- कांग्रेस ने UP चुनाव से पहले प्रदेश अध्यक्ष पद पर अनुराधा मोना मिश्रा को नियुक्त किया है, अजय राय को हटाया गया
- अनुराधा मोना मिश्रा ब्राह्मण समुदाय से हैं और ब्राह्मण वोटरों को साधने के लिए उनकी नियुक्ति की गई है.
- कार्यकारी अध्यक्ष के रूप में इमरान मसूद को नियुक्त किया गया है ताकि मुस्लिम वोट बैंक को मजबूत किया जा सके.
उत्तर प्रदेश में कुछ महीनों बाद होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस ने एक बड़ा दांव खेला है. कांग्रेस ने अपने अध्यक्ष को बदल दिया है. अजय राय को हटाकर कांग्रेस ने आराधना मिश्रा 'मोना' को यूपी का अध्यक्ष बनाया है. साथ ही इमरान मसूद को यूपी का कार्यकारी अध्यक्ष बनाया गया है. प्रभारी के रूप में राजेंद्र पाल गौतम पहले से हैं ही. मतलब अध्यक्ष पंडित, प्रभारी दलित और कार्यकारी अध्यक्ष अल्पसंख्यक... यूपी में कांग्रेस का ये PDA दांव कितना अहम है? आइए इसे समझने की कोशिश करते हैं...
सबसे पहले जानिए अजय राय को क्यों हटाया?
अजय राय यूपी में कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष थे, उन्हें हटा दिया गया है. अजय राय को साइड करने की बड़ी वजह प्रभारी राजेंद्र पाल गौतम के साथ खटपट बताया जा रहा है. ऐसे खटपट राजनीति के खुले मंच तो नहीं दिखते लेकिन अंदर ही अंदर जड़ें हिला देती है. इसका अंदाजा अजय राय के इस बयान से भी लगाया जा सकता है कि नए प्रदेश अध्यक्ष की घोषणा से कुछ देर पहले ही अजय राय ने अपने इस्तीफे को लेकर चल रही अटकलों पर कहा, "मैं समझता हूं कि यह भारतीय जनता पार्टी और आरएसएस की चाल है. न तो किसी ने मुझसे इस्तीफा मांगा है और न ही मैंने इस्तीफा दिया है. बाकी, राष्ट्रीय नेतृत्व का निर्णय है."
वाराणसी, यूपी: कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष अजय राय ने अपने इस्तीफे को लेकर चल रही अटकलों पर कहा, "मैं समझता हूं कि यह भारतीय जनता पार्टी और आरएसएस की चाल है। न तो किसी ने मुझसे इस्तीफा मांगा है और न ही मैंने इस्तीफा दिया है। बाकी, राष्ट्रीय नेतृत्व का निर्णय है।" pic.twitter.com/NVLj9HvuMb
— IANS Hindi (@IANSKhabar) October 2, 2026
आराधना मिश्रा को ही क्यों बनाया गया अध्यक्ष?
यूपी में कांग्रेस के कद्दावर नेताओं की लिस्ट में प्रमोद तिवारी का नाम बड़ा है. प्रमोद तिवारी गांधी परिवार के करीबी हैं. आराधना मिश्रा प्रमोद तिवारी की बेटी हैं. वो प्रतापगढ़ की रामपुर खास से विधायक भी हैं. इसी सीट से उनके पिता प्रमोद तिवारी 9 बार विधायक रहे हैं. दूसरी बात आराधना ब्राह्मण हैं. बीते कुछ साल में यूपी में कई ऐसी घटनाएं हुई, जिससे यह कहा गया कि राज्य के ब्राह्मण सरकार से नाराज है. ब्राह्मणों की इस नाराजगी को कैश कराने की कोशिश सपा के साथ-साथ कांग्रेस भी कर रही है.
आराधना मिश्रा को अध्यक्ष बनाना कांग्रेस का ब्राह्मण वोटों को साधने की कोशिश है. यूपी की 100 से ज्यााद सीटों पर ब्राह्मण वोटर्स निर्णायक भूमिका में हैं. उनकी संख्या 12 फीसदी से ज्यादा है. इसके अलावा, आराधना मिश्रा को कमान सौंपकर महिला वोटर को भी संदेश देने की कोशिश की है. कई राज्यों के चुनावों में महिलाओं की बदौलत बीजेपी सरकार बनाती आई हैं.
लखनऊ, यूपी: आराधना मोना मिश्रा को उत्तर प्रदेश कांग्रेस का नया प्रदेश अध्यक्ष नियुक्त किया गया। pic.twitter.com/2Upsukdl8C
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बीजेपी के इसी वोटबैंक में सेंध लगाने की कोशिश कांग्रेस कर रही है. 2022 के चुनाव में भी कांग्रेस ने 'लड़की हूं, लड़ सकती हूं' का नारा देकर सेंध लगाने की कोशिश की थी. हालांकि, पार्टी को इसका कोई फायदा नहीं मिला था.
रीता बहुगुणा जोशी के बाद आराधना मिश्रा यूपी में कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष बनने वाली दूसरी महिला नेता हैं. आराधना और उनके पिता प्रमोद तिवारी के अखिलेश यादव से अच्छे संबंध है. ऐसे में सीटों के बंटवारे के सबसे अहम मसले पर बातचीत में आसानी होगी.
अब बात कार्यकारी अध्यक्ष इमरान मसूद की
सहारनपुर के सांसद इमरान मसूद को कार्यकारी अध्यक्ष बनाकर कांग्रेस मुस्लिम वोटरों को साधने की कोशिश करती नजर आ रही है. लंबे समय से मुस्लिम वोटर कांग्रेस से साथ रही है. सपा के गठबंधन से कांग्रेस को उम्मीद है कि मुस्लिम वोटबैंक और मजबूत होगा. इमरान मसूद पश्चिम यूपी में कांग्रेस के बड़े नेता है. ऐसे में क्षेत्र के हिसाब से भी कांग्रेस ने इमरान मसूद को आगे बढ़ाया है.
इमरान मसूद के परिवार का सहारनपुर और आस-पास के जिलों की राजनीति पर अच्छा प्रभाव है. इस बार असदुद्दीन ओवैसी भी यूपी और खास कर मुस्लिम बहुल्य पश्चिमी यूपी की सीटों पर पूरे ताकत से चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहे हैं. ऐसे में कांग्रेस ने मसूद के जरिए मुस्लिम वोटरों को साथ बनाए रखने का प्रयास किया है.
देवेंद्र प्रसाद महरा और आलोक प्रसाद को बनाया उपाध्यक्ष
इसके अलावा देवेंद्र प्रसाद महरा को कांग्रेस ने उपाध्यक्ष बनाया है. देवेंद्र प्रसाद महरा निषाद समाज से आते हैं. उनका पूर्वांचल और बुंदेलखंड में अच्छा-खासा असर है. ऐसे में देवेंद्र प्रसाद महरा के जरिए कांग्रेस भाजपा (संजय निषाद) और सपा के निषाद वोट बैंक में जगह बनाना चाहती है. वहीं दलित वर्ग से आने वाले आलोक प्रसाद को भी उपाध्यक्ष बनाया गया है, जिससे पार्टी को राज्य में एक मजबूत दलित चेहरा मिल सके.
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