- संगम की रेती पर 3 जनवरी से शुरू हुए माघ मेले में देश भर से लाखों श्रद्धालु आस्था की डुबकी लगाने पहुंचे हैं.
- माघ मेले में साधु-संतों ने अपने विशिष्ट रूप और पहनावे से भव्यता और धार्मिक आकर्षण बढ़ाया है.
- ऐसे ही एक बाबा 'सेंट बाबा' चर्चा में बने हैं. जो शमशान से लाए गए सेंट से भक्तों को आशीर्वाद रूप में देते हैं.
संगम की रेती पर 3 जनवरी से शुरू हो चुके अध्यात्मिक और धार्मिक माघ मेले ने अब अपना भव्य स्वरूप लेना शुरू कर दिया है. संगम तट पर रोजाना देश भर से लाखों श्रद्धालु संगम में आस्था की डुबकी लगाने पहुंच रहे हैं. माघ मेले में दो मुख्य बड़े स्नान पर्व मकर संक्रांति और मौनी अमावस्या से पहले साधु–संतों ने भी मेले में अपना जलवा बिखेरना शुरू कर दिया है. जिस तरह प्रयागराज महाकुंभ 2025 में बाबाओं के रूप और जलवे निराले थे, ठीक उसी तरह इस बार भी कई साधु–संतों अलग रूप में नजर आ रहे हैं. मेले में कोई साधु खड़ेश्वर बाबा के नाम से फेमस हो गया है तो कोई अपने पहनावे और अन्य कारणों से.
सेक्टर-2 में अपनी कुटिया में धूनी रमाए बैठे हैं सेंट बाबा
सेंट वाले बाबा माघ मेला क्षेत्र के सेक्टर दो में अपनी कुटिया में बैठकर अपने पूरे शरीर में भस्म लगाकर बैठे हैं. सेंट वाले बाबा आंखों पर काला चश्मा पहनकर धूनी रमाकर अपनी कठोर तपस्या और साधना में पूरा दिन लीन रहते हैं. वहीं सेंट वाले बाबा के दर्शन करने वाले श्रद्धालु भी उनसे आशीर्वाद लेने पहुंच रहे हैं. जब कोई भी भक्त उनसे आशीर्वाद लेने पहुंचता है तो सेंट बाबा उसके ऊपर सेंट जिसे हम परफ्यूम और इत्र कहते है उसके ऊपर छिड़ककर उसे अपना आशीर्वाद देते हैं.

लोगों को अपना आशीर्वाद देते सेंट बाबा.
सेंट बाबा कहते हैं हम लोग मसान यानी शमशान घाट से ये सेंट लाते हैं और भक्तों को प्रसाद के रूप में देते है. इसलिए मेरा नाम सेंट बाबा पड़ा.
सेंट वाले बाबा का असली नाम बालक दास उर्फ नायारण भूमि
बाबा बताते हैं कि वह कहीं भी जाएंगे तो उनके पास हमेशा सेंट से भरा पिटारा उनके पास हमेशा रहता है. इसका प्रयोग भगवान की साधना में भी किया जाता है. बाबा का असली नाम बाबा बालक दास उर्फ नारायण भूमि है. बाबा श्री पंचायती अखाड़ा बड़ा उदासीन से जुड़े हुए है. इनका गुरु स्थान पंजाब का अमृतसर है. बाबा ने बताया कि उन्होंने 13 साल की उम्र में ही अपने घर को त्याग दिया और सन्यास धारण कर लिया.
बाबा को अब सन्यासी बने हुए 17 साल हो गया. बाबा कहते हैं कि उनके साधु बनने के पीछे का कारण यह है की कुछ भगवान की प्रेरणा हुई और कुछ उनका पूर्व जन्म का प्रालब्ध है. हर किसी के भाग्य में बाबा बना नहीं होता है.

धूनी लगाए बैठे सेंट बाबा.
'फैशन चाहे जितना कर लो, चाहे मार लो जितना सेंट, कोई नहीं परमानेंट'
यही नहीं सेंट बाबा उर्फ बाबा बालक दास हमेशा अपनी मस्ती में रहते है और लोगों को तरह-तरह का भजन भी सुनाते है. सेंट बाबा ने एक गाना गाते हुए कहा कि फैशन चाहे जितना कर लो, चाहे मार लो सेंट, इस जगत में कोई न परमानेंट. बाबा अपने भजनों और गानों से अपने भक्तों को आकर्षित कर रहे है. बाबा ने कैमरे पर भी गाना सुनाया.
दर्शन करने आ रहे लोगों को आशीर्वाद में देते हैं सेंट
बाबा ने बताया कि सेंट लगाने कि वजह यह है कि जो संस्कारिक होगा उसे आत्माएं दूर भागेगी और जो अपना घर छोड़कर संन्यास अपना चुका है उस पर कोई फर्क नहीं पड़ने वाला चाहे वो शमशान घाट क्यों न चला जाए. भक्तों को प्रसाद के रूप में सेंट बाबा अपने पास से सेंट लगाकर उनको उनकी मनोकामना पूरी होने के लिए आशीर्वाद देते है.
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