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पाकिस्तान बनने चला था चौधरी, अब हो गई फजीहत, 'पीस ब्रोकर' बनने की कोशिश नाकाम, UAE ने भी दिया झटका

पाकिस्तान की अमेरिका‑ईरान युद्धविराम में मध्यस्थ बनने की कोशिश विफल रही है. ईरान ने अमेरिकी शर्तों और इस्लामाबाद में बातचीत से इनकार कर दिया है. साथ ही UAE के 3.5 अरब डॉलर लौटाने के दबाव से पाकिस्तान को आर्थिक झटका भी लगा है.

पाकिस्तान बनने चला था चौधरी, अब हो गई फजीहत, 'पीस ब्रोकर' बनने की कोशिश नाकाम, UAE ने भी दिया झटका
नई दिल्ली:

अमेरिका‑इजरायल और ईरान के बीच जारी युद्ध के बीच खुद को ‘शांतिदूत' (Peace Broker) के तौर पर पेश करने की पाकिस्तान की कोशिश बुरी तरह नाकाम होती दिख रही है. ईरान ने पाकिस्तान की मध्यस्थता को साफ तौर पर खारिज कर दिया है और अमेरिका की ओर से रखी गई युद्धविराम शर्तों को ‘अस्वीकार्य' बताया है. इससे न केवल क्षेत्र में युद्ध के जल्द खत्म होने की उम्मीदों को झटका लगा है, बल्कि पाकिस्तान की कूटनीतिक साख पर भी सवाल खड़े हो गए हैं.

इस्लामाबाद में बातचीत से ईरान का इनकार

वॉल स्ट्रीट जर्नल की रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान ने मध्यस्थों को बता दिया है कि वह पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में अमेरिकी अधिकारियों के साथ किसी भी तरह की बैठक के लिए तैयार नहीं है. रिपोर्ट में कहा गया है कि अमेरिका की ओर से युद्धविराम के लिए रखी गई 15 शर्तों की सूची को ईरान ने पूरी तरह खारिज कर दिया है. जवाब में ईरान ने अपनी 5 शर्तें रखी हैं, जिन पर अमेरिका सहमत नहीं है.

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ईरान के इस कड़े रुख के बाद अब तुर्किए और मिस्र नए मध्यस्थ विकल्प तलाशने में जुट गए हैं. रिपोर्ट के अनुसार, अब कतर और इस्तांबुल जैसे शहरों में संभावित बातचीत पर विचार किया जा रहा है, हालांकि इसमें भी सफलता को लेकर संशय बना हुआ है.

पाकिस्तान की कूटनीतिक कोशिशों को बड़ा झटका

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने हाल ही में दावा किया था कि इस्लामाबाद अमेरिका और ईरान के बीच 'सार्थक और निर्णायक बातचीत' कराने के लिए तैयार है और दोनों पक्षों के बीच संदेश पहुंचाने में उसकी भूमिका है. लेकिन ईरान के इस इनकार के बाद पाकिस्तान की पीस ब्रोकर बनने की महत्वाकांक्षा पर पानी फिरता नजर आ रहा है.

विश्लेषकों का मानना है कि भरोसे की कमी के चलते ईरान, पाकिस्तान को इस वार्ता प्रक्रिया में कोई भूमिका देने को तैयार नहीं है. इससे पाकिस्तान की क्षेत्रीय कूटनीतिक दावेदारी को गहरा झटका लगा है.

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युद्धविराम की कोशिशें लगभग ठप

वॉल स्ट्रीट जर्नल के मुताबिक, अमेरिका और ईरान के बीच युद्धविराम के प्रयास अब ऐसे मोड़ पर पहुंच चुके हैं, जहां से उन्हें फिर से शुरू करना बेहद मुश्किल माना जा रहा है. मिडिल ईस्ट में यह युद्ध एक महीने से ज्यादा वक्त से जारी है और दोनों ही पक्ष सार्वजनिक तौर पर युद्ध रोकने की बात कर रहे हैं, लेकिन शर्तों पर कोई सहमति बनती नजर नहीं आ रही.

इस बीच, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप एक ओर ईरान को ‘पाषाण युग में धकेलने' की धमकी दे चुके हैं, तो दूसरी ओर ईरान के नए राष्ट्रपति को लेकर यह दावा भी कर रहे हैं कि वे युद्धविराम चाहते हैं. हालांकि, ईरान ने ऐसे किसी भी दावे को सिरे से खारिज किया है.

UAE से भी झटका, 3.5 अरब डॉलर लौटाने का दबाव

कूटनीतिक मोर्चे पर असफलता के बीच पाकिस्तान को आर्थिक मोर्चे पर भी बड़ा झटका लगा है. पाकिस्तान ने इस महीने के अंत तक संयुक्त अरब अमीरात (UAE) को 3.5 अरब डॉलर का कर्ज लौटाने का फैसला किया है. एक वरिष्ठ पाकिस्तानी अधिकारी के मुताबिक, अबू धाबी ने इस रकम की तत्काल वापसी की मांग की थी.

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इस राशि की वापसी से पाकिस्तान के विदेशी मुद्रा भंडार पर करीब 18 फीसदी का असर पड़ने का अनुमान है. विशेषज्ञों का कहना है कि इससे पाकिस्तानी रुपये पर दबाव बढ़ सकता है और IMF कार्यक्रम के तहत पाकिस्तान की स्थिति और जटिल हो सकती है.

एक तरफ मिडिल ईस्ट में युद्ध और दूसरी तरफ आर्थिक संकट, इन दोनों के बीच पाकिस्तान की ‘पीस ब्रोकर' बनने की कोशिश न केवल विफल रही, बल्कि उसे कूटनीतिक और आर्थिक दोनों मोर्चों पर झटका लगा है. ईरान का रुख साफ है और अमेरिका से टकराव के बीच फिलहाल शांति की राह दूर नजर आ रही है.

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