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UP News: 65 साल की उम्र में  जिंदा शख्स करा रहा अपनी ‘तेरहवीं’ का भंडारा, बताई चौंकाने वाली वजह

Auraiya News: एनडीटीवी संवाददाता जाहिद अखतर से राकेश यादव ने कहा कि उनके निधन के बाद उनके अंतिम संस्कार और तेरहवीं जैसे कर्मकांड करने वाला कोई नहीं होगा. इसी चिंता को ध्यान में रखते हुए उन्होंने जीवित रहते ही यह आयोजन करने का निर्णय लिया. उन्होंने कहा कि अगर कोई बाद में यह नहीं कर पाएगा, तो बेहतर है कि वह खुद ही अपने जीवन में लोगों को भोजन कराएं और यह जिम्मेदारी पूरी कर दें.

UP News: 65 साल की उम्र में  जिंदा शख्स करा रहा अपनी ‘तेरहवीं’ का भंडारा, बताई चौंकाने वाली वजह

Terahwi Bhoj: उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) के औरैया (Auraiya) जिले के अजीतमल तहसील क्षेत्र से एक अनोखी और भावुक कहानी सामने आई है, जिसने लोगों को हैरान कर दिया है. दरअसल, ग्राम पंचायत सतहड़ी के लक्ष्मणपुर गांव के 65 वर्षीय राकेश यादव ने अपने जीवनकाल में ही अपनी ‘तेरहवीं' का भंडारा कराने का निर्णय लिया है. इस आयोजन के लिए उन्होंने करीब 1900 लोगों को निमंत्रण भेजा है. 

राकेश यादव अपने परिवार में तीन भाइयों में सबसे बड़े थे. उनके दोनों छोटे भाइयों का निधन हो चुका है. एक की मौत बीमारी से मौत हुई, जबकि दूसरे की हत्या कर दी गई थी. इन घटनाओं के बाद राकेश यादव पूरी तरह अकेले रह गए. वे अविवाहित हैं और उनकी एक बहन भी अविवाहित है. परिवार में किसी सहारे के अभाव ने उन्होंने यह अनोखा फैसला लिया. 

 “मरने के बाद कोई नहीं करेगा संस्कार”

एनडीटीवी संवाददाता जाहिद अखतर से राकेश यादव ने कहा कि उनके निधन के बाद उनके अंतिम संस्कार और तेरहवीं जैसे कर्मकांड करने वाला कोई नहीं होगा. इसी चिंता को ध्यान में रखते हुए उन्होंने जीवित रहते ही यह आयोजन करने का निर्णय लिया. उन्होंने कहा कि अगर कोई बाद में यह नहीं कर पाएगा, तो बेहतर है कि वह खुद ही अपने जीवन में लोगों को भोजन कराएं और यह जिम्मेदारी पूरी कर दें.

 1900 लोगों को भेजे गए निमंत्रण कार्ड

इस अनोखे भंडारे के लिए राकेश यादव ने बाकायदा कार्ड छपवाकर करीब 1900 लोगों को आमंत्रित किया है. गांव और आसपास के इलाकों में यह आयोजन चर्चा का विषय बना हुआ है. 30 मार्च को आयोजित होने वाले इस भंडारे में बड़ी संख्या में लोगों के शामिल होने की संभावना है, जिससे गांव में खासा उत्साह और हलचल देखने को मिल रही है.

 धार्मिक प्रवृत्ति और सादगी भरा जीवन

राकेश यादव धार्मिक स्वभाव के व्यक्ति हैं. हाल ही में उन्होंने नवरात्रि के दौरान नौ दिनों का व्रत रखकर विधि विधान से पूजा अर्चना की थी और जवारे भी स्थापित किए थे. उन्होंने अपना पैतृक घर एक रिश्तेदार को दान कर दिया है और वर्तमान में एक साधारण झोपड़ी में रहकर जीवन यापन कर रहे हैं.

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इस अनोखे फैसले को लेकर लोगों के बीच अलग-अलग प्रतिक्रिया देखने को मिल रही हैं. कुछ लोग इसे राकेश यादव की दूरदर्शिता और सामाजिक सोच के रूप में देख रहे हैं, तो कुछ इसे बढ़ते पारिवारिक अकेलेपन की कड़वी सच्चाई मान रहे हैं.

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