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This Article is From Jun 11, 2025

कटी उंगली और चेहरे के दाग ने 7 साल पहले लापता हुए बेटे को परिवार से मिलाया, पुलिस की मेहनत भी लाई रंग

नवंबर 2015 में गेझा गांव में एक मंदिर के पास से एक भंडारे के समय एक बच्चा लापता हो गया था और उसे एक व्यक्ति अपने साथ लेकर चला गया था. परिवार ने बच्चे को बहुत खोजा लेकिन वो नहीं मिला. लेकिन जब सालों बाद बच्चा अपने घर की दहलीज पर पहुंचा, उसे देख परिवार का हर सदस्य खुशी से खिलखिला उठा

कटी उंगली और चेहरे के दाग ने 7 साल पहले लापता हुए बेटे को परिवार से मिलाया, पुलिस की मेहनत भी लाई रंग
नोएडा:

नोएडा के थाना फेस 2 क्षेत्र से 10 साल पहले गायब हुए बच्चों के कारण घर में जो मातम का माहौल था, वह अब खुशियों से भर गया है क्योंकि 10 साल बाद बेटे की वापसी हुई है. साल 2015 में 7 वर्षीय हिमांशु ग़ेझा गांव से संदिग्ध परिस्थितियों में लापता हो गया था. परिवार वालों ने से काफी तलाशा लेकिन उसका कुछ पता नहीं चला. हारकर परिवार वालों ने उसकी गुमशुदगी की रिपोर्ट थाना फेस 2 में लिखवा दी, लेकिन समय बिताने के साथ बच्चों की मिलने की आस भी टूटती जा रही थी, ऐसे में एक दिन पहले घर के दरवाजे पर दस्तक हुई और उनका बेटा घर लौट आया था.

7 साल पहले लापता बच्चा कैसे पहुंचा घर

मां बेटा का फिर से मिलना किसी चमत्कार से कम नहीं. 7 साल पहले जो बच्चा लापता हो गया, आज 17 साल किशोर के रुप में लौट आया था. शरीर पर मौजूद चोट के निशान से हुई पहचान, और परिवार में दस साल बाद बच्चे के सकुशल घर लौटने पर परिवार में जश्न का माहौल है. पुलिसवालों की भी जमकर सराहना हो रही है. सेंट्रल नोएडा के डीसीपी शक्ति मोहन अवस्थी बताते है कि नवंबर 2015 में गेझा गांव में एक मंदिर के पास से एक भंडारे के समय एक बच्चा लापता हो गया था और उसे एक व्यक्ति अपने साथ लेकर चला गया था.

पुलिस को कैसे मिला बच्चा

इसी व्यक्ति ने उसे अपने साथ दिल्ली में रखा हुआ था. अभी कुछ दिनों पहले फरीदाबाद में 28 मई को एक बच्चा लापता हुआ, उसकी तफ्त्तीश के दौरान जिस अभियुक्त को पकड़ा, उसी के पास ये बच्चा भी मौजूद था. उसके बाद फरीदाबाद पुलिस और नोएडा पुलिस की संयुक्त कार्रवाई में अलग अलग रिकॉर्ड्स की तलाशी ली गई. अलग अलग रजिस्टर देखे गए और इन्फॉर्मेशन ली गई, लोकल लेवल पर इन्फॉर्मेशन ली गई और पुराने रजिस्टर पुराने रिकॉर्ड्स एफआईआर देखा गया तो एक बच्चे का मिलता जुलता नाम का बच्चा हमको भी हमारे थाने से मिला जो अभी जो नाम बच्चे का था वो प्रियांशु था. उसका नाम हिमांशु था.

सलाखों के पीछे बच्चे को अगवा करने वाला बच्चा

जब उसमें आगे तफ्तीश की गयी तो ऐडेंटिफिकेशन मार्क्स ऐसे मिले जैसे एक थे और बच्चे ने भी अपने पेरेंट्स को पहचान लिया. जब इसके आगे पूछ्ताछ की गयी तो कन्फर्म हुआ कि यही बच्चा 10 साल पहले लापता हुआ था. इस बच्चे को अगवा करने वाला आरोपी इस समय फरीदाबाद की जेल में बंद है. आरोपी से पता चला है कि उसकी अपनी पत्नी से नहीं बनती है उसके साथ नहीं रहती है. बच्चे को अपना भविष्य का सहारा बनाने के लिए वह अपने साथ ले गया था. डीसीपी शक्ति मोहन अवस्थी ने कहा कि आरोपी अभी जेल में परमिशन लेकर बयान लिए जाएंगे और उसमें आगे फिर साक्ष्य संकलन के बाद आवश्यक कार्य की जाएगी .

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