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IPS केके बिश्नोई का बड़ा एक्‍शन, संभल के इस बड़े मामले में पूर्व SDM समेत 6 ग‍िरफ्तार

संभल में 71 हेक्टेयर सरकारी जमीन के आवंटन के 6 साल पुराने फर्जीवाड़े के मामले में पुलिस ने बड़ी कार्रवाई की है. इस मामले में संभल पुल‍िस ने तत्कालीन एसडीएम ओमवीर सिंह, तत्कालीन तहसीलदार कर्म सिंह, सरकारी वकील, लेखपाल समेत छह आरोप‍ियों को ग‍िरफ्तार क‍िया है.

IPS केके बिश्नोई का बड़ा एक्‍शन, संभल के इस बड़े मामले में पूर्व SDM समेत 6 ग‍िरफ्तार

यूपी के संभल में 71 हेक्टेयर सरकारी जमीन के आवंटन के 6 साल पुराने फर्जीवाड़े के मामले में पुलिस ने बड़ी कार्रवाई की है. इस मामले में संभल पुल‍िस ने तत्कालीन एसडीएम ओमवीर सिंह, तत्कालीन तहसीलदार कर्म सिंह, सरकारी वकील, लेखपाल समेत छह आरोप‍ियों को ग‍िरफ्तार क‍िया है. कानूनी कार्रवाई के बाद सभी को जेल भेज द‍िया गया है. पुल‍िस ने इस मामले में तत्कालीन एसडीएम, तत्कालीन तहसीलदार, 3 लेखपाल, 2 कानूनगो, चकबंदी अधिकारी, 6 ग्राम पंचायत सदस्य सहित कुल 19 लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है. संभल के पुलिस अधीक्षक कृष्ण कुमार बिश्नोई ने बताया क‍ि मामला गुन्नौर तहसील के असदपुर परगना के अंतर्गत भौना नगला गांव में 71 हेक्टेयर जमीन के आवंटन में कथित अनियमितताओं से जुड़ा है. 

गुन्नौर तहसील के असादपुर, सुखेला और आसपास के गांवों में गंगा किनारे स्थित झाऊ श्रेणी की सरकारी भूमि के कथित अवैध आवंटन से जुड़ा है. लेखपाल स्वाति शर्मा की तहरीर पर थाना गुन्नौर में एफआईआर दर्ज की गई. शिकायत के अनुसार, ग्राम सुखेला में करीब 71.55 हेक्टेयर, यानी लगभग 1000 बीघा सरकारी भूमि चकबंदी प्रक्रिया के अधीन थी. आरोप है कि साल 2007 के बाद फर्जी पेपर तैयार कर इस भूमि में अवैध प्रविष्टियां की गईं. साल 2018 में तत्कालीन अधिकारियों, कर्मचारियों और 58 अपात्र लाभार्थियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज हुआ था और फर्जी प्रविष्टियां निरस्त कर दी गई थीं. इसके बावजूद साल 2019 में तत्कालीन उप जिलाधिकारी ओमवीर सिंह ने 162 लाभार्थियों के पक्ष में दोबारा पट्टे स्वीकृत कर दिए.

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जांच में सामने आईं गड़बड़ियां


इसके बाद मामले की जांच की गई तो भूमि के क्षेत्रफल और लाभार्थियों की संख्या में गड़बड़ियां सामने आईं. वर्ष 2021-22 में संशोधन की कार्रवाई तो हुई, लेकिन राजस्व संहिता के प्रावधानों के अनुसार खुली ग्राम सभा, सहमति और लॉटरी जैसी अनिवार्य प्रक्रियाओं का पालन नहीं किया गया. वर्ष 2023 में 17 अपात्र लाभार्थियों के पट्टे निरस्त होने के बावजूद अभिलेखों में 145 लाभार्थियों के नाम दर्ज रहे. इतना ही नहीं, किसी भी लाभार्थी को भूमि पर वास्तविक कब्जा नहीं दिलाया गया. 

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जांच समिति ने 4 जून 2026 को डीएम को सौंपी थी अपनी रिपोर्ट

पुलिस के अनुसार, कूटरचित दस्तावेजों के आधार पर सरकारी भूमि के आवंटन में गंभीर अनियमितताएं की गई. जांच समिति ने 4 जून 2026 को अपनी रिपोर्ट जिलाधिकारी को सौंपी थी. रिपोर्ट में संबंधित अधिकारियों, कर्मचारियों और अन्य जिम्मेदार व्यक्तियों के खिलाफ वैधानिक और विभागीय कार्रवाई की संस्तुति की गई थी. इसी रिपोर्ट के आधार पर 2 जुलाई को थाना गुन्नौर में मुकदमा दर्ज किया गया. एफआईआर में रिटायर्ड एसडीएम ओमवीर सिंह, तत्कालीन तहसीलदार करम सिंह, पूर्व जिला शासकीय अधिवक्ता (राजस्व) जय भारद्वाज, ग्राम प्रधान सहित कुल 19 लोगों को नामजद किया गया है.  इनमें राजस्व और चकबंदी विभाग के कई तत्कालीन अधिकारी, कर्मचारी और पंचायत प्रतिनिधि भी शामिल हैं. मामले की विवेचना उपनिरीक्षक अखिलेश प्रधान कर रहे हैं. 

(संभल से सत्‍यपाल स‍िंह की र‍िपोर्ट)

पूर्व SDM समेत छह ग‍िरफ्तार

पुलिस ने पूर्व एसडीएम ओमवीर सिंह, पूर्व ग्राम प्रधान विक्रांत, चकबंदी लेखपाल, पूर्व डीजीसी (राजस्व) जय भारद्वाज, पूर्व कानूनगो राजवीर सिंह और रिटायर्ड चकबंदी अधिकारी महेंद्र सिंह को गिरफ्तार किया है. मेडिकल परीक्षण के बाद सभी आरोपियों को न्यायालय में पेश किया गया, जहां से उन्हें न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया. पुलिस का कहना है कि मामले की जांच जारी है और अन्य आरोपियों की भूमिका की भी पड़ताल की जा रही है. 

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