नागरिकता संशोधन कानून (Citizenship Amendment Act) के खिलाफ उत्तर प्रदेश में हो रहे प्रदर्शन और हिंसा में 6 लोगों की मौत हुई. इसकी पुष्टि यूपी के डीजीपी ने की. बिजनौर में दो, मेरठ, संभल, फिरोजाबाद और कानपुर में एक-एक लोगों की मौत हुई है. हालांकि पुलिस का दावा है कि गोली नहीं चलाई गई है. नागरिकता संशोधन कानून (CAA) के खिलाफ देशभर मे हिंसक प्रदर्शन जारी है. वहीं, पुरानी दिल्ली में भी शाम को प्रदर्शन उग्र हो गया और हालात को संभालने के लिए पुलिस को वाटर कैनन का इस्तेमाल करना पड़ा. खबर है कि दिल्ली के दरियागंज इलाके में कार में आग लगा दी गई है और हालात पर काबू पाने के लिए पुलिस जूझती रही. दिल्ली गेट इलाके में भी गाड़ियों में आग लगाने की खबर सामने आई. मौके पर भारी संख्य़ा में प्रदर्शनकारी इकट्ठा रहे. बता दें कि दिल्ली के सदर बाजार, नबी करीम, दरियागंज, सीलमपुर, सीमापुरी, नंद नगरी और दिल्ली गेट में हालात तनावपूर्ण बने हुए हैं.
आपको बता दें कि लाल किले के निकट बृहस्पतिवार से ही सीआरपीसी की धारा 144 के तहत निषेधाज्ञा लागू है, यानी वहां चार या इससे अधिक लोगों के एकत्र होने पर प्रतिबंध है. पुलिस ने कानून-व्यवस्था पर नजर रखने के लिए ड्रोन विमानों का इस्तेमाल कर रही है. वहीं, आज भी दिल्ली के कई मेट्रो स्टेशनों को बंद कर दिया गया है.
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अब तक क्या-क्या हुआ?
नागरिकता संशोधन बिल (Citizenship Amendment Bill) लोकसभा में 9 दिसंबर, 2019 को पास होने के बाद 11 दिसंबर, 2019 को राज्यसभा में गृह मंत्री अमित शाह (Amit Shah) ने पेश किया जहां एक लंबी बहस के बाद यह बिल पास हो गया. इस बिल के पास होने के बाद यह नागरिकता संशोधन कानून बन गया. इस कानून के विरोध में असम, बंगाल समेत देश के कई राज्यों में विरोध प्रदर्शन तेज हो गए. 15 दिसंबर को इस कानून के विरोध में प्रदर्शन के दौरान हिंसा हुई. इस प्रदर्शन में कई छात्रों समेत पुलिस के कुछ जवान भी घायल हो गए. जामिया की घटना के अगले दिन 16 दिसंबर, 2019 को नागरिकता संशोधन कानून को लेकर सीलमपुर में जमकर प्रदर्शन हुए. इस प्रदर्शन के दौरान पथराव की घटना हुई.
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17 दिसंबर को देश के दूसरे हिस्सों में भी प्रदर्शन शुरू हो गए. जामिया यूनिवर्सिटी के छात्रों के समर्थन में देश के कई यूनिवर्सिटी में भी प्रदर्शन हुए. कई यूनिवर्सिटी को 5 जनवरी, 2020 के लिए बंद कर दिया गया है और छात्रों से हॉस्टल खाली करा लिया गया. उधर जामा मस्जिद के इमाम ने कहा है कि इस कानून से देश के मुसलमानों को कोई लेना देना नहीं है. उन्हें नहीं डरना चाहिए. विरोध प्रदर्शन को देखते हुए 19 दिसंबर, 2019 को देश के कई हिस्सों में धारा 144 लागू कर दी गई.
उधर गृहमंत्री अमित शाह ने साफ कर दिया है कि चाहे जितना भी विरोध हो इस कानून को वापस नहीं लिया जाएगा. उनका कहना है कि यह कानून देश की जनता के लिए नहीं है, यह कानून उन अल्पसंख्यक लोगों के लिए है जो अफगानिस्तान, बांग्लादेश और पाकिस्तान में धार्मिक रूप से प्रताड़ित होकर भारत में शरणार्थी के रूप में आए हैं.
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