपनी पकड़ मजबूत की. उन्होंने लगातार चार बार (1996, 2002, 2007 और 2012) इस सीट से समाजवादी पार्टी के लिए जीत दर्ज की. उनके इस लंबे कार्यकाल के कारण सीतापुर को लंबे समय तक सपा के मजबूत गढ़ के रूप में देखा जाने लगा था.
भाजपा की वापसी और वर्तमान स्थिति
साल 2017 के विधानसभा चुनाव में 'मोदी लहर' के दौरान भाजपा ने इस सीट पर जोरदार वापसी की.भारतीय जनता पार्टी के राकेश राठौर ने चार बार के विधायक रहे सपा के राधेश्याम जायसवाल को हराकर भाजपा का परचम लहराया. इसके बाद 2022 के चुनाव बेहद रोमांचक रहे. भाजपा ने अपने उम्मीदवार को बदलते हुए राकेश राठौर 'गुरु' को मैदान में उतारा, जिन्होंने सपा के राधेश्याम जायसवाल को एक बेहद कड़े मुकाबले में महज 1,253 वोटों के मामूली अंतर से हराकर भाजपा का कब्जा बरकरार रखा.
सामाजिक और जातीय समीकरण
सीतापुर में पिछले कुछ वर्षों में मतदाताओं की संख्या लगातार बढ़ी है. पंजीकृत मतदाताओं की संख्या 2012 में 342,103 से बढ़कर 2017 में 378,839, 2019 में 387,587, 2022 में 399,503 और 2024 में 403,591 हो गई. मतदान प्रतिशत में उतार-चढ़ाव देखने को मिला है. 2012 में मतदान 57.53 प्रतिशत रहा और 2017 में बढ़कर 61.83 प्रतिशत हो गया. 2019 के लोकसभा चुनाव में यह घटकर 57.03 प्रतिशत रह गया, जबकि 2022 के विधानसभा चुनाव में बढ़कर 58.30 प्रतिशत हुआ. 2024 के लोकसभा चुनाव में मतदान प्रतिशत और घटकर 54.65 प्रतिशत रह गया.
सीतापुर एक हिंदू बहुल विधानसभा क्षेत्र है, जहां मुस्लिम आबादी की भी अच्छी संख्या है. मुस्लिम मतदाता 23.40 प्रतिशत हैं, जबकि अनुसूचित जाति के मतदाताओं की हिस्सेदारी 25.77 प्रतिशत है. बाकी मतदाताओं में विभिन्न ओबीसी समुदाय शामिल हैं, जिनमें खास तौर पर कुर्मी और अन्य पिछड़ी जातियां शामिल हैं. इसके अलावा ब्राह्मण, राजपूत और वैश्य जैसे सवर्ण समूह भी यहां मौजूद हैं. ये समुदाय विधानसभा क्षेत्र के शहरी और अर्ध-शहरी हिस्सों में विशेष रूप से महत्वपूर्ण हैं. इस सीट का सामाजिक स्वरूप मिश्रित है, जहां 56.04 प्रतिशत आबादी ग्रामीण और 43.96 प्रतिशत आबादी शहरी है.
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