- लखनऊ की JPNIC को प्राइवेट सेक्टर को 30 साल की लीज पर देने का फैसला यूपी कैबिनेट ने किया
- 857 करोड़ रुपये की लीज राशि रॉकवुड होटल्स एंड रिजॉर्ट्स और वृंदावन बॉलटलर्स कंपनियों को चुकानी होगी
- यह इमारत समाजवादी पार्टी के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के ड्रीम प्रोजेक्ट के तौर पर बनी थी लेकिन विवादों में रही
यूपी की राजधानी लखनऊ में लाल रंग की एक इमारत को प्रदेश की सबसे विवादित इमारत माना जाता है. इस इमारत में आज तक कुछ भी नहीं हुआ लेकिन फिर भी ये विवादों के केंद्र में रहती है. 18 मंजिला ये इमारत अंतरराष्ट्रीय स्तर की है लेकिन लगभग नौ सालों से ये अपने दिन बहुरने के इंतजार में खड़ी की खड़ी है. आज इस इमारत के दिन बहुरने को लेकर फैसला ले लिया गया है. ये इमारत है जय प्रकाश नारायण इंटरनेशनल कन्वेंशन सेंटर. इसको लेकर यूपी कैबिनेट ने आज एक बड़ा फैसला लिया है.
यूपी कैबिनेट ने दी मंजूरी
दरअसल, लखनऊ में सपा सरकार में बने जय प्रकाश नारायण इंटरनेशनल कन्वेंशन सेंटर यानी जेपीएनआईसी को चलाने के लिए प्राइवेट सेक्टर को देने पर यूपी कैबिनेट ने मंजूरी दे दी है. मंगलवार को कैबिनेट की बैठक में जेपीएनआईसी को प्राइवेट सेक्टर को देकर शुरू करने के प्रस्ताव पर सहमति मिल गई. एलडीए के प्रस्ताव को कैबिनेट ने मंजूरी देते हुए रॉकवुड होटल्स एंड रिजॉर्ट्स प्राइवेट लिमिटेड नाम की कंपनी और वृंदावन बॉलटलर्स नाम की कंपनी को 30 सालों की लीज देने पर मंजूरी दी है. लीज की अवधि यानी 30 सालों में 857 करोड़ रुपए चुकाने होंगे.
जेपीएनआईसी का निर्माण समाजवादी पार्टी सरकार में हुआ था. ये तत्कालीन मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के ड्रीम प्रोजेक्ट्स में से एक थी. ये इमारत बनने के बाद से ही विवादों में रही. सपा सरकार में बिल्डिंग लगभग बनकर तैयार थी लेकिन तभी 2017 में सरकार बदल गई. योगी सरकार ने 2017 में ही वित्तीय गड़बड़ी का आरोप लगाकर जांच का आदेश दे दिया. जांच चलती रही और इमारत बंद पड़ी रही. आरोप ये लगा कि तय लागत से तीन गुने खर्च के बावजूद इमारत पूरी नहीं हो पाई. देश विदेश से तमाम ऐसी चीजें लगाई गईं जो बाजार भाव से कई गुना ज़्यादा दिखाई गईं.
अखिलेश यादव ने इमारत खोलने की अपील की
सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने सरकार से जेपीएनआईसी शुरू करने की गुजारिश की. उन्होंने कहा कि नाम बदलना है तो बदल लें लेकिन इस विश्वस्तरीय इमारत को जर्जर ना करें. उन्होंने कहा था कि सपा के बेहतरीन निर्माण को योगी सरकार ने बदले की भावना से शुरू नहीं किया. अखिलेश यादव ने कहा था कि सरकार अगर सपा को ये होल्डिंग दे तो चंदा लेकर वो इसे लेने को तैयार हैं. उनका कहना था कि अगर जांच में भ्रष्टाचार साबित हुआ हो तो सरकार कार्रवाई करे लेकिन इमारत को बर्बाद ना करे.
जेपीएनआईसी को भ्रष्टाचार की इमारत बताते हुए सीएम योगी आदित्यनाथ ने लखनऊ में उससे बेहतर दूसरा कन्वेंशन सेंटर बनाने की बात कही थी. उन्होंने कहा था कि सरोजिनी नगर में एक नया कन्वेंशन सेंटर बनाया जाएगा. उन्होंने कहा कि सपा ने लोकनायक जय प्रकाश नारायण के नाम से बनी जेपीएनआईसी में भी जम कर भ्रष्टाचार किया. सीएम योगी आदित्यनाथ ने भी लागत से तीज गुना का बजट आवंटित करके भ्रष्टाचार करने का बड़ा आरोप अखिलेश यादव और उनकी समाजवादी सरकार पर लगाया था.
जेपीएनआईसी के जय प्रकाश नारायण की एक मूर्ति लगाई गई है. जेपी की जयंती पर सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव उनकी मूर्ति पर माल्यार्पण करने कन्वेंशन सेंटर जाना चाहते थे. पुलिस ने उन्हें रोक दिया. तब अखिलेश यादव दीवार फांदकर जेपी एनआईसी में घुस गए थे और माल्यार्पण किया. इसके अगले साल अखिलेश यादव के जेपीएनआईसी में जाने की संभावना को देखते हुए टिन लगाकर गेट को सील कर दिया गया. तब अखिलेश यादव तो नहीं जा पाये लेकिन उनके दो कार्यकर्ता परिसर में घुस गए थे.
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