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This Article is From Jan 06, 2026

UP SIR ड्रॉफ्ट: सबसे ज्यादा लखनऊ में कटे 12 लाख नाम, चुनाव आयोग ने बताई इसकी बड़ी वजह

सबसे बड़ा कारण लखनऊ में 30.04% जनगणना प्रपत्र प्राप्त नहीं हुए, जो इस बड़ी कटौती का एक प्रमुख तकनीकी कारण माना जा रहा है. सिर्फ राजधानी ही नहीं, बल्कि पीएम मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी और बुंदेलखंड के ललितपुर में भी आंकड़ों में बड़ी गिरावट है.

UP SIR ड्रॉफ्ट: सबसे ज्यादा लखनऊ में कटे 12 लाख नाम, चुनाव आयोग ने बताई इसकी बड़ी वजह
  • मतदाता सूची के ड्राफ्ट में राजधानी लखनऊ सहित कई जिलों में मतदाताओं की संख्या में भारी कमी देखी गई है
  • लखनऊ में मतदाताओं की संख्या घटकर 27.9 लाख रह गई है, जिसमें 30.04% जनगणना प्रपत्र न मिलने का बड़ा कारण है
  • वाराणसी और ललितपुर में भी मतदाताओं की संख्या में क्रमशः 18 प्रतिशत और 9.95 प्रतिशत की गिरावट हुई है

यूपी में आगामी चुनावों की तैयारी के तहत निर्वाचन आयोग ने मतदाता सूची के SIR का ड्राफ्ट पब्लिश कर दिया है. जारी ड्राफ्ट लिस्ट के अनुसार, प्रदेश के कई जिलों में मतदाताओं की संख्या में भारी कमी देखी गई है. सबसे ज्यादा राजधानी लखनऊ में मतदाताओं की संख्या में सबसे चौंकाने वाली गिरावट दर्ज की गई है. जब SIR की घोषणा की गई थी, तब लखनऊ में 39.9 लाख मतदाता थे. ड्राफ्ट लिस्ट के बाद यह संख्या घटकर अब मात्र 27.9 लाख रह गई है.

क्या है लखनऊ में इतने नामों के काटे जाने की वजह?

सबसे बड़ा कारण लखनऊ में 30.04% जनगणना प्रपत्र प्राप्त नहीं हुए, जो इस बड़ी कटौती का एक प्रमुख तकनीकी कारण माना जा रहा है. सिर्फ राजधानी ही नहीं, बल्कि पीएम मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी और बुंदेलखंड के ललितपुर में भी आंकड़ों में बड़ी गिरावट है. वाराणसी में लगभग 18% मतदाताओं के नाम सूची से हटा दिए गए हैं. हालांकि, प्रशासन का कहना है कि जिन लोगों के नाम कटे हैं, उनके पास अभी भी फॉर्म 6 भरकर दोबारा जुड़ने का विकल्प मौजूद है. वहीं, ललितपुर में 27 सितंबर 2025 तक यहां 9.5 लाख मतदाता पंजीकृत थे, जो अब घटकर 8.6 लाख रह गए हैं. यह लगभग 9.95% की कमी है.

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यहां पढ़ें: आ गई यूपी की ड्रॉफ्ट वोटर लिस्ट, कहीं कट तो नहीं गया आपका नाम, ऐसे करें चेक; जुड़वाने का ये है तरीका

आखिर क्यों कटे करोड़ों नाम?

बीएलओ (BLO) की रिपोर्ट और मतदाताओं से मिले फीडबैक के आधार पर नाम हटाए जाने के तीन सबसे बड़े कारण सामने आए हैं. आंकड़ों के अनुसार, सबसे बड़ा कारण पलायन है. लगभग 2.17 करोड़ मतदाताओं ने अपना पुराना निवास स्थान बदल लिया है, जिस वजह से उनके नाम पुरानी सूची से हटाए गए हैं. सत्यापन के दौरान 46.23 लाख मतदाता मृत पाए गए. वहीं, 25.47 लाख ऐसे मामले सामने आए, जहां एक ही मतदाता का नाम एक से अधिक स्थानों पर पंजीकृत था. चुनावी पारदर्शिता के लिए इन "घोस्ट वोटर्स" को हटाना अनिवार्य था. उत्तर प्रदेश में अब कुल मतदाताओं की संख्या की ड्राफ्ट लिस्ट 12.55 करोड़ घोषित की गई है.

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नाम कट गया तो क्या करें?

यदि यूपी के किसी जिले के निवासी हैं और आपका नाम सूची में नहीं है, तो घबराएं नहीं. आप चुनाव आयोग की आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर या अपने नजदीकी बीएलओ से संपर्क कर फॉर्म 6 (नया पंजीकरण) भर सकते हैं.

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