उत्तर प्रदेश के बदायूं में एचपीसीएल के कम्प्रेस्ड बायोगैस प्लांट में डीजीएम और डिप्टी जीएम की गोली मारकर हत्या के मामले में पुलिस की लापरवाही उजागर होने पर संबंधित इंस्पेक्टर और हल्का दरोगा को निलंबित कर दिया गया है. पोस्टमार्टम रिपोर्ट में सामने आया है कि डीजीएम के सीने में दो गोलियां लगीं जो शरीर में ही फंसी मिलीं, जबकि डिप्टी जीएम के सीने में लगी एक गोली सीने को चीरते हुए पार हो गई. पोस्टमार्टम के बाद दोनों अधिकारियों के शव परिजनों को सौंप दिए गए हैं. बताया जा रहा है कि आरोपी के खौफ की वजह से डीजीएम पहले भी उसे प्लांट से बाहर कर चुके थे, जबकि आरोपी 31 मार्च को जेल से बाहर आने वाले थे. इस बीच डिप्टी जीएम के पिता ने एचपीसीएल कंपनी के एक बड़े अधिकारी पर साजिशन हत्या कराने का आरोप लगाया है.
बदायूं जिले के मूसाझाग थाना क्षेत्र के सेंजनी गांव में बने एचपीसीएल के कम्प्रेस्ड बायोगैस प्लांट में नोएडा सेक्टर-50 स्थित सिल्वर एस्टेट अपार्टमेंट निवासी डीजीएम सुधीर गुप्ता और पीलीभीत जिले के पूरनपुर निवासी डिप्टी जीएम हर्षित मिश्रा की सेंजनी गांव के ही रहने वाले अजय प्रताप सिंह ने गोली मारकर हत्या कर दी. हमले में डीजीएम सुधीर गुप्ता के सीने में दो गोलियां लगीं, जबकि डिप्टी जीएम हर्षित मिश्रा के सीने में एक गोली लगी. वारदात को अंजाम देने के बाद आरोपी अजय प्रताप कार से थाने पहुंचा और सरेंडर कर दिया. पुलिस का कहना है कि उसे गिरफ्तार कर लिया गया है. हालांकि, अभी तक उसके पास से हत्या में इस्तेमाल असलाह बरामद नहीं किया जा सका है.
डिप्टी जीएम के पिता ने बड़े अधिकारी पर उठाए सवाल
दोहरे हत्याकांड के बाद डिप्टी मैनेजर हर्षित मिश्रा के पिता सुशील कुमार मिश्रा ने एचपीसीएल के एक बड़े अधिकारी पर साजिश रचकर हत्या कराने का आरोप लगाया है. उनका कहना है कि उन्हें कंपनी के जूनियर एग्जीक्यूटिव जीशान का फोन आया था कि प्लांट में कोई घटना हो गई है और आप लोग तुरंत पहुंचिए. इसके बाद उन्हें पता चला कि उनके बेटे हर्षित मिश्रा और उप महाप्रबंधक सुधीर गुप्ता को गोली लगी है. जब वे लोग प्लांट पहुंचे तब तक दोनों की मौत हो चुकी थी. सुशील कुमार मिश्रा का आरोप है कि 10 मार्च को एचपीसीएल का एक बड़ा अधिकारी मुंबई से प्लांट आया था और उसने यहां मीटिंग की थी, जिसके बाद साजिश के तहत उनके बेटे की हत्या कराई गई. उन्होंने कहा कि सुधीर गुप्ता कंपनी के एक बड़े अधिकारी और अजय प्रताप सिंह के दबाव से परेशान होकर इस्तीफा दे चुके थे और एक अप्रैल को रिलीव होने वाले थे. उनका सवाल है कि जिस समय यह वारदात हुई उस समय कई अधिकारी वहां मौजूद थे. अगर अजय प्रताप सिंह ने गोली चलाई तो उसने केवल दो अधिकारियों को ही क्यों निशाना बनाया, बाकी को क्यों नहीं? उन्होंने आरोप लगाया कि एचपीसीएल के एक बड़े अधिकारी की शह पर ही इस वारदात को अंजाम दिया गया है और उस अधिकारी का मोबाइल जब्त कर जांच की जानी चाहिए. साथ ही उन्होंने प्लांट की सुरक्षा व्यवस्था पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि इतनी कड़ी सुरक्षा के बावजूद अजय प्रताप सिंह असलहा लेकर अंदर कैसे पहुंच गया? उन्होंने बताया कि उनके बेटे और सुधीर गुप्ता ने पहले भी डीएम और एसएसपी से सुरक्षा की मांग की थी, जिसके बाद आरोपी अजय प्रताप को पकड़कर सात दिन के लिए जेल भेजा गया था, लेकिन वह बाद में बाहर आ गया. उन्होंने पूरे मामले की निष्पक्ष और गहराई से जांच कर दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की है.
गांव में रसूख, पुलिस से नजदीकी; अजय प्रताप का बैकग्राउंड उठा रहा कई सवाल
एचपीसीएल प्लांट में डीजीएम और डिप्टी जीएम की हत्या के आरोपी अजय प्रताप सिंह का गांव में मजबूत सामाजिक-राजनीतिक रसूख बताया जा रहा है. उसकी मां किरण देवी गांव की राशन डीलर हैं, जबकि चाचा राकेश सिंह ग्राम प्रधान हैं. परिवार का प्रभाव इसी से समझा जा सकता है कि उसका चचेरा भाई जिला पंचायत सदस्य रह चुका है और स्थानीय भाजपा नेताओं के करीब माना जाता है. अजय प्रताप तीन भाइयों में है, जिनमें मिचकू और शेखर भी शामिल हैं. गांव के बाहर उसकी करीब छह दुकानें बताई जाती हैं और परिवार के पास अच्छी-खासी जमीन भी है, जिससे गांव में उनका दबदबा माना जाता है. बताया जा रहा है कि इसी प्रभाव के चलते पुलिस भी सख्ती नहीं बरत रही थी. दरअसल, डीजीएम सुधीर गुप्ता ने चार फरवरी को अजय प्रताप के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया था, लेकिन इसके बावजूद उसकी गिरफ्तारी नहीं हुई. बाद में जब डीजीएम और डिप्टी जीएम ने डीएम और एसएसपी से शिकायत की, तब अजय प्रताप के खिलाफ केवल शांति भंग में कार्रवाई करते हुए उसे सात दिन के लिए जेल भेजा गया था. इसके बाद वह छूटकर बाहर आ गया और कुछ ही दिनों बाद दोहरे हत्याकांड को अंजाम दे डाला. ग्रामीणों का कहना है कि अजय प्रताप अक्सर थानों में बैठता था और पुलिसकर्मियों के साथ उठना-बैठना भी था, जिसकी वजह से उसके खिलाफ कार्रवाई नहीं हो रही थी. फिलहाल सोशल मीडिया पर उसकी एक हल्का दरोगा के साथ फोटो और वीडियो भी वायरल हो रहे हैं, जो पूरे मामले को लेकर कई सवाल खड़े कर रहे हैं.
दोहरे हत्याकांड ने तोड़ दिए दो परिवार
एचपीसीएल के सीबीजी प्लांट में हुए दोहरे हत्याकांड में एजीएम सुधीर गुप्ता की मौत से उनका परिवार टूट गया है. पत्नी रश्मि गुप्ता और बेटे अरुष गुप्ता के लिए यह घटना गहरा आघात बन गई. गुरुवार सुबह वह रोज की तरह काम पर निकले थे. हालांकि, आमतौर पर निजी गाड़ी से जाने वाले सुधीर गुप्ता उस दिन कंपनी की गाड़ी से प्लांट पहुंचे थे. बाद में ड्राइवर मिथिलेश यादव ने ही परिवार को घटना की जानकारी दी. अचानक आई इस खबर के बाद घर का माहौल बदल गया. परिवार के मुताबिक, उन्हें शुगर और बीपी की समस्या थी, लेकिन इसके बावजूद वह पूरी जिम्मेदारी के साथ अपने काम में लगे रहते थे और परिवार का सबसे बड़ा सहारा थे.
डिप्टी जीएम हर्षित मिश्रा की हत्या की खबर के बाद उनके पैतृक घर पूरनपुर में लगातार लोगों का आना-जाना लगा हुआ है. करीब 35 वर्षीय हर्षित मिश्रा परिवार के बड़े बेटे थे और करीब दो वर्ष पहले उनका विवाह सुमत मिश्रा से हुआ था. परिवार में माता-पिता, पत्नी और छोटे भाई वैभव मिश्रा हैं, जो राजस्थान के बाड़मेर में एचसीएल कंपनी में एग्जीक्यूटिव मैनेजर के पद पर कार्यरत बताए जाते हैं. परिजनों के मुताबिक, हर्षित मिश्रा शांत स्वभाव के और जिम्मेदार प्रवृत्ति के व्यक्ति थे. अचानक हुई इस वारदात के बाद परिवार के लोग गहरे दुख में हैं और रिश्तेदार व परिचित लगातार घर पहुंचकर परिजनों को ढांढस बंधा रहे हैं.
धमकियों से परेशान होकर एजीएम ने लिया था वीआरएस
एचपीसीएल के सीबीजी प्लांट में दोहरे हत्याकांड के आरोपी अजय प्रताप सिंह एक कंपनी के जरिए ठेके पर प्लांट वेंडर के पद पर तैनात था, लेकिन लापरवाही के आरोप में उसे करीब छह महीने पहले काम से हटा दिया गया था. इसके बाद से वह लगातार एजीएम सुधीर गुप्ता और डिप्टी जीएम हर्षित मिश्रा को धमकियां दे रहा था. इसी को लेकर एजीएम सुधीर गुप्ता ने चार फरवरी को मूसाझाग थाने में अजय प्रताप सिंह के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया था और डीएम व एसएसपी से सुरक्षा की मांग भी की थी. आरोप है कि इसके बावजूद उस पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई और वह लगातार दोनों अधिकारियों को धमकाता रहा. कभी उनकी गाड़ी रुकवाकर विवाद करता तो कभी प्लांट में घुसकर गाली-गलौज करता था. लगातार दबाव और तनाव के चलते सुधीर गुप्ता ने कंपनी से वीआरएस ले लिया था, जो स्वीकृत भी हो चुका था. वहीं हर्षित मिश्रा ने कंपनी से अपना ट्रांसफर मांगा था, लेकिन वह नहीं हो पाया. बताया जा रहा है कि 31 मार्च तक वह घर लौटने की तैयारी में थे, लेकिन इससे पहले ही अजय प्रताप सिंह ने दोनों अधिकारियों की गोली मारकर हत्या कर दी. वहीं सुधीर गुप्ता की जगह महाराष्ट्र के अकोला से मुकेश कुमार को एजीएम पद पर यहां ज्वाइन करना था, लेकिन प्लांट में हुए दोहरे हत्याकांड के बाद उन्होंने भी पदभार ग्रहण करने से मना कर दिया.
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जूनियर एग्जीक्यूटिव की तहरीर पर दर्ज हुआ मुकदमा
मूसाझाग थाना क्षेत्र के गांव सैंजनी स्थित एचपीसीएल के सीबीजी प्लांट में हुए दोहरे हत्याकांड के मामले में पुलिस ने प्लांट के जूनियर एग्जीक्यूटिव जीशान अंसारी की तहरीर पर मुकदमा दर्ज किया है. तहरीर में बताया गया है कि गांव सैंजनी निवासी अजय प्रताप सिंह पुत्र राजेश कुमार सिंह प्लांट परिसर में पहुंचा और वहां मौजूद अधिकारियों पर गोली चला दी. फायरिंग में एजीएम सुधीर गुप्ता पुत्र दयाकिशन निवासी बी-1 वृंदावन रेजिडेंसी बरेली और डिप्टी जीएम हर्षित मिश्रा पुत्र सुशील कुमार निवासी मोहल्ला साहूकारा, थाना पूरनपुर जनपद पीलीभीत घायल हो गए. अस्पताल ले जाने पर डॉक्टरों ने दोनों को मृत घोषित कर दिया. पुलिस ने आरोपी के खिलाफ हत्या की धाराओं में मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी.
घायल अधिकारियों को एयरलिफ्ट कर दिल्ली ले जाने की थी तैयारी
एचपीसीएल के सीबीजी प्लांट में फायरिंग के बाद उप महा प्रबंधक सुधीर गुप्ता और डिप्टी मैनेजर हर्षित मिश्रा गंभीर रूप से घायल हो गए थे. दोनों को बेहतर इलाज के लिए दिल्ली भेजने की तैयारी की जा रही थी. एचपीसीएल के रीजनल मैनेजर देवआनंद ने उन्हें एयरलिफ्ट कराने के लिए आवश्यक संपर्क भी शुरू कर दिए थे. इसी बीच घायलों को तत्काल उपचार के लिए दातागंज सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंचाया गया. हालांकि वहां डॉक्टरों ने जांच के बाद बताया कि बहुत देर हो चुकी है और दोनों अधिकारियों की मौत हो चुकी है. इसके साथ ही दिल्ली ले जाकर इलाज कराने की पूरी तैयारी अधूरी ही रह गई.
(बदायूं से अरविंद सिंह की रिपोर्ट)
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