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वेश्यालय गए शख्स पर कानूनी कार्रवाई क्यों? देह व्यापार के तहत केस को इलाहाबाद हाईकोर्ट ने किया खारिज

कोर्ट ने साफ क‍िया क‍ि ग्राहक के रूप में वेश्यालय जाने वाले व्‍यक्‍त‍ि पर अनैतिक व्यापार (रोकथाम) कानून, 1956 के तहत मुकदमा नहीं चलाया जा सकता हे.

वेश्यालय गए शख्स पर कानूनी कार्रवाई क्यों? देह व्यापार के तहत केस को इलाहाबाद हाईकोर्ट ने किया खारिज
इलाहाबाद हाई कोर्ट का बड़ा आदेश.
  • मामला द‍िसंबर 2023 में यूपी के गाजियाबाद का था
  • पुल‍िस ने छापा मारकर युवक को पकड़ा था
  • कोर्ट ने युवक के खिलाफ दाखिल आरोपपत्र और आपराधिक कार्यवाही रद्द कर दी

इलाहाबाद हाई कोर्ट ने वेश्यालय में ग्राहक बनकर पहुंचे व्यक्ति पर केस दर्ज किए जाने के मामले में बड़ा आदेश दिया है. कोर्ट ने साफ क‍िया क‍ि ग्राहक के रूप में वेश्यालय जाने वाले व्‍यक्‍त‍ि पर अनैतिक व्यापार (रोकथाम) कानून, 1956 के तहत मुकदमा नहीं चलाया जा सकता हे. कोर्ट ने कहा कि न‍िजी संतुष्टि के लिए पैसा देना वेश्यावृत्ति के उद्देश्य से खरीद-फरोख्त के दायरे में नहीं आता है. 

इलाहाबाद हाई कोर्ट के जज जस्टिस गौतम चौधरी ने 11 अगस्त को यह आदेश जारी क‍िया था. इसमें कहा गया क‍ि यद‍ि कोई व्‍यक्‍त‍ि वेश्यालय जाता है तो वह वेश्या से वेश्यावृत्ति करवा नहीं रहा है, बल्कि वह अपनी संतुष्टि के लिए उसकी सेवा ले रहा है. जज ने अनैतिक व्यापार (रोकथाम) कानून, 1956 का जि‍क्र करते हुए कहा क‍ि इस कानून में वेश्यावृत्ति करवाने पर रोक है, वेश्या की सेवा लेने पर नहीं है.

आत्‍मसंतुष्‍ट‍ि के ल‍िए वेश्‍या की सेवा लेने वाले पर नहीं दर्ज कि‍या जा सकता मुकदमा

जज ने कहा क‍ि आत्मसंतुष्टि के लिए पैसे खर्च करने वाले किसी व्‍यक्‍त‍ि को अनैतिक व्यापार (रोकथाम) कानून, 1956 की धारा 3, धारा 5, या धारा 7 के तहत अपराधी नहीं ठहराया जा सकता है. हाई कोर्ट ने कहा कि ये धाराएं वेश्यालय चलाने या उसका प्रबंधन करने से संबंधित हैं. इन धाराओं के तहत किसी जगह को वेश्यालय के रूप में प्रयोज करने इजाजत देने या किसी अन्य व्यक्ति की वेश्यावृत्ति से होने वाली कमाई पर गुजारा करने और किसी व्यक्ति को यौन शोषण के लिए उपलब्ध कराने, उकसाने या ले जाने से संबंधि‍त हैं. 

क्‍या है पूरा मामला? 

द‍िसंबर 2023 में यूपी के गाजियाबाद में पुल‍िस ने एक मकान पर छापा मारा और 16 लोगों को मौके से पकड़ा. इसमें एक युवक के खि‍लाफ केस दर्ज क‍िया गया और उसके खि‍लाफ अनैतिक व्यापार निवारण अधिनियम की धारा 3, 4, 5 और 7 के तहत आरोप लगाए गए थे. युवक ने कोर्ट का दरवाजा खटखटाया. इस मामले में सुनवाई करते हुए कोर्ट ने कहा कि किसी ग्राहक के खिलाफ इन धाराओं के तहत आरोप कानूनी रूप से मान्य नहीं हैं, क्योंकि ये प्रावधान वेश्यालय संचालन, उसका प्रबंधन करने या वेश्यावृत्ति से जुड़े अन्य कृत्यों से संबंधित हैं. इस टिप्पणी के साथ कोर्ट ने व्यक्ति की याचिका स्वीकार करते हुए उसके खिलाफ दाखिल आरोपपत्र और आपराधिक कार्यवाही रद्द कर दी. 
 

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