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गाजियाबाद में हादसा, नाले में गिरे 12 साल के लड़के ने दम तोड़ा, नोएडा में युवराज केस जैसी बड़ी लापरवाही

गाजियाबाद के मसूरी क्षेत्र के झंडूपूरा गांव में चाउमीन खाने जा रहे 12 साल के मासूम आहिल की खुली नाली में गिरकर डूबने से मौत हो गई. परिवार ने प्रशासन पर लापरवाही के आरोप लगाए हैं.

गाजियाबाद में हादसा, नाले में गिरे 12 साल के लड़के ने दम तोड़ा, नोएडा में युवराज केस जैसी बड़ी लापरवाही
गाजियाबाद में 12 साल के मासूम की डूबकर मौत
गाज़ियाबाद:

उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद जिले से एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है. मसूरी थाना क्षेत्र के झंडूपूरा गांव में बुधवार शाम एक 12 साल के मासूम बच्चे की खुली नाली में गिरकर डूबने से मौत हो गई. बताया जा रहा है कि बच्चा चाउमीन खाने घर से निकला था, लेकिन कुछ ही देर में यह खुशी मातम में बदल गई.

चाउमीन खाने निकला, नाली में गिरा मासूम

झंडूपूरा गांव निवासी जाहिद का 12 साल का बेटा आहिल बुधवार शाम करीब 4 बजे घर से चाउमीन खाने के लिए निकला था. इसी दौरान वह गांव में बनी खुली नाली में गिर गया. परिजनों का कहना है, कि कुछ समय तक बच्चे का हाथ नाली से बाहर दिखाई देता रहा, लेकिन आसपास मौजूद लोग जब तक उसे बाहर निकाल पाते, तब तक काफी देर हो चुकी थी.

अस्पताल पहुंचने से पहले टूट गई सांस

परिजन आनन-फानन में आहिल को लेकर हापुड़ जिले के अस्पताल पहुंचे, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया. इसके बाद हापुड़ में ही बच्चे का पोस्टमार्टम कराया गया. घटना के बाद गांव में मातम पसरा हुआ है और परिवार का रो-रोकर बुरा हाल है. आहिल का परिवार बेहद गरीब है. परिजनों के मुताबिक वे खुले में रहने को मजबूर हैं और आज भी उनके घर चूल्हे पर खाना बनता है. हादसे के वक्त आहिल की मां के पैरों में चप्पल तक नहीं थी. परिवार ने यह भी बताया कि आहिल मानसिक रूप से अस्वस्थ था, जिस कारण उसे विशेष देखभाल की जरूरत रहती थी.

परिजनों का दर्द और सरकार से सवाल

हादसे के बाद परिजन खुली नालियों को लेकर प्रशासन और सरकार पर सवाल उठा रहे हैं. उनका कहना है कि अगर नाली ढकी होती, तो आज उनका बच्चा जिंदा होता. मां मोहसिना ने बताया, आहिल शाम चार बजे चाऊमीन खाने निकला था, उसी दौरान नाली में गिर गया. 

प्रशासन पर लापरवाही के आरोप

घटना के बाद पूरे झंडूपूरा गांव में सन्नाटा पसरा हुआ है. लोगों का कहना है कि गांव में कई जगह खुली नालियां जानलेवा बनी हुई हैं, लेकिन बार-बार शिकायतों के बावजूद कोई कार्रवाई नहीं की जाती. एक छोटी सी लापरवाही ने एक मासूम की जान ले ली. यह हादसा न सिर्फ प्रशासनिक उदासीनता को उजागर करता है, बल्कि उन हजारों खुली नालियों पर भी सवाल खड़े करता है, जो हर दिन किसी और हादसे को न्योता दे रही हैं.

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