- इलाहाबाद हाईकोर्ट ने औरैया जिले में 16 अप्रैल को प्रस्तावित बुलडोजर कार्रवाई पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी
- कोर्ट ने विवादित संपत्तियों पर सभी पक्षों को यथास्थिति बनाए रखने और 29 अप्रैल को पुनः सुनवाई का आदेश दिया
- याचिकाकर्ताओं ने दावा किया कि मकान और दुकानें नसबंदी प्रोत्साहन योजना के तहत आवंटित जमीन पर बनी हैं
उत्तर प्रदेश के औरैया जिले में घरों और दुकानों के ध्वस्तीकरण से जुड़े मामले पर बुधवार को इलाहाबाद हाईकोर्ट की स्पेशल बेंच ने अर्जेंट बेसिस पर सुनवाई की. अदालत ने गुरुवार को होने वाले बुलडोजर एक्शन से पहले ही उस पर रोक लगा दी. बुधवार देर शाम चीफ जस्टिस के आदेश पर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मामले पर सुनवाई की.
डिविजन बेंच ने तत्काल प्रभाव से ध्वस्तीकरण आदेश पर अंतरिम रोक लगा दी. कोर्ट ने कहा कि मामले की लिस्टिंग की अगली तारीख तक सभी पक्ष विवाद वाली प्रॉपर्टी पर स्थिति बनाए रखेंगे. मामले पर 29 अप्रैल को अगली सुनवाई होगी. यह आदेश जस्टिस महेश चंद्र त्रिपाठी और जस्टिस विवेक वर्मा की डिविजन बेंच ने सुमन देवी और तीन अन्य याचिकाकर्ताओं द्वारा दायर रिट याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया.
मकानों-दुकानों पर आज नहीं चलेगा बुलडोजर
बताया जा रहा है कि औरैया जिले के दिबियापुर के नहर बाजार में अतिक्रमण हटाने के लिए प्रशासन द्वारा दिया गया अल्टीमेटम खत्म होने में 12 घंटे से भी कम समय बचा हुआ था. दिबियापुर के नहर बाजार क्षेत्र में 48 मकान और दुकानों को 15 अप्रैल तक कब्जा खाली करने का नोटिस दिया गया था. सिंचाई विभाग ने चेतावनी दी थी कि निर्धारित समय के बाद 16 अप्रैल से बुलडोजर चलाकर ध्वस्तीकरण किया जाएगा.
पूरी कार्रवाई इलाहाबाद हाईकोर्ट में दायर पूर्व जनहित याचिका में दिए गए आदेशों के अनुपालन में की जा रही है. बुधवार को सुमन देवी और अन्य तीन की तरफ से इलाहाबाद हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाते हुए रिट याचिका अर्जेंट बेसिस पर दाखिल की गई, ताकि 16 अप्रैल को होने वाले बुलडोजर एक्शन पर रोक लग सकें.
इलाहाबाद हाई कोर्ट में शाम को हुई अर्जेंट सुनवाई
याचिकाकर्ताओं की ओर से सीनियर एडवोकेट अमरेंद्र नाथ सिंह ने चीफ जस्टिस के समक्ष मामले में अर्जेंट सुनवाई की गुहार लगाई थी. जिसमें बताया गया कि स्थानीय प्रशासन अगले ही दिन यानी 16 अप्रैल को सुबह छह बजे ध्वस्तीकरण की तैयारी में है. दाखिल याचिका 30 सितंबर 2025 के ऑर्डर की वैलिडिटी पर सवाल उठाते हुए दायर की गई और प्रतिवादियों को याचिकाकर्ताओं को उस ज़मीन से बेदखल करने और हटाने से रोकने का निर्देश देने की मांग की गई जिस पर उनके घर और दुकानें बनी हुई थी.
मामले की संवेदनशीलता को देखते चीफ जस्टिस ने स्पेशल बेंच का गठन किया गया. जिसने मामले में सुनवाई करते हुए बुधवार शाम 6:40 बजे इस पर स्थगन आदेश पारित किया. कोर्ट में याचिकाकर्ताओं की तरफ से पेश हुए सीनियर एडवोकेट अमरेंद्र नाथ सिंह के साथ अधिवक्ता अजय कुमार मिश्र, विशाल सिंह और राहुल कुमार शुक्ला ने पक्ष रखा.
ये भी पढ़ें- मौसम पलटेगा, फिर आएगी बारिश, 10 राज्यों में बारिश का अलर्ट, दिल्ली एनसीआर में पसीने छुड़ाने वाली गर्मी
नसबंदी प्रोत्साहन योजना में मिली जमीन पर बने हैं मकान-दुकान
सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं ने दावा किया कि उनके मकान और दुकानें उन जमीनों पर बने हैं जो 1987 से 1991 के बीच सरकार की नसबंदी प्रोत्साहन योजना के तहत आवंटित की गई थी. सीनियर वकील अमरेंद्र नाथ सिंह ने कहा कि सभी ज़रूरी चीज़ें देने के बावजूद, ऑर्डर पास करते समय उन पर ध्यान नहीं दिया गया और पूरी आशंका है कि तोड़फोड़ कल ही कर दी जाएगी. अगर कोई राहत नहीं दी गई तो याचिकाकर्ताओं को ऐसा नुकसान और चोट लगेगी जिसकी भरपाई किसी और तरीके से नहीं की जा सकती.
राज्य सरकार के वकील ने दलील दी कि याचिकाकर्ताओं को बार-बार नोटिस दिए जाने के बावजूद उन्होंने साक्ष्य प्रस्तुत नहीं किए और अधिकारियों के पास मेरिट के आधार पर आगे बढ़ने के अलावा कोई विकल्प नहीं था. कोर्ट ने प्रथम दृष्टया मामले की गंभीरता को देखते हुए पक्षकारों को विवादित संपत्ति पर यथा स्थिति बनाए रखने का निर्देश दिया. हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को एक हफ्ते के अंदर जवाबी हलफनामा दाखिल करने को कहा है. मामले की अगली सुनवाई के लिए 29 अप्रैल 2026 के लिए तय की है. कोर्ट ने रजिस्ट्रार (कम्प्लायंस) को आदेश दिया कि वह इस निर्णय की जानकारी औरैया के जिलाधिकारी को जरूरी अनुपालन के लिए भेज दें.
ये भी पढ़ें- लखनऊ: झोपड़ियों में लगी आग, कई किलोमीटर दूर से दिख रहा काला धुआं; फायर ब्रिगेड की 20 गाड़ियां मौके पर
NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं