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This Article is From Jan 08, 2017

लखनऊ में समाजवादी पार्टी के दफ़्तर पहुंचे मुलायम सिंह यादव, बोले - जब विवाद ही नहीं तो समझौता कैसा

लखनऊ में समाजवादी पार्टी के दफ़्तर पहुंचे मुलायम सिंह यादव, बोले - जब विवाद ही नहीं तो समझौता कैसा
लखनऊ में समाजवादी पार्टी कार्यालय पर मुलायम सिंह यादव...
  • समाजवादी पार्टी में जारी है तक़रार
  • वह राष्ट्रीय अध्यक्ष के कमरे में बैठे. उनके साथ शिवपाल यादव भी थे.
  • दफ़्तर का एक चक्कर लगाने के बाद मुलायम एयरपोर्ट के लिए रवाना हो गए.
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नई दिल्ली: समाजवादी पार्टी में जारी तक़रार के बीच मुलायम सिंह यादव आज लखनऊ में सपा के दफ़्तर पहुंचे. जहां वो राष्ट्रीय अध्यक्ष के कमरे में बैठे. उनके साथ शिवपाल यादव भी थे.

दफ़्तर का एक चक्कर लगाने के बाद मुलायम एयरपोर्ट के लिए रवाना हो गए. आज वह दिल्ली आ रहे हैं. एयरपोर्ट रवाना होते वक़्त जब उनसे पत्रकारों ने पूछा कि क्या समाजवादी पार्टी के दोनों गुटों में समझौता होगा. तो मुलायम का कहना था कि जब विवाद ही नहीं तो समझौता कैसा.

बता दें कि उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में साइकिल चुनाव चिह्न पर अपना दावा पुख्ता करने की कोशिश के तहत अखिलेश यादव गुट ने शनिवार को पार्टी के जन प्रतिनिधियों एवं पदाधिकारियों के हस्ताक्षर वाले हलफनामे चुनाव आयोग को सौंपे हैं.

मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के समर्थक रामगोपाल यादव दस्तावेजों की प्रतियां सौंपने के लिए यहां चुनाव आयोग मुख्यालय निर्वाचन सदन गए. चुनाव आयोग ने इस गुट से दस्तावेज मांगे थे. छह बक्सों में भरे 1.5 लाख पन्नों के इन कागजातों में 200 से अधिक विधायकों, 68 विधान परिषद सदस्यों में से 56 विधान परिषद सदस्यों, 24 सांसदों में से 15 सांसदों तथा 5,000 प्रतिनिधियों में से अखिलेश समर्थक करीब 4600 प्रतिनिधियों के हस्ताक्षर हैं.


रामगोपाल ने दस्तावेज सौंपने के बाद कहा, '90 फीसदी जन प्रतिनिधि एवं प्रतिनिधि अखिलेश यादव के साथ हैं. इसलिए यह बिल्कुल साफ है कि हम असली सपा हैं. हमें साइकिल निशान दिया जाना चाहिए और असली सपा समझा जाना चाहिए.' रामगोपाल ने दावा किया कि एक सेट मुलायम सिंह यादव को उनके दिल्ली निवास पर भेजा गया, लेकिन उन्होंने पावती देने से इनकार कर दिया. अब उसे उनके लखनऊ के पते पर भेजा जाएगा.

 मुलायम सिंह धड़ा सोमवार को अपने हलफनामों का सेट आयोग को सौंप सकता है. चुनाव आयोग ने दस्तावेज सौंपने की समयसीमा 9 जनवरी तय कर रखी है. 3 जनवरी को सपा में विभाजन औपचारिक रूप से सामने आ गया था, जब दोनों पक्ष सपा और उसके निशान पर दावा करते हुए चुनाव आयोग के पास पहुंचे थे.


(इनपुट भाषा से भी)

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