- प्रयागराज में नॉर्थ टेक सिम्पोजियम 2026 के माध्यम से तकनीक, उद्योग और सैनिकों का सामूहिक मंच तैयार किया गया है
- यह सिम्पोजियम भारतीय सेना की आत्मनिर्भरता के लिए रणनीतिक सहयोग और नवाचार को बढ़ावा देता है
- सिम्पोजियम में सेना, उद्योग, स्टार्टअप्स और शैक्षणिक संस्थान मिलकर सैन्य तकनीकों के समाधान प्रस्तुत करते हैं
प्रयागराज में इन दिनों तकनीक, सैन्य ताकत और उद्योग का एक नया ‘रक्षा संगम' भी देखने को मिल रहा है. यहां ‘नॉर्थ टेक सिम्पोजियम 2026' के जरिए एक ऐसा मंच तैयार किया गया है, जहां बंद कमरों में होने वाली रणनीति अब खुले संवाद और तकनीक के जरिए आकार ले रही है. उत्तरी सेना के कमांडर, लेफ्टिनेंट जनरल प्रतीक शर्मा ने बताया कि नॉर्थ टेक सिम्पोजियम ऐतिहासिक शहर प्रयागराज में आयोजित किया जा रहा है. यह सिम्पोजियम रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की दिशा में भारत की यात्रा में एक मील का पत्थर साबित होने वाली पहल है.
#WATCH | Lt Gen Pratik Sharma, Northern Army Commander, says, "The North Tech Symposium is being held in the historic city of Prayagraj. This symposium is a landmark initiative in India's journey towards self-reliance in the defence sector. Centred on the theme of "Raksha Triveni… pic.twitter.com/UG4DCkS9gV
— ANI (@ANI) May 6, 2026
आखिर ‘सिम्पोजियम' क्या होता है?
अगर हम इसको साधारण भाषा में समझें तो सिम्पोजियम एक ऐसा मंच होता है, जहां किसी खास विषय पर एक्सपर्ट, वैज्ञानिक, उद्योग और नीति निर्माता एक साथ बैठकर चर्चा करते हैं, विचार साझा करते हैं और समाधान निकालते हैं. रक्षा क्षेत्र में इसका मतलब और बड़ा हो जाता है. यहां सेना अपनी जरूरत और मैदान के अनुभव साझा करती है. उद्योग और स्टार्टअप नई तकनीकें लेकर आते हैं. वैज्ञानिक और शोध संस्था इन समस्याओं के समाधान सुझाते हैं. इसी प्रक्रिया में आइडिया से लेकर जमीन पर इस्तेमाल होने वाली तकनीक तैयार होती है.

उत्तरी सेना के कमांडर, लेफ्टिनेंट जनरल के मुताबिक सिम्पोजियम का उद्देश्य क्षमता विकास के तीन प्रमुख स्तंभों उपयोगकर्ता, उद्योग और शिक्षा जगत को एक साथ लाना है, ताकि विचारों, नवाचार और अनुभव को ज़मीनी स्तर पर इस्तेमाल की जा सकने वाली क्षमताओं में बदला जा सके. पहली बार, भारतीय सेना की दो फ्रंटलाइन कमांड एक ही मंच पर अपने ऑपरेशनल अनुभवों को साझा करने के लिए एक साथ आई हैं. इस कार्यक्रम के लिए हमारे संयुक्त भागीदार 'सोसाइटी ऑफ इंडियन डिफेंस मैन्युफैक्चरर्स' (SIDM) और 'उत्तर प्रदेश एक्सप्रेसवेज़ इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट अथॉरिटी' (UPIDA) हैं. यह सिम्पोजियम सशस्त्र बलों, उद्योगों, स्टार्ट-अप्स, इनोवेटर्स और शैक्षणिक संस्थानों को एक साथ लाएगा, ताकि महत्वपूर्ण ऑपरेशनल चुनौतियों का समाधान करने के लिए स्वदेशी तकनीकी समाधानों की पहचान की जा सके..."
प्रयागराज में क्या हो रहा है?
4 से 6 मई तक प्रयागराज में आयोजित ‘नॉर्थ टेक सिम्पोजियम 2026' इसी कॉन्सेप्ट पर आधारित है. यह आयोजन भारतीय सेना के नॉर्दर्न और सेंट्रल कमांड द्वारा मिलकर किया जा रहा है. इसका थीम है “रक्षा त्रिवेणी संगम” यानी तकनीक, उद्योग और सैनिकों का संगम. यह वही “त्रिवेणी” है, जहां तीन ताकतें मिलकर भविष्य की सेना तैयार करती हैं.
यहां क्या होता है?
इस सिम्पोजियम में सिर्फ भाषण नहीं होते, बल्कि नई सैन्य तकनीकों का प्रदर्शन होता है. सेना अपनी असली चुनौतियां बताती है. कंपनियां और स्टार्टअप उनके समाधान दिखाते हैं और फिर इन्हें सेना के इस्तेमाल के लिए तैयार किया जाता है यानी यह एक “थिंक टैंक, टेक एक्सपो, रणनीतिक बैठक” तीनों का मिश्रण होता है.
सेना के लिए क्यों है जरूरी?
आज युद्ध सिर्फ बंदूक या टैंक से नहीं लड़े जाते, बल्कि ड्रोन, AI आधारित निगरानी, स्मार्ट लॉजिस्टिक्स, रोबोटिक सिस्टम जैसी तकनीकों से तय होते हैं. ऐसे में सिम्पोजियम का मकसद है. सेना की जरूरत और तकनीक के बीच की खाई को खत्म करना, स्वदेशी (Made in India) समाधान विकसित करना और ‘आत्मनिर्भर रक्षा' को मजबूत करना.
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