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This Article is From Nov 14, 2017

दिल्ली की ही चिंता क्यों, उत्तर प्रदेश में तो गाजियाबाद से लेकर वाराणसी तक प्रदूषण का स्तर बेहद खराब

आगरा में तो पीएम 2.5 का स्तर खतरे की सीमा को पार कर चुका है. वहीं गाजियाबाद, नोएडा, कानपुर में भी जहरीली हवा फैली हुई है.

दिल्ली की ही चिंता क्यों, उत्तर प्रदेश में तो गाजियाबाद से लेकर वाराणसी तक प्रदूषण का स्तर बेहद खराब
गाजियाबाद से लेकर वाराणसी तक प्रदूषण का स्तर बेदह खतरनाक है
  • उत्तर प्रदेश में हवा बेहद जहरीली
  • आगरा, गाजियाबाद, वाराणसी में हालत खराब
  • लखनऊ-कानपुर भी प्रदूषण खतरनाक स्तर पर
लखनऊ: दिल्ली में प्रदूषण की बात हर जगह हो रही है लेकिन ऐसा नहीं है कि बाकी शहरों का हाल ठीक है. बात करें उत्तर प्रदेश की तो लखनऊ, आगरा, वाराणसी में वायु प्रदूषण से हाल बुरा है. आगरा में तो पीएम 2.5 का स्तर खतरे की सीमा को पार कर चुका है. वहीं गाजियाबाद, नोएडा, कानपुर में भी जहरीली हवा फैली हुई है. केंद्रीय प्रदूषण बोर्ड के आंकड़ों की मानें तो बीते 12 दिनों में गाजियाबाद देश का सबसे प्रदूषित शहर रहा है. इससे पहले जून 2016 की आई रिपोर्ट में भी वायुप्रदूषण के लिहाज से इस शहर को देश के सबसे प्रदूषित औद्योगिक इलाके में शुमार किया जा चुका है. बीते एक साल में, खासकर इन तीन दिनों में एक दिन गाजियाबाद में पीएम 2.5 का स्तर 91 माइक्रोग्राम प्रति घनमीटर और 48 दिन बेहद खतरनाक स्तर के पार रहा. पर्यटन स्थल का केंद्र वाराणसी और आगरा का भी बुरा हाल है.

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सीपीसीबी के आंकड़ों के मुताबिक वाराणसी शुक्रवार को देश का सबसे प्रदूषित शहर था. बीते 365 दिनों में शहर में पीएम 2.5 का स्तर हर चौथे दिन खतरनाक रहा और हर चार में से तीन दिन हालत बेहद बुरी रही. आगरा में इस साल तीन में से एक दिन पीएम 2.5 का स्तर बहुत ही खराब रहा.

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कितना गंभीर है सरकार
प्रदूषण को लेकर यूपी की योगी आदित्यनाथ सरकार कितना गंभीर है इस बात का अंदाजा बजट दस्तावेजों से पता लगाया जा सकता है. राज्य प्रदूषण विभाग ने वायु और जल प्रदूषण के मद में इस साल 90 फीसदी की कटौती की है. पिछले साल का बजट 4.5 करोड़ था जबकि इस साल ये रकम 50 लाख रुपये मात्र है.  हालांकि बजट में कमी की शुरुआत अखिलेश सरकार में हो चुकी थी.  जो 2015-16 और 2016-17 के बीच एक करोड़ रुपये की रही. शुक्रवार को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने किसानों से खूंटी नहीं जलाने को लेकर अपील किया जिसे प्रदूषण की एक बड़ी वजह मानी जाती है. लेकिन अंतरिक्ष से यूपी के पूर्वी और सरहदी इलाके अप्रैल के पहले हफ्ते से ही निगाह में आ चुके थे. 2017 के चुनावों में बीजेपी के घोषणापत्र में प्रदूषण के स्तर में सुधार का कुछ खास जिक्र नहीं है.



हर जगह जोर पराली पर
नए कृषि मंत्री ने पिछले दिनों फसलों को जलाने को लेकर पूर्ण प्रतिबंध की बात कही है. निगरानी पर भी कोई खास जोर नहीं है. 20 करोड़ की आबादी वाले सबसे बड़े राज्य में सिर्फ 11 मॉनिटरिंग स्टेशन है. जबकि 1.8 करोड़ की दिल्ली में 23 जगहों से वायु प्रदूषण पर नज़र रखी जाती है. यूपी सरकार का कहना है कि वो खूंटियों से बायो इंधन बनाने की लंबी योजना पर काम कर रही है.  सरकार ये भी कहती है कि वो दिल्ली से सटे 8 जिलों में 15 साल से पुरानी पेट्रोल गाड़ियों और 10 साल से पुरानी डीजल गाड़ियों पर रोक लगाने वाली है.  पर बड़ा सवाल बाकी है कि क्या इतना ही काफी है.
 
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