- ममता बनर्जी और SP के बीच गहरा संबंध है जबकि कांग्रेस और सपा बंगाल में टीएमसी के प्रति अलग रुख अपनाते हैं
- राहुल गांधी ने ममता बनर्जी पर आरोप लगाया कि उनकी सरकार के कारण BJP बंगाल में मजबूत हुई है
- यूपी में अगले साल चुनाव हैं, जहां सपा और कांग्रेस के बीच सीट बंटवारे को लेकर मतभेद रहा है
राजनीति भी क्या चीज़ होती है. यहां दोस्त का दोस्त भी अपना दोस्त हो जाये, ये कोई ज़रूरी नहीं. कुछ ऐसा ही वाक़या पश्चिम बंगाल को लेकर होता हुआ दिखाई दे रहा है. बंगाल की लड़ाई में टीएमसी और बीजेपी सामने सामने हैं. टीएमसी के साथ बीजेपी की खिलाफत करने वाले दल खड़े हैं लेकिन विपक्ष की सबसे बड़ी पार्टी कांग्रेस बीजेपी के तो ख़िलाफ़ है ही, वो टीएमसी पर भी लगातार निशाना साध रही है. वहीं समाजवादी पार्टी (सपा) खुलकर ममता बनर्जी के पक्ष में खड़ी है. ये तब है जब ये तीनों ही दल इंडिया अलायन्स का हिस्सा हैं.
ममता और अखिलेश का संबंध गहरा है
दरअसल, ममता बनर्जी की टीएमसी और समाजवादी पार्टी का संबंध गहरा है. दोनों एक दूसरे का खुलकर साथ देते रहे हैं. वहीं समाजवादी पार्टी इंडिया अलायन्स का हिस्सा है. वही इंडिया अलायन्स जिसकी अगुवाई कांग्रेस पार्टी करती है. अब कांग्रेस और सपा यूं तो साथ हैं लेकिन जब बात बंगाल की होती है तो दोनों के सुर बीजेपी की ख़िलाफ़त करने में तो मिलते हैं लेकिन टीएमसी का नाम आते ही दोनों अपने अपने सुर बदल लेते हैं.
कांग्रेस नेता राहुल गांधी की बंगाल की लड़ाई में बीजेपी की ताक़त बढ़ने का ठीकरा ममता बनर्जी पर फोड़ते हैं. राहुल गांधी ने सीधे सीधे ममता बनर्जी पर निशाना साधते हुए कहा कि अगर ममता बनर्जी ने बंगाल में साफ़ सुथरी सरकार चलाई होती और ध्रुवीकरण नहीं करतीं तो बीजेपी बंगाल में लड़ाई में ही नहीं आती. राहुल गांधी बंगाल की लड़ाई को कांग्रेस और बीजेपी के बीच विचारधारा की लड़ाई बता रहे हैं.
यूपी में अगले साल होना है विधानसभा चुनाव
अब सवाल ये है कि यूपी में इसका क्या असर होगा? उत्तर प्रदेश में अगले साल विधानसभा चुनाव होना है. बीजेपी के सामने इंडिया अलायन्स है. इंडिया अलायन्स में सपा और कांग्रेस हैं. इन्हीं दोनों दलों ने लोकसभा चुनाव में मिलकर मुकाबला किया तो बीजेपी को 33 सीटों से संतोष करना पड़ा. सपा अकेले 37 सीटें जीत गई वहीं कांग्रेस एक सीट से बढ़कर 6 पर पहुंच गई. इस बार भी दोनों दल साथ मिलकर चुनाव लड़ने के दावे कर रहे हैं.
समाजवादी पार्टी और कांग्रेस का गठबंधन बहुत मज़बूत नहीं दिखता. सीटों के बंटवारे पर लोकसभा चुनाव में भी दोनों में आख़िर तक ज़ोर आज़माइश चलती रही. आख़िर में कांग्रेस को 16 सीटें दी गईं. यूपी विधानसभा चुनाव को लेकर अभी से खींचतान नज़र आ रही. कांग्रेस के नेता कहते हैं कि उन्हें कम से कम 403 में से 150 सीटें चाहिए. वहीं सपा के नेताओं का कहना है कि कांग्रेस की हालत के हिसाब से 50 सीटें भी अधिक हैं.
सपा और कांग्रेस के बीच है तल्खी
सपा और कांग्रेस के बीच तल्खी का अंदाज़ा लगाना हो तो नेताओं के पार्टी छोड़ने और दूसरी पार्टी के जुड़ने से भी लगाया जा सकता है. हाल ही में कांग्रेस छोड़ने वाले नसीमुद्दीन सिद्दीकी ने सपा का दामन थाम लिया तो वहीं सपा के एक एमएलसी के एक दो बार कांग्रेस दफ्तर में टहलने को लेकर कांग्रेस नेताओं ने दावा किया कि अगर सपा उनके नेताओं को तोड़ेगी तो वो भी सपा के नेताओं को तोड़ देंगे. अंदरखाने से कांग्रेस के प्रदेश नेताओं का कहना है कि वो गठबंधन में नहीं जाना चाहते और अकेले चुनाव मैदान में उतरना चाहते हैं. बीजेपी प्रवक्ता अश्विनी शाही कहते हैं कि कांग्रेस देश की राजनीति में अप्रासंगिक हो चुकी है और इसकी बानगी बंगाल में देखने को मिल रही है जहां उनके सबसे मज़बूत नेता अधीर रंजन चौधरी तक के प्रचार के लिए कोई बड़ा नेता नहीं गया. अश्विनी शाही यूपी चुनाव को लेकर कहते हैं कि जिस तरह सपा और टीएमसी साथ हैं, उसको देखकर लगता नहीं कि इनका गठबंधन उत्तर प्रदेश में जारी रह पाएगा.
कांग्रेस खुलकर किया है टीएमसी का विरोध
कांग्रेस खुलकर टीएमसी के साथ सपा के रिश्तों पर कुछ बोल नहीं रही. पार्टी प्रवक्ता अंशु अवस्थी ये दावा ज़रूर करते हैं कि यूपी के विधानसभा चुनाव में इंडिया अलायन्स पूरे दमखम के साथ चुनाव मैदान में उतरेगा और गठबंधन में कोई दिक्कत नहीं है. वो बंगाल को लेकर बीजेपी पर हमला करते दावा कर रहे हैं कि बंगाल में लोकतंत्र की लूट नहीं हो सकती, इसलिए बीजेपी बंगाल में सफल नहीं होगी. समाजवादी पार्टी प्रवक्ता अशोक यादव भी बिना कांग्रेस का ज़िक्र किए कहते हैं कि सपा बीजेपी को रोकने के लिए अलग अलग राज्य में अलग अलग रणनीति के तहत समर्थन देती है. वो कहते हैं कि इंडिया गठबंधन का जो साथी जिस राज्य के मज़बूत है, वहां उसे समर्थन दिया जा रहा है. वो कहते हैं कि पीडीए की जनता सरकार बदलने का मन बना चुकी है. अशोक यादव भी कांग्रेस का नाम या गठबंधन को लेकर कुछ ख़ास नहीं बोल रहे.
फ़िलहाल यूपी में सपा और कांग्रेस एक साथ हैं. अखिलेश यादव लंबे समय से यूपी में सक्रिय भी दिखाई दे रहे हैं लेकिन कांग्रेस में प्रदेश अध्यक्ष अजय राय ही शहर शहर घूमकर पार्टी का माहौल बनाने की कोशिश करते दिख रहे हैं. कांग्रेस के चेहरे यानी गांधी परिवार की सक्रियता यूपी को लेकर फ़िलहाल दिखाई नहीं दे रही. देखना होगा, क्या बीजेपी को रोकने के लिए सपा और कांग्रेस समझौता जारी रखेंगे या मनमुटाव गठबंधन को नुक़सान पहुंचायेगा.
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