- खुले आसमान के नीचे रखा हजारों क्विंटल सरकारी गेहूं
- बारिश के पानी में भीगकर पूरी तरह हुआ बर्बाद
- किसानों से खरीदा गया था गेहूं
यूपी के महोबा जिले से व्यवस्था को कटघरे में खड़ी करने वाली एक बड़ी लापरवाही सामने आई है. यहां के कबरई विकासखंड के धरौन गांव में सहकारी समिति के बाहर खुले आसमान के नीचे रखा हजारों क्विंटल सरकारी गेहूं बारिश के पानी में भीगकर पूरी तरह बर्बाद हो गया है. मौसम विभाग की लगातार चेतावनियों के बावजूद ठेकेदार और जिम्मेदार अधिकारियों ने अनाज के उठान की जहमत नहीं उठाई, जिससे करोड़ों का अनाज अब सड़ चुका है.
एक तरफ सरकार दावों और विज्ञापनों में अन्न की एक-एक बूंद और दाने को सहेजने की बात करती है, तो वहीं दूसरी तरफ महोबा में सिस्टम की घोर लापरवाही ने करोड़ों रुपये के सरकारी अनाज को पानी में सड़ा दिया. पूरा मामला कबरई विकासखंड के धरौन गांव में संचालित बहुउद्देशीय प्राथमिक ग्रामीण सहकारी समिति का है. यहां किसानों से खरीदा गया करीब 6,747 क्विंटल गेहूं खुले करीब तीन महीने से आसमान के नीचे सड़ने के लिए छोड़ दिया गया.
मैदान में रख दिया गया था अनाज
दरअसल, सहकारी समिति के सभी गोदाम पहले से ही पूरी तरह भरे हुए थे. जगह न होने के कारण नया खरीदा गया अनाज बाहर मैदान में रख दिया गया. हैरानी की बात यह है कि मौसम विभाग की तरफ से बार-बार बारिश की चेतावनी दी जा रही थी. समिति के सचिव ने भी आलाधिकारियों को आगाह किया था कि अनाज को सुरक्षित सरकारी दुकानों या गोदामों में भेजा जाए, लेकिन लापरवाह ठेकेदार और संबंधित विभाग के कान पर जूं तक नहीं रेंगी. नतीजा यह हुआ कि पिछले कुछ दिनों से रुक-रुक कर हो रही लगातार बारिश के कारण यह हज़ारों कुंतल गेहूं पानी में भीगकर पूरी तरह अंकुरित और सड़ चुका है.

बर्बादी का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल
बहरहाल, किसानों की मेहनत और सरकार के करोड़ों रुपये की इस बर्बादी का वीडियो अब सोशल मीडिया पर वायरल है. गोदाम और मंडियां फुल होने का बहाना बनाकर अधिकारी अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ रहे हैं, लेकिन सवाल यह है कि जनता के टैक्स के पैसे से खरीदे गए इस निवाले को सड़ने देने वाले दोषियों पर आखिर कार्रवाई कब होगी?
ग्रामीण बोले- शासन-प्रशासन की है पूरी गलती
ग्रामीण हरिदास ने बताया कि ठेकेदार द्वारा समय पर गाड़ियां न भेजने के कारण यह बर्बादी हुई है. बताया कि यहां अनाज को ले जाने के लिए कोई साधन ही नहीं आ रहा है, यह पूरी गलती शासन-प्रशासन की है. रोज बूंदाबांदी और बारिश हो रही है. पन्नी डालकर ढकने की कोशिश की जाती है, पर वह नाकाफी है, जिससे गल्ला खराब हो गया है जो अब खाने योग्य बिल्कुल नहीं बचा.

लापरवाही ने की बर्बादी
ग्रामीण विनोद ने बताया कि गाड़ियां नहीं आने से खुले में पड़ा अनाज लोड नहीं हो पाया और बारिश में भीगकर खराब हो गया. किसानों ने खून-पसीना बहाकर इसे समिति को बेचा था, लेकिन लापरवाही ने सब बर्बाद कर दिया.
यूपी में बनेगा 117 KM लंबा ग्रीनफील्ड हाईवे, कानपुर से कबरई का सफर 1.5 घंटे में हो जाएगा पूरा
NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं