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यूपी में स्मार्ट मीटर को लेकर एक्शन में सीएम योगी, 24 घंटे में जवाब नहीं दिया तो होगा सख्त एक्शन

UP Smart Meters: शिकायतों के बाद प्रीपेड मीटर लगवाने की अनिवार्यता खत्म कर दी गई है. वहीं इन मीटरों को पोस्टपेड स्मार्ट मीटर में बदला जा रहा है. इसके साथ ही पहले की तरह ही बिजली बिल में बिल जमा करने की तिथि लिखी रहेगी.

यूपी में स्मार्ट मीटर को लेकर एक्शन में सीएम योगी, 24 घंटे में जवाब नहीं दिया तो होगा सख्त एक्शन
यूपी में स्मार्ट मीटर को लेकर सरकार का एक्शन.
  • उत्तर प्रदेश में स्मार्ट मीटर लगाने के बाद उपभोक्ताओं के बिजली बिलों में गड़बड़ी की शिकायतें सामने आईं थीं
  • सीएम योगी के आदेश पर प्रीपेड स्मार्ट मीटर को पोस्टपेड स्मार्ट मीटर में बदलने का काम शुरू किया गया
  • विद्युत नियामक आयोग ने पावर कॉरपोरेशन प्रबंधन को 24 घंटे में जवाब देने के लिए तलब किया है
लखनऊ:

उत्तर प्रदेश में ये सोचकर स्मार्ट मीटर लगाए गए थे कि इससे बिजली उपभोक्ताओं को आसानी होगी. लेकिन हुआ उल्टा. स्मार्ट मीटर लगने के बाद उनके बिल में गड़बड़ियां होने लगीं. जिसके बाद इसकी शिकायतें की गईं. सरकार से इनको वापस लेने की मांग की गई. जिसके बाद सीएम योगी तुरंत एक्शन मोड में आ गए. उनके आदेश पर अब सभी प्रीपेड मीटर पोस्टपेड स्मार्ट मीटर में बदले जा रहे हैं. भले ही पावर कॉरपोरेशन प्रबंधन ने सोमवार को प्रीपेड स्मार्ट मीटर की व्यवस्था को खत्म कर दिया हो लेकिन अब तक मीटर को लेकर उठे सवालों का जवाब नहीं दिया है. जिससे आयोग गुस्से में हैं. 

पावर कॉरपोरेशन प्रबंधन को 24 घंटे में देना होगा जवाब

दरअसल सीएम योगी के सख्त रुख के बाद पावर कॉरपोरेशन प्रबंधन को 10 दिन के भीतर विद्युत नियामक आयोग को मीटर को लेकर उठे सवालों का जवाब देना था. लेकिन ये समय सीमा निकल चुकी है. 20 दिन बीजने के बाद भी इसे लेकर कोई जवाब नहीं दिया गया. आयोग इस मामले पर अब सख्त हो गया है. उसने पावर कॉरपोरेशन प्रबंधन को जवाब के लिए 24 घंटे में तलब किया है. अगर उसने जवाब नहीं दिया तो उसके खिलाफ आयोग की तरफ से दंडात्मक कार्रवाई की जा सकती है.

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20 दिन बाद भी दाखिल नहीं किया जवाब

इस बीच उपभोक्ता परिषद ने मांग उठाई है कि स्मार्ट प्रीपेड मीटर की अनिवार्यता को खत्म करने संबंधी आदेश जारी किया जाए. उपभोक्ता परिषद ने प्रीपेड स्मार्ट मीटर से जुड़ी शिकायतें सामने आने के बाद पिछले महीने आयोग में याचिका दाखिल की थी. आयोग ने पावर कॉरपोरेशन प्रबंधन से 16 अप्रैल को जबाव देने के लिए 10 दिन की मोहलत दी थी. इस हिसाब से 26 अप्रल तक जवाब दिया जाना था लेकिन ये तारीख कब की निकल गई. अब तो पूरा अप्रैल खत्म हो चुका है और मई के भी 6 दिन निकल चुके हैं. अब तक जवाब दाखिल नहीं किया गया है. इस लापरवाही से आयोग गुस्से में है. उसने सख्ती बरतते हुए 24 घंटे में जवाब तलब किया है. 

कॉरपोरेशन प्रबंधन के खलाफ हो सकता है एक्शन

निर्धारित समय सीमा में जवाब न देकर पावर कॉरपोरेशन प्रबंधन ने विद्युत अधिनियम 2003 की की धारा 47(5) और भारत सरकार और केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण के दिशा-निर्देशों का उल्लंघन किया है. ये बात कही है उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष ने. उन्होंने कहा कि बिजली कंपनियों को आयोग के निर्देशों के मुताबिक ही काम करना चाहिए. लेकिन नियमों के खिलाफ नए बिजली कनेक्शन प्रीपेड मोड में दिए गए. साथ ही मौजूदा पोस्टपेड कनेक्शनों को बिना उपभोक्ताओं की सहमति के प्रीपेड कनेक्शन में बदला गया. उन्होंने आयोग कॉरपोरेशन प्रबंधन के खलाफ दंडात्मक कार्रवाई की मांग की है. 

 प्रीपेड मीटर लगवाने की अनिवार्यता भी खत्म

लोगों की शिकायतों के बाद  प्रीपेड मीटर लगवाने की अनिवार्यता खत्म कर दी गई है. वहीं इन मीटरों को पोस्टपेड स्मार्ट मीटर में बदला जा रहा है. इसके साथ ही पहले की तरह ही बिजली बिल में बिल जमा करने की तिथि लिखी रहेगी. इसके साथ ही उपभोक्ताओं को अपना बकाया भुगतान 10 किस्तों में करने की बड़ी राहत भी दी गई है. बिलिंग साइकिल वैसे ही रहेगा जैसे पहले पोस्टपेड मीटर में होता था.

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