- साइकिल सिंबल मिलने से अखिलेश को फायदा होगा
- शिवपाल से अखिलेश की सुलह के बिना कुछ नहीं हो सकता
- अब लगता है मुलायम सिंह यादव अलग से चुनाव लड़ेंगे
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नई दिल्ली:
चुनाव सिंबल के रूप में साइकिल को लेकर मुलायम सिंह यादव और अखिलेश यादव के बीच जो जंग चल रही थी, वह सोमवार को लगभग ख़त्म हो गई. चुनाव आयोग ने अखिलेश की दलील को ज्यादा तरजीह देते हुए उत्तर प्रदेश चुनाव में साइकिल पर सवार होने की इजाज़त दे दी है. अब अखिलेश यादव साइकिल को अपने चुनाव चिन्ह के रूप में इस्तेमाल कर सकते हैं.
इस तरह बिगड़ा मुलायम और अखिलेश के बीच रिश्ता
अखिलेश और मुलायम के बीच रिश्ता तब से बिगड़ना शुरू हुआ जब मुलायम सिंह यादव मुख्तार अंसारी की पार्टी कौमी एकता दल को समाजवादी पार्टी में शामिल करना चाहते थे लेकिन अखिलेश इसके खिलाफ थे. मुलायम ने कौमी एकता दल को पार्टी में शामिल किया तो अखिलेश ने फैसले को रद्द कर दिया. यहीं से मुलायम और अखिलेश के बीच मतभेद शुरू हुए. फिर अखिलेश ने शिवपाल यादव के कुछ करीब मंत्रियों को मंत्रीमंडल से हटा दिया तो फिर मुलायम ने अखिलेश को पार्टी के अध्यक्ष पद से हटा दिया. शिवपाल को अध्यक्ष चुना, फिर अखिलेश ने शिवपाल के कुछ विभाग छीन लिए.
सुधरने की बजाय बिगड़ते गए रिश्ते
कभी मुलायम ने अखिलेश के करीब नेताओं को पार्टी से निकाल निकाल दिया तो कभी अखिलेश ने मुलायम के करीबियों को पार्टी से बेदखल किया. इस तरह नेताओं के अंदर आने और बाहर जाने का सिलसिला शुरू हो गया. कभी राम गोपाल पार्टी से निकाले गए तो कभी अखिलेश. फिर अखिलेश और मुलायम ने अपने उम्मीदवारों की लिस्ट तैयार की. साइकिल सिंबल किसको मिलेगा, इसे लेकर दोनों चुनाव आयोग पहुंचे और अपना-अपना दावा पेश किया. अखिरिकार अखिलेश की जीत हुई.
अब चुनाव में किसको होगा फायदा
वरिष्ठ पत्रकार रामदत्त त्रिपाठी का कहना है साइकिल चुनाव सिंबल के रूप में मिलने से अखिलेश को फायदा होगा और समाजवादी पार्टी टूटने से बीजेपी को जो फ़ायदा होने वाला था अब वह नहीं होगा. अब अखिलेश के तरफ लोग जाएंगे. मुलायम सिंह यादव अपना नुकसान कर रहे हैं.
मुलायम का अगला कदम क्या हो सकता है
रामदत्त त्रिपाठी का कहना है अब मुलायम सिंह हो सकता है कि कोई दूसरा उपाय आपनाए, पुराने लोकदल के साथ गठबंधन कर ले. अगर 10-20 सीट जीत जाते हैं तो आगे के लिए अपना रणनीति तैयार करेंगे. जब तक शिवपाल से अखिलेश का सुलह नहीं होती तब तक कुछ नहीं हो सकता है और ऐसा नहीं लगता है कि सुलह होगी. अब लगता है मुलायम सिंह यादव अलग से चुनाव लड़ेंगे. अगर अलग नहीं लड़ना होता तो यह मामला यहाँ तक नहीं पहुँचता.
अगर अखिलेश के साथ कांग्रेस गठबंधन करता है
रामदत्त त्रिपाठी का कहना है कि अगर अखिलेश, कांग्रेस और राष्ट्रीय लोकदल के बीच गठबंधन कर लेते हैं तो एक मजबूत मेल उभरेगा और जनता के बीच एक अच्छा समर्थन मिलेगा लेकिन इसे मुलायम के परिवार में जो कलह है वह कम नहीं होगी. मुलायम और अखिलेश अगर लड़ते रहेंगे तो दोनों का कई जगह नुकसान होगा लेकिन कांग्रेस और लोकदल अखिलेश के साथ आने से कुछ भरपाई तो हो जाएगी फिर भी जो मुलायम के गढ़ हैं, वहां अखिलेश को फायदा नहीं होगा. मुलायम के बेल्ट में माइनॉरिटी का वोट ज्यादा नहीं है. उस बेल्ट में अगर मुलायम अलग लड़ते हैं तो कुछ सीटों में अखिलेश को नुकसान होगा.
बीजेपी को कितना फ़ायदा होगा
अगर अखिलेश, कांग्रेस और राष्ट्रीय लोक दल के बीच गठबधन होता है तो अखिलेश को ज्यादा सीट मिलेंगी और वह सरकार भी बना सकते हैं. बीजेपी के दो समस्याएं हैं. सबसे बड़ी समस्या है कि बीजेपी कोई चेहरा आगे नहीं ला रही है. दूसरा जो बड़ी समस्या है, वह बीजेपी दूसरे दलों से आए लोगों को टिकट दे रही है. दल-बदलू लोगों को बीजेपी ज्यादा टिकट दे रही है. इससे बीजेपी के कैडर में भी असंतोष पैदा होगा. अब बीजेपी का झगड़ा सामने आएगा. नोटबंदी से बीजेपी को नुकसान है. नोटबंदी से बेरोज़गारी बढ़ी है. इसका असर बीजेपी के ऊपर होगा.
इस वजह से अखिलेश को नुकसान हो सकता है
रामदत्त त्रिपाठी मानना है कि अगर गठबंधन होता है जो सीट अखिलेश कांग्रेस और अजित सिंह के लिए छोड़ेंगे तो वहां हो सकता है कि समाजवादी पार्टी के जो मूल लोग हैं, वह मुलायम सिंह को वोट दे.
मायावती को कितना फ़ायदा होगा
बसपा काफी कोशिश कर रही है लेकिन उभर नहीं पा रही है. दलित के सिवा दूसरे लोग बसपा के साथ नहीं जुड़ रहे हैं. अगर कांग्रेस समाजवादी पार्टी के साथ आती है तो बसपा को और नुकसान होगा.
इस तरह बिगड़ा मुलायम और अखिलेश के बीच रिश्ता
अखिलेश और मुलायम के बीच रिश्ता तब से बिगड़ना शुरू हुआ जब मुलायम सिंह यादव मुख्तार अंसारी की पार्टी कौमी एकता दल को समाजवादी पार्टी में शामिल करना चाहते थे लेकिन अखिलेश इसके खिलाफ थे. मुलायम ने कौमी एकता दल को पार्टी में शामिल किया तो अखिलेश ने फैसले को रद्द कर दिया. यहीं से मुलायम और अखिलेश के बीच मतभेद शुरू हुए. फिर अखिलेश ने शिवपाल यादव के कुछ करीब मंत्रियों को मंत्रीमंडल से हटा दिया तो फिर मुलायम ने अखिलेश को पार्टी के अध्यक्ष पद से हटा दिया. शिवपाल को अध्यक्ष चुना, फिर अखिलेश ने शिवपाल के कुछ विभाग छीन लिए.
सुधरने की बजाय बिगड़ते गए रिश्ते
कभी मुलायम ने अखिलेश के करीब नेताओं को पार्टी से निकाल निकाल दिया तो कभी अखिलेश ने मुलायम के करीबियों को पार्टी से बेदखल किया. इस तरह नेताओं के अंदर आने और बाहर जाने का सिलसिला शुरू हो गया. कभी राम गोपाल पार्टी से निकाले गए तो कभी अखिलेश. फिर अखिलेश और मुलायम ने अपने उम्मीदवारों की लिस्ट तैयार की. साइकिल सिंबल किसको मिलेगा, इसे लेकर दोनों चुनाव आयोग पहुंचे और अपना-अपना दावा पेश किया. अखिरिकार अखिलेश की जीत हुई.
अब चुनाव में किसको होगा फायदा
वरिष्ठ पत्रकार रामदत्त त्रिपाठी का कहना है साइकिल चुनाव सिंबल के रूप में मिलने से अखिलेश को फायदा होगा और समाजवादी पार्टी टूटने से बीजेपी को जो फ़ायदा होने वाला था अब वह नहीं होगा. अब अखिलेश के तरफ लोग जाएंगे. मुलायम सिंह यादव अपना नुकसान कर रहे हैं.
मुलायम का अगला कदम क्या हो सकता है
रामदत्त त्रिपाठी का कहना है अब मुलायम सिंह हो सकता है कि कोई दूसरा उपाय आपनाए, पुराने लोकदल के साथ गठबंधन कर ले. अगर 10-20 सीट जीत जाते हैं तो आगे के लिए अपना रणनीति तैयार करेंगे. जब तक शिवपाल से अखिलेश का सुलह नहीं होती तब तक कुछ नहीं हो सकता है और ऐसा नहीं लगता है कि सुलह होगी. अब लगता है मुलायम सिंह यादव अलग से चुनाव लड़ेंगे. अगर अलग नहीं लड़ना होता तो यह मामला यहाँ तक नहीं पहुँचता.
अगर अखिलेश के साथ कांग्रेस गठबंधन करता है
रामदत्त त्रिपाठी का कहना है कि अगर अखिलेश, कांग्रेस और राष्ट्रीय लोकदल के बीच गठबंधन कर लेते हैं तो एक मजबूत मेल उभरेगा और जनता के बीच एक अच्छा समर्थन मिलेगा लेकिन इसे मुलायम के परिवार में जो कलह है वह कम नहीं होगी. मुलायम और अखिलेश अगर लड़ते रहेंगे तो दोनों का कई जगह नुकसान होगा लेकिन कांग्रेस और लोकदल अखिलेश के साथ आने से कुछ भरपाई तो हो जाएगी फिर भी जो मुलायम के गढ़ हैं, वहां अखिलेश को फायदा नहीं होगा. मुलायम के बेल्ट में माइनॉरिटी का वोट ज्यादा नहीं है. उस बेल्ट में अगर मुलायम अलग लड़ते हैं तो कुछ सीटों में अखिलेश को नुकसान होगा.
बीजेपी को कितना फ़ायदा होगा
अगर अखिलेश, कांग्रेस और राष्ट्रीय लोक दल के बीच गठबधन होता है तो अखिलेश को ज्यादा सीट मिलेंगी और वह सरकार भी बना सकते हैं. बीजेपी के दो समस्याएं हैं. सबसे बड़ी समस्या है कि बीजेपी कोई चेहरा आगे नहीं ला रही है. दूसरा जो बड़ी समस्या है, वह बीजेपी दूसरे दलों से आए लोगों को टिकट दे रही है. दल-बदलू लोगों को बीजेपी ज्यादा टिकट दे रही है. इससे बीजेपी के कैडर में भी असंतोष पैदा होगा. अब बीजेपी का झगड़ा सामने आएगा. नोटबंदी से बीजेपी को नुकसान है. नोटबंदी से बेरोज़गारी बढ़ी है. इसका असर बीजेपी के ऊपर होगा.
इस वजह से अखिलेश को नुकसान हो सकता है
रामदत्त त्रिपाठी मानना है कि अगर गठबंधन होता है जो सीट अखिलेश कांग्रेस और अजित सिंह के लिए छोड़ेंगे तो वहां हो सकता है कि समाजवादी पार्टी के जो मूल लोग हैं, वह मुलायम सिंह को वोट दे.
मायावती को कितना फ़ायदा होगा
बसपा काफी कोशिश कर रही है लेकिन उभर नहीं पा रही है. दलित के सिवा दूसरे लोग बसपा के साथ नहीं जुड़ रहे हैं. अगर कांग्रेस समाजवादी पार्टी के साथ आती है तो बसपा को और नुकसान होगा.
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