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This Article is From Nov 03, 2017

देवताओं की दीपावली के लिये इंसान सजा रहे हैं बनारस के घाट

देवता इस दीपावली को क्यों मनाते हैं इसके पीछे कई कहानियां हैं लेकिन एक कहानी त्रिपुर राक्षस से जुड़ी है. कहते हैं भगवान शिव ने जब त्रिपुरासुर नामक दैत्य का वध किया तब स्वर्ग में देवताओं ने दीपावली मनाई थी और तभी से हम इस पर्व को देव दीपावली के रूप में मनाते हैं.

देवताओं की दीपावली के लिये इंसान सजा रहे हैं बनारस के घाट
वाराणसी: कार्तिक पूर्णिमा के दिन वाराणसी के 84 घाटों पर दीपों की ऐसी रोशनी जगमगाती है मानो पृथ्वी पर स्वर्ग उतर आया हो. ये मौक़ा होता है देव दीपावली का जब लाखों दियों की रोशनी में नहाये घाटों का आकर्षण देखते ही बनता है. दीपावली के बाद कार्तिक पूर्णिमा के दिन बनारस के घाटों पर मानाई जाने वाली इस देव दीपावली के नाम से ही पता चलता है कि ये दीपावली यहां देवता मानते हैं, लेकिन इसकी पूरी तैयारी मनुष्य करते हैं. इस वर्ष भी 4 नवम्बर को देवता इस दीपावली को मनाएंगे और उसके लिये सप्ताह भर पहले से ही घाटों के रंग रोगन, तरह तरह के फूल माला से सजाने की कवायद शुरू हो गई है. बनारस के घाट देवताओं की इस परम्परा को निभाने के लिये सज रहे हैं.

देवता इस दीपावली को क्यों मनाते हैं इसके पीछे कई कहानियां हैं लेकिन एक कहानी त्रिपुर राक्षस से जुड़ी है. कहते हैं भगवान शिव ने जब त्रिपुरासुर नामक दैत्य का वध किया तब स्वर्ग में देवताओं ने दीपावली मनाई थी और तभी से हम इस पर्व को देव दीपावली के रूप में मनाते हैं. इसके आलावा मान्यता है कि इस दिन 33 करोड़ देवता पृथ्वी पर आये थे, उनके स्वागत में देव दीपावली मनाई गई और तब से चली आ रही इस परम्परा का निर्वाह आज भी होता है. अपने घरों से लाखों की संख्या में लोग निकलकर गंगा किनारे आते हैं और दीप जलाकर मां गंगा से अपने जीवन के अंधेरे को दूर करने की प्रार्थाना करते है.
 
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इस मौके पर मुंह मांगे दाम पर मिलती है नाव
बनारस के घाटों पर देव दीपावली की ऐसी छटा होती है कि उसे देखने के लिये बड़ी मात्रा में पर्यटक आते हैं जो नाव पर बैठ कर इस अनूठे दृश्य का नजारा लेते हैं और इसे अपने कैमरे में कैद करते हैं. इसके लिये नाविक भी अपने नाव को सजा कर तैयार करते हैं. नावों की बुकिंग सालों पहले हो जाती है. आम दिनों में जिस नाव से आप बनारस के घाट 500 से 1000 रुपये में घूम सकते हैं, वो देव दीपावली के दिन 5000 से 20000 तक देने पड़ सकते हैं.

बनारस के होटल और लॉज भी महीनों पहले से बुक हो जाते हैं
बनारस की पहचान बन चुकी देव दीपावली का बनारस के पर्यटन में भी बड़ा योगदान है. बनारस में तकरीबन 600 होटल हैं, जिनमें 90 बड़े यानी 5 और 7 स्टार होटल हैं. इसके अलावा सैकड़ों छोटे होटल, लॉज हैं जो घाट के किनारे, गलियों और मुख्य शहर में हैं. देव दीपावली के आसपास ये सभी होटल और लॉज न सिर्फ खचाखच भरे रहते हैं, बल्कि प्रीमियम रेट पर इनकी बुकिंग होती है.

राजनीतिज्ञों को भी लुभाने लगी है देव दीपावली
देव दीपावली की परम्परा तो बहुत पुरानी है लेकिन बीच में ये प्रथा कुछ दिनों के लिये रुक गई थी. बाद में अहिल्या बाई ने इसे पंचगंगा घाट से शुरू किया. इसके लिये सीमेंट के पक्के हजार दिये का एक स्तम्भ भी बनाया जिसे हजारा कहा जाता है. आज भी इस हजारे पर पहले दिया जलता है उसके बाद सारे घाटों पर दीप जगमगा उठते है. इन दीपों की जगमगाहट नेताओं को भी अपने पास खींच लाती है. इस साल जहां दशाश्वमेघ घाट पर गुजरात की भूतपूर्व मुख्यमंत्री आनन्दी बेन पटेल आ रही हैं तो वहीं बगल के शीतला घाट पर लाल कृष्ण आडवाणी के आने की चर्चा है.

फ़िल्मी हस्तियों और विदेशियों के लिये आकर्षण का केंद्र है देव दीपावली
देव दीपावली पर हर साल फ़िल्मी हस्तियों की भरमार रहती है. पिछले साल सोनम कपूर यहां आई थी. इस बार भी कई हस्तियों के आने की सूचना है.  विदेशियों के लिये तो ये ख़ास पर्व जैसा हो गया है. दुनिया के हर कोने से विदेशी पर्यटक यहां आते हैं और इस नयनाभिराम छवि को अपने जेहन और कैमरे में क़ैद करते हैं.
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Dev Deepawali 2017
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