
- तमसा नदी पर उत्तर प्रदेश राज्य सेतु निगम द्वारा पुल बनाया गया है, लेकिन एक तरफ का एप्रोच मार्ग अधूरा है.
- पुल का निर्माण 2017 में शुरू हुआ था और 2024 में पूरा हुआ, लेकिन एप्रोच मार्ग नहीं बन सका है.
- एप्रोच मार्ग न बनने के कारण स्थानीय लोग लकड़ी की सीढ़ी लगाकर जोखिम भरा आवागमन कर रहे हैं.
एक पुल लोगों की परेशानी को कम करता है और लोगों को बेहतर आवागमन का मौका देता है. हालांकि उत्तर प्रदेश के बलिया में तमसा नदी पर बने पुल ने लोगों की परेशानी को कम करने के बजाय और बढ़ा दिया है. दरअसल, दर्जन भर गांवों को जोड़ने के लिए उत्तर प्रदेश राज्य सेतु निगम लिमिटेड ने पुल तो बना दिया, लेकिन पुल में एक ओर से उतरने के लिए रास्ता ही नहीं है. इसके कारण लोग लकड़ी की सीढ़ी लगाकर आना-जाना कर रहे हैं. हालांकि इस दौरान जोखिम बना रहता है. अब जिला प्रशासन का कहना है कि सेतु निगम के कुछ इश्यूज थे, जिसकी वजह से एप्रोच मार्ग नहीं बन पाया है. अब कोशिश है कि दो-तीन महीने में बन जाए.
उत्तर प्रदेश के बलिया के चितबड़ागांव नगर पंचायत क्षेत्र में सेतु निगम द्वारा तमसा नदी पर करीब 17 करोड़ रुपये की लागत से 2017 से पुल बनना शुरू हुआ था. 2025 में इसके पूरा होने की अवधि भी समाप्त हो गई. हालांकि पुल तो बन गया पर इसका एक तरफ का एप्रोच मार्ग नहीं बन सका.

एक लाख की आबादी की निर्भरता
नगर पंचायत के अध्यक्ष का कहना है कि सेतु निगम ने लापरवाही करते हुए एप्रोच मार्ग के लिए जमीन का अधिग्रहण गलत जगह कर लिया जिस वजह से पुल अधर में लटका हुआ है.
तमसा नदी पर बने इस पुल से करीब दर्जन भर गांवों की करीब एक लाख आबादी निर्भर है. एक तरफ का एप्रोच मार्ग न बनने की वजह से लोग लकड़ी की सीढ़ी बनाकर पुल पर चढ़कर अपनी जान जोखिम मे डालकर आवागमन करने को विवश हैं. लोगों का कहना है कि उनके आवागमन का यही एक मात्र जरिया है.

2024 में तैयार, लेकिन नहीं बना एप्रोच मार्ग
वहीं इस पूरे मामले में जिला प्रशासन का कहना है कि सेतु निगम ने यह पुल बनाया है. पुल में दोनों तरफ से एप्रोच मार्ग बनना था. हालांकि एक तरफ से यह बन गया है, लेकिन दूसरी तरफ से नहीं बन पाया है. कुछ इश्यू थे, जिन्हें सेतु निगम हल नहीं कर पाया है. हम लोग अब प्रयास कर रहे हैं कि यह हल हो जाए. कुछ दिनों में एप्रोच मार्ग का निर्माण कार्य हो जाएगा. पुल 2024 में ही बनकर तैयार हो गया था, लेकिन एप्रोच मार्ग नहीं बन पाया. सेतु निगम की समस्या रही होगी, उस पर ध्यान नहीं दिया. अब हम लोग कोशिश कर रहे हैं कि दो तीन महीने में बन जाए.
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