IPS KK Bishnoi SP Sambhal: उत्तर प्रदेश के संभल में एसपी IPS केके बिश्नोई की टीम ने एक ऐसे अंतर्राज्यीय गिरोह का पर्दाफाश किया है, जो दृष्टिहीन लोगों के नाम पर रुपये एकत्रित कर आम जनता को अपनी वारदात का शिकार बनाता था. यह गिरोह इतना शातिर था कि कई राज्यों की पुलिस को इनकी तलाश थी, लेकिन अंततः यूपी पुलिस के सिंघम आईपीएस केके बिश्नोई के बिछाए जाल में फंस गया. जो काम राजस्थान-हरियाणा की पुलिस नहीं कर सकी वो संभल एसपी की टीम ने कर दिखाया.
दान की फर्जी रसीद से चुनते थे शिकार
संदिग्ध आरोपी गंगाराम, तुलसी, कल्लू, राजू और माया को पुलिस हिरासत में लेकर पूछताछ की गई तो चौंकाने वाला खुलासा हुआ. ये लोग 'नेशनल ब्लाइंड एसोसिएशन' के नाम पर पैसे एकत्रित करने का काम करते थे. ये आम लोगों से 50-100 रुपये का दान लेते थे और उन्हें 'नेशनल ब्लाइंड एसोसिएशन, लखनऊ' के नाम की पर्ची थमा देते थे.
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बुजुर्ग और गहने पहने लोग थे निशाने पर
खास बात यह है कि माया और राजू मुख्य रूप से उन्हीं लोगों को टारगेट पर लेते थे जो बुजुर्ग हों और जिनके नाक, कान व गले में सोने-चांदी के आभूषण हों. माया और राजू से सूचना मिलते ही बी टीम की महिला सदस्य 'तुलसी' उस टारगेट को अपने झांसे में लेने का काम करती थी और नए-नए तरीकों से झांसा देती थी.

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तुलसी द्वारा टारगेट को झांसे में लेने के बाद वारदात को अंजाम देने की जिम्मेदारी गिरोह के अन्य साथियों गंगाराम और कल्लू की होती थी. वे टारगेट को किसी एकांत स्थान पर ले जाते थे और टप्पेबाजी की वारदात को अंजाम देते थे. दृष्टिहीन लोगों के नाम पर पैसे एकत्रित करना तो सिर्फ इनका कव था, जबकि इनका मुख्य काम टप्पेबाजी करना ही था.
तीन राज्यों में फैला नेटवर्क, सीसीटीवी और सर्विलांस से मिला सुराग
आईपीएस केके बिश्नोई ने बताया कि आरोपियों ने पश्चिमी यूपी, राजस्थान और हरियाणा के कई जिलों में टप्पेबाजी की वारदातों को अंजाम दिया है. ये इतनी सफाई से काम करते थे कि इससे पहले कभी जेल नहीं गए थे. संभल जनपद में लगातार हो रही इस तरह की वारदातों की सूचना मिलने पर संभल पुलिस की एक विशेष टीम गठित की गई थी.

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जांच टीम को पता चला कि ये लोग भीड़भाड़ वाली जगहों, जैसे बस स्टैंड, रेलवे स्टेशन और अस्पतालों के आसपास मिलने वाले लोगों को निशाना बनाते थे. आरोपियों ने 29 जुलाई को पुराने जीआरपी रेलवे स्टेशन के पास और 3 अगस्त 2026 को चंदौसी में ऐसी ही वारदातों को अंजाम दिया था. ये एक जगह वारदात करने के बाद तुरंत स्थान बदल देते थे और किसी दूसरे शहर जाकर नया शिकार तलाशते थे. इसी वजह से पुलिस के लिए इन्हें पकड़ना काफी मुश्किल हो रहा था.
इस बार संभल पुलिस की पुख्ता सर्विलांस प्रणाली और सीसीटीवी कैमरों की मदद से यह गैंग पुलिस के हत्थे चढ़ गया. यह एक ऐसा गैंग है जो पूर्व में कभी पुलिस के सामने नहीं आया था. गिरफ्तार आरोपियों में दो सगे भाई और एक पति-पत्नी शामिल हैं, जो सब मिलकर इस वारदात को अंजाम देते थे.
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