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अगर सरकारी कर्मी हाईस्कूल पास नहीं तो कौन सी डेट ऑफ बर्थ सही होगी? इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बताया

जन्मतिथि के लिए 10वीं क्लास की मार्कशीट को वैलिड दस्तावेज माना जाता है. लेकिन अगर सरकारी कर्मचारी हाई स्कूल पास ही नहीं है तो उसकी कौन सी जन्मतिथि मान्य होगी, जानें कोर्ट का फैसला.

अगर सरकारी कर्मी हाईस्कूल पास नहीं तो कौन सी डेट ऑफ बर्थ सही होगी? इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बताया
सरकारी कर्मचारी की जन्मतिथि पर हाई कोर्ट का अहम फैसला. (फाइल फोटो)
  • इलाहाबाद हाई कोर्ट ने सरकारी कर्मचारियों की जन्मतिथि से जुड़े मामले में अहम फैसला सुनाया
  • सरकारी नौकरी शुरू करते समय किसी शख्स ने 10वीं की परीक्षा पास नहीं की हो तो उनकी कौन सी जन्मतिथि मान्य
  • अदालत ने कहा कि सर्विस रूल बुक में दर्ज जन्मतिथि ही हर कार्य के लिए सही मानी जाएगी
लखनऊ:

इलाहाबाद हाई कोर्ट ने सरकारी कर्मचारी की जन्मतिथि से जुड़े मामले में अहम फैसला दिया है. दरअसल मामला ये था कि अगर सरकारी नौकरी शुरू करते समय किसी शख्स ने 10वीं की परीक्षा पास नहीं की हो तो उनकी कौन सी जन्मतिथि मान्य होगी? अदालत ने साफ किया कि अगर सरकारी नौकरी शुरू करते समय किसी शख्स ने 10वीं की परीक्षा पास नहीं की थी तो उसकी सर्विस रूल बुक में दर्ज जन्मतिथि ही हर कार्य के लिए सही मानी जाएगी.

जन्मतिथि पर हाई कोर्ट का बड़ा फैसला

उत्तर प्रदेश भर्ती सेवा नियमावलि 1974 के नियम 2 का हवाला देते हुए जस्टिस सौरभ श्याम शमशेरी ने कहा कि अगर कर्मचारी 10वीं पास नहीं है तो सरकारी सेवा में प्रवेश के लिए जो जन्मतिथि उसने दर्ज कराई थी उसे ही सही माना जाएगा. उसको बाद में बदला भी नहीं जाएगा. अलीगढ़ के हरदुआगंज में काम करने वाले एक वर्कर के जन्मतिथि से जुड़े मामले पर इलहाबाद हाई कोर्ट ने यह टिप्पणी की.

सर्विस रूल बुक में दर्ज जन्मतिथि को बदला

दरअसल उस कर्मचारी में साल 1988 में सरकारी नौकरी जॉइन की थी. मेडिकल टेस्ट के आधार पर उनकी डेट ऑफ बर्थ 19 अक्टूबर 1967 पेपर्स में दर्ज की गई थी. इसके हिसाब से उसका रिटायरमेंट 31 अक्टूबर 2027 को होना था. लेकिन बाद में हुई जांच और ट्रांसफर सर्टिफिकेट को देखते हुए उसकी डेट ऑफ बर्थ 14 अप्रैल 1966 कर दी गई. इस बदलाव का असर उसके रिटायरमेंट के समय पर भी पड़ा. कर्मचारी की ट्रांसफर की तारीख बदलकर 30 अप्रैल 2026 कर दी गई. 

कौन सी जन्मतिथि मान्य, अदालत ने बताया

इस मामले पर इलाहाबाद हाई कोर्ट ने कहा कि साल 1966 वाली जन्मतिथि को बाद में व्हाइट इंक से लिखा गया. साथ ही जिस ट्रांसफर सर्टिफिकेट के आधार पर तारीख बदली गई वह मान्य दस्तावेज नहीं था. अदालत ने ये भी साफ किया कि कर्मचारी की बात सुने बिना और उसको बिना जानकारी दिए कंपनी ये फैसला नहीं ले सकती. इसके साथ ही अदालत ने उसकी रियाटमेंट की तारीख बदलने वाले आदेशों को भी रद्द कर दिया. कोर्ट ने ये साफ किया कि सर्विस रूल बुक में जो जन्मतिथि दर्ज है, वही मान्य होगी.

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