- मुजफ्फरनगर और मथुरा में चीनी के दाम तेजी से बढ़कर रिटेल में 65 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गए हैं
- व्यापारी, किसान और आम जनता सभी चीनी के बढ़ते दामों से परेशान हैं
- उनका कहना है कि गन्ने का कम उत्पादन और उचित मूल्य न मिलने से चीनी उत्पादन प्रभावित हो रहा है
चीनी के आसमान छूते दाम लोगों के लिए परेशानी खड़ी कर रहे हैं. आम लोग ही नहीं व्यापारी और किसान भी परेशान हैं. चीनी महंगी होने से आम आदमी की थाली से मिठास गायब होती नजर आ रही है. रिटेल बाजार में चीनी के दाम अचानक आसमान छूने लगे हैं. जो चीनी कल तक 45 से 46 रुपये प्रति किलो बिक रही थी, वह अब 65 रुपये किलो तक पहुंच गई है. चीनी की बढ़ी कीमतों का मुजफ्फरनगर और मथुरा के चीनी व्यापारी और आम लोगों पर क्या असर हो रहा है, ये जानने के लिए एनडीटीवी की टीम ग्राउंड पर पहुंची.
2200 रुपये वाली चीनी की बोरी 3000 रुपये में बिक रही
चीनी महंगी होने से मथुरा में क्या असर हुआ है ये जानने के लिए एनडीटीवी की टीम ग्राउंड पर पहुंची. मथुरा के दुकानदार और ग्राहकों चीनी महंगी होने से परेशान हैं. उनका कहना है कि इससे बहुत ज्यादा परेशानी होने वाली है. त्योहारी सीजन में आम लोगों पर बहुत बोझ पड़ेगा. मथुरा के एक थोक चीनी विक्रेता ने बताया 2200 रुपये में मिलने वाली चीनी की बोरी अब सीधी 3000 रुपये पर पहुंच गई है. एथनॉल बनाने की वजह से यह दाम बढ़े हैं. सरकार को इस ओर ध्यान देना चाहिए.

एथेनॉल की बढ़ती कीमतों से महंगी हुई चीनी
वहीं मुजफ्फरनगर में भी चीनी के लगातार बढ़ते दामों से व्यापारी, किसान और आम लोग चिंता में हैं. पिछले साल चीनी के दाम करीब 4 हजार रुपये प्रति क्विंटल के आसपास थे, वहीं अब यह बढ़कर करीब 6 हजार रुपये प्रति क्विंटल तक पहुंच गए हैं.व्यापारी और किसान बढ़ती कीमतों की वजह चीनी के कम उत्पादन को बता रहे हैं. व्यापारियों का कहना है कि गन्ने का उत्पादन कम होने के साथ ही एथेनॉल की बढ़ती कीमतों का भी चीनी के बाजार पर असर पड़ा है. मुजफ्फरनगर में व्यापारियों, किसानों और आम लोगों से चीनी की बढ़ती कीमतों को लेकर बात की गई.
मुजफ्फरनगर में एशिया की सबसे बड़ी गुड़ मंडी होने के चलते यहां चीनी और गन्ने के कारोबार से जुड़े व्यापारियों की बाजार पर खास नजर रहती है. व्यापारियों का कहना है कि सरकार ने बढ़ते दामों का संज्ञान लिया है और चीनी के आयात पर भी विचार किया जा रहा है. अगर सरकार चीनी का आयात करती है तो आने वाले दिनों में बाजार में आपूर्ति बढ़ सकती है और कीमतों में कुछ गिरावट देखने को मिल सकती है.

गन्ने के कम उत्पादन से भी बढ़े चीनी के दाम
वहीं किसान भी चीनी के बढ़ते दामों के लिए गन्ने के कम उत्पादन को जिम्मेदार बता रहे हैं. उनका कहना है कि गन्ने की लागत लगातार बढ़ रही है, लेकिन उन्हें उसके मुकाबले उचित दाम नहीं मिल पा रहा है. यही वजह है कि कई किसान गन्ने की खेती से दूरी बनाने लगे हैं, जिसका सीधा असर गन्ने के उत्पादन और फिर चीनी के उत्पादन पर पड़ रहा है.
किसानों का कहना है कि सरकार गन्ने के दाम में बढ़ोतरी तो करती है, लेकिन उत्पादन लागत और किसानों की मेहनत के हिसाब से यह बढ़ोतरी पर्याप्त नहीं है. उनका कहना है कि जब तक किसानों को गन्ने का उचित मूल्य नहीं मिलेगा, तब तक गन्ने का रकबा और उत्पादन प्रभावित होता रहेगा और इसका असर आगे चलकर चीनी की कीमतों पर भी पड़ सकता है.
चीनी महंगी होने से आम लोग भी परेशान
वहीं आम लोगों का कहना है कि चीनी के दाम बढ़ने का असर सिर्फ चाय की प्याली तक सीमित नहीं है, बल्कि मिठाई, बेकरी और रोजमर्रा की कई चीजों की कीमतों पर भी इसका असर पड़ेगा. ऐसे में सरकार को बढ़ती कीमतों पर जल्द कदम उठाकर आम लोगों को राहत देनी चाहिए. ग्राउंड पर पहुंची एनडीटीवी ने जब चीनी के बढ़ते दामों के लेकर मुजफ्फरनगर के एक व्यापारी से बात की. उन्होंने चीनी के दाम बढ़ाने की वजह एथेनॉल को बताया.
एथेनॉल की वजह से महंगी हो रही चीनी
व्यापारी ने कहा कि एथेनॉल की वजह से भी चीनी के दाम बढ़ रहे हैं और इस बार गन्ने की पैदावार भी कम हुई है. चीनी के दाम इसी वजह से बढ़ रहे हैं. उन्होंने कहा कि पहले चीनी 4000 रुपये के आसपास होती थी लेकिन अब 6 हजार के पार हो गई है. इससे व्यापारियों को तो मुनाफा है लेकिन आम लोगों को काफी परेशानी होगी. त्योहार भी आ रहे हैं, ऐसे में लोग परेशान होंगे. इससे कहीं ना कहीं व्यापारियों को भी नुकसान उठाना पड़ेगा.

चीनी के दाम बढ़ने से गन्ना किसानों के चेहरे पर खुशी
वहीं किसान चीनी के दाम बढ़ने से खुश हैं. मोनू सिंह नाम के एक किसान ने कहा कि चीनी के दाम बढ़ रहे हैं ये अच्छी बात है. इसी तरह गन्ने के भी दाम भी डबल हो जाने चाहिए. किसान ने कहा कि गन्ना किसानों के लिए दाम सही न मिलना सबसे बड़ी समस्या है. इस बार गन्ने की पैदावार भी कम हुई है. आने वाले समय में यह और कम हो सकती है, क्यों कि सरकार गन्ने से एथेनॉल बना रही है तो महंगाई तो होगी और इसका सामना भी आम लोगों को ही करना होगा.
आम लोगों से जब चीनी के बढ़ते दामों के बारे में पूछा गया तो विक्की चावला नाम के शख्स ने कहा कि चीनी के बढ़ते दामों से आम लोगों के लिए समस्याएं खड़ी हो गई है. हर मीठे में चीनी इस्तेमाल होती है. आने वाले समय में रक्षाबंधन है और भी बहुत सारे त्योहार हैं. सरकार को इस तरफ ध्यान देना चाहिए. आने वाले समय 2027 के चुनाव भी है. कहीं सरकार को इसकी कीमत न भुगतनी पड़ जाए.अगर सरकार ध्यान दें तभी इस पर रोक लगाई जा सकती है.
सरकार चीनी के दामों पर ध्यान दे
नदीम अंसारी नाम के एक आम नागरिक ने कहा कि सरकार जो भी करती है अच्छा करती है. लेकिन ये बात भी उनको ध्यान रखनी चाहिए कि गरीब जनता पर किसी चीज का ज्यादा दबाव न पड़े. चीनी 6000 रुपये पहुंचना कोई आम बात नहीं है. ये हम लोगों के लिए परेशानी भरा है. अगर सरकार कुछ कर रही है तो लोगों के लिए अच्छा ही होगा शायद आने वाले समय में दाम कम हो जाए. एथेनॉल भी इन्हीं से बन रहा है तो थोड़ी महंगाई तो होगी.
व्यापारियों के पास स्टॉक नहीं
चीनी व्यापारी संजय मिश्रा ने कहा कि हमने इतने समय में कभी नहीं देखा कि एकदम से चीनी पर इतने पैसे बढ़ जाए और लोगों के लिए समस्या हो जाए. उन्होंने कहा कि व्यापारियों के पास स्टॉक नहीं है. चीनी आना भी काम हो गई है. लोगों को इससे परेशानी होगी. चीनी हर मिठाई में इस्तेमाल होती है. एथेनॉल में भी इस्तेमाल की जा रही है इसी वजह से महंगाई बढ़ रही है. लोगों को आने वाले समय में शायद और भी समस्याएं झेलनी पड़ सकती हैं.
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