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बेटी को पीठ पर लादकर मेडिकल कॉलेज पहुंचा पिता, सिस्टम की बेबसी दिखाती तस्वीर आई सामने

झांसी से सामने आई सिस्टम की नाकामी दिखाती तस्वीर ने सभी को सोचने पर मजबूर कर दिया. घायल बेटी को इलाज के लिए पिता को पीठ पर लादकर मेडिकल कॉलेज की इमरजेंसी तक पहुंचना पड़ा. बेटी के पैर में फ्रैक्चर था, लेकिन न स्ट्रेचर मिला न मदद. घटना का वीडियो वायरल है.

बेटी को पीठ पर लादकर मेडिकल कॉलेज पहुंचा पिता, सिस्टम की बेबसी दिखाती तस्वीर आई सामने
  • एक पिता ने घायल बेटी को पीठ पर लादकर मेडिकल कॉलेज की इमरजेंसी तक पहुंचाया क्योंकि कोई मदद उपलब्ध नहीं थी.
  • पीड़ित पिता महेश का आरोप है कि बेटी को चचिया ससुर और चचेरे देवर ने छत से धक्का देकर पैर में फ्रैक्चर किया.
  • रागनी की शादी सैंयर गांव के राजा से हुई थी और पारिवारिक विवाद के कारण ससुराल में हिंसा हुई थी.
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Father Carries Injured Daughter: उत्तर प्रदेश के झांसी से इंसानियत और व्यवस्था दोनों को झकझोर देने वाली तस्वीर सामने आई है. एक पिता अपनी घायल बेटी को पीठ पर लादकर मेडिकल कॉलेज की इमरजेंसी तक पहुंचता दिखा. वजह यह थी कि न तो अस्पताल के बाहर कोई मदद मिली, न ही अंदर जाने का साधन. बेटी के पैर में फ्रैक्चर था, लेकिन इलाज से पहले ही पिता को संघर्ष करना पड़ा. इस पूरे घटनाक्रम का वीडियो सामने आया है, जिसने स्वास्थ्य व्यवस्था और पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं.

छत से धक्का देने का आरोप, पैर में हुआ फ्रैक्चर

पीड़ित पिता ने अपना नाम महेश कुमार बताया है. उनका आरोप है कि उनकी बेटी रागनी को उसके चचिया ससुर और चचेरे देवर ने रंजिश के चलते छत से धक्का दे दिया. नीचे गिरने से रागनी के पैर में गंभीर फ्रैक्चर हो गया. महेश का कहना है कि मारपीट यहीं नहीं रुकी, बल्कि बेटी के पति और उसकी सास के साथ भी आरोपियों ने हिंसा की.

ससुराल में रहता था परिवार, अचानक बढ़ा विवाद

महेश कुमार के अनुसार, उन्होंने अपनी बेटी रागनी की शादी प्रेमनगर थाना क्षेत्र के सैंयर गांव निवासी राजा से की थी. शादी के बाद रागनी अपने पति, सास और देवर के साथ ससुराल में रह रही थी. पारिवारिक रंजिश के चलते यह विवाद बढ़ा और मामला हिंसा तक पहुंच गया.

पुलिस से शिकायत, नहीं मिली मदद

घटना के बाद परिवार ने पुलिस से शिकायत भी की, लेकिन पिता का आरोप है कि पुलिस की ओर से कोई मदद नहीं मिली. इलाज की हालत गंभीर होने के चलते महेश अपनी बेटी, दामाद और समधिन को टैक्सी से झांसी मेडिकल कॉलेज लेकर आए.

टैक्सी ने गेट पर उतारा, अंदर जाने से किया इनकार

मेडिकल कॉलेज पहुंचने पर हालात और मुश्किल हो गए. महेश का कहना है कि टैक्सी चालक ने अस्पताल के अंदर जाने से मना कर दिया और सभी को गेट पर ही उतार दिया. उस वक्त बेटी चलने की हालत में नहीं थी और आसपास कोई स्ट्रेचर या व्हीलचेयर भी उपलब्ध नहीं थी.

पीठ पर लादकर पहुंचाया इमरजेंसी तक

बेटी की हालत बिगड़ती देख महेश ने कोई और रास्ता नहीं देखा और उसे अपनी पीठ पर लादकर मेडिकल कॉलेज की इमरजेंसी तक पहुंचाया. यह दृश्य वहां मौजूद लोगों ने अपने मोबाइल में रिकॉर्ड कर लिया, जो अब सामने आ चुका है. इस वीडियो ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि गंभीर मरीजों के लिए अस्पतालों में बुनियादी सुविधाएं क्यों नहीं होतीं. साथ ही पीड़ित परिवार के आरोपों के बाद पुलिस की भूमिका पर भी सवाल उठ रहे हैं.

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