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बगावत की इनसाइड स्टोरी... ऐसे महाराष्ट्र से दिल्ली पहुंचे उद्धव के बागी सांसद, कब, कहां रुके; पूरी टाइमलाइन

उद्धव खेमे ने इसे विश्वासघात बताते हुए व्हिप जारी किया, लेकिन बागी सांसद बैठक में नहीं पहुंचे. अब मामला लोकसभा अध्यक्ष के पास है, जो तय करेंगे कि इन सांसदों की सदस्यता और मान्यता पर क्या फैसला होगा.

बगावत की इनसाइड स्टोरी... ऐसे महाराष्ट्र से दिल्ली पहुंचे उद्धव के बागी सांसद, कब, कहां रुके; पूरी टाइमलाइन

महाराष्ट्र की सियासत में एक बार फिर बड़ा भूचाल आ चुका है और इस बार भी निशाना बना है उद्धव ठाकरे का खेमा. साल 2022 के नाटकीय घटनाक्रम की यादें ताजा करते हुए, शिवसेना (यूबीटी) के 9 में से 6 लोकसभा सांसदों ने एक बेहद गोपनीय ऑपरेशन के तहत बगावत का बिगुल फूंक दिया है. इस पूरे सियासी ड्रामे की शुरुआत मंगलवार, 16 जून को हुई, जब स्थानीय खुफिया तंत्र और मुंबई के मीडिया को पूरी तरह चकमा देकर 6 सांसद महाराष्ट्र के अलग-अलग शहरों से चुपचाप रवाना हो गए. सूत्रों के मुताबिक, इन सांसदों को चार्टर्ड विमानों के जरिए दिल्ली लाया गया.

दिल्ली के सियासी गलियारों में हलचल न बढ़े, इसलिए रणनीति के तहत इन्हें दिल्ली के किसी होटल में रोकने के बजाय सीधे उत्तर प्रदेश के नोएडा स्थित एक बेहद सुरक्षित और आलीशान होटल में ठहराया गया. इस पूरे ऑपरेशन को 'ऑपरेशन टाइगर' का नाम दिया जा रहा है, जिसकी भनक उद्धव खेमे को तब तक नहीं लगी. जब तक कि सांसद मुंबई की पहुंच से दूर नहीं हो गए.

रात के अंधेरे में लोकसभा अध्यक्ष से मुलाकात की

इस पूरी बगावत का सबसे महत्वपूर्ण और निर्णायक मोड़ बुधवार, 17 जून की रात को आया. सूत्रों के हवाले से खबर आई है कि नोएडा के सुरक्षित ठिकाने से निकलकर इन छह बागी सांसदों ने रात के अंधेरे में लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से मुलाकात की. इस बैठक के दौरान सांसदों ने आधिकारिक तौर पर एक हस्ताक्षरित प्रस्ताव सौंपकर महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना के साथ अपने विलीनीकरण (मर्जर) की इच्छा जताई. इन बागी सांसदों का दावा है कि उद्धव ठाकरे कथित तौर पर बची हुई शिवसेना (यूबीटी) का कांग्रेस में पूरी तरह विलय करने की योजना बना रहे थे, जिससे नाराज होकर उन्हें यह कदम उठाना पड़ा.

इस बीच, NDTV ने बागी गुट के करीबी सूत्रों और कुछ सांसदों से बात की, जिन्होंने बताया की है कि वे पाला बदलने का मन बना रहे हैं और लोकसभा में अपनी बैठने की व्यवस्था को शिंदे गुट के सांसदों के साथ बदलने की मांग कर रहे हैं. हालांकि, लोकसभा अध्यक्ष की तरफ से इस गुट को अलग संसदीय ब्लॉक के रूप में आधिकारिक मान्यता देने का फैसला अभी लंबित है.

व्हिप का बागी सांसदों पर कोई असर नहीं दिखा

जैसे ही इस बगावत की खबर मुंबई पहुंची, उद्धव खेमे में हड़कंप मच गया. आनन-फानन में शिवसेना (यूबीटी) के मुख्य सचेतक ने एक सख्त थ्री-लाइन व्हिप जारी कर सभी लोकसभा सांसदों को गुरुवार, 18 जून की सुबह 11 बजे संसद भवन के कमरा नंबर 128-A में बुलाई गई संसदीय दल की बैठक में अनिवार्य रूप से उपस्थित रहने का निर्देश दिया. NDTV ने जब इस संकट पर उद्धव खेमे के वरिष्ठ नेताओं से बात की, तो पार्टी ने इसे एक सोची-समझी साजिश और विश्वासघात करार दिया. सुबह 11 बजे जब बैठक शुरू हुई, तो इस व्हिप का बागी सांसदों पर कोई असर नहीं दिखा. 9 में से केवल तीन सांसद - अरविंद सावंत, अनिल देसाई और राजाभाऊ वाजे ही बैठक में पहुंचे, जबकि बाकी सभी 6 सांसद नदारद रहे. संजय राउत ने इस अनुपस्थिति को व्हिप का खुला उल्लंघन बताते हुए कहा कि इन सभी को 'कारण बताओ नोटिस' जारी किया जा रहा है और पार्टी जल्द ही इन्हें अयोग्य ठहराने की कानूनी प्रक्रिया शुरू करेगी.

बागी सांसदों को Y+ कैटेगरी' की कड़ी सुरक्षा

इस बगावत के बाद जमीन पर टकराव और जनआक्रोश भड़कने की आशंका को देखते हुए प्रशासन भी तुरंत अलर्ट मोड पर आ गया. आदेश के तहत बगावत करने वाले सभी छह सांसदों संजय देशमुख (यवतमाल), संजय जाधव (परभणी), संजय दीना पाटिल (मुंबई नॉर्थ ईस्ट), नागेश पाटिल अष्टीकर (हिंगोली), ओमराजे निंबालकर (धाराशिव) और भाऊसाहेब वाकचौरे (शिरडी) को तत्काल प्रभाव से 'Y+ कैटेगरी' की कड़ी सुरक्षा मुहैया करा दी गई है, ताकि उनके घरों और संपत्तियों को शिवसैनिकों के संभावित गुस्से से बचाया जा सके.


संजय राउत ने लगाए गंभीर आरोप

दूसरी तरफ, संजय राउत ने आरोप लगाया है कि इन सांसदों को सुरक्षित ठिकानों पर भेजने के लिए करोड़ों रुपये के एडवांस दिए गए हैं. इस समय यह पूरा सियासी घटनाक्रम एक बेहद नाजुक मोड़ पर खड़ा है और कई चीजें अभी भी पेंडिंग हैं. बागी सांसदों की तरफ से महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के साथ होने वाली वह औपचारिक और अंतिम बैठक अभी पेंडिंग है, जिसके बाद वे एक प्रेस कॉन्फ्रेंस कर उद्धव ठाकरे का साथ छोड़ने की अपनी असली वजहों का आधिकारिक पत्र जारी करने वाले हैं. इसके साथ ही, लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के सामने दोनों पक्षों की अर्जियां पहुंच चुकी हैं.

बागी सांसद जहां दलबदल कानून से बचने के लिए दो-तिहाई बहुमत का हवाला देकर खुद को असली शिवसेना का हिस्सा बताते हुए विलय की मंजूरी मांग रहे हैं. वहीं, उद्धव खेमे के अरविंद सावंत और अनिल देसाई ने स्पीकर से मुलाकात कर इस गुट को मान्यता न देने की अपील की है. अब गेंद पूरी तरह से लोकसभा अध्यक्ष के पाले में है और उनका कानूनी फैसला आना अभी पेंडिंग है, जो तय करेगा कि इन छह सांसदों की सदस्यता बचेगी या वे अयोग्य घोषित होंगे.

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सुजाता कन्हैया द्विवेदी
संवाददाता
सुजाता द्विवेदी पिछले 7 वर्षों से मीडिया इंडस्ट्री का एक सक्रिय और विश्वसनीय चेहरा हैं, और वर्तमान में वे NDTV नेटवर्क में बतौर संवाददाता और ग्राउंड र... और पढ़ें
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