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Holi 2026: होली पर पुलिस वाले पर जबरन रंग डालने की क्या सजा होती है? एडवोकेट ने बताया किन धाराओं में लग सकता है केस

होली पर कई बार उत्साह लापरवाही में बदल जाता है जब लोग सड़क पर ड्यूटी कर रहे पुलिसकर्मियों पर जबरन रंग डाल देते हैं. आपकी जानकारी के लिए बता दें, कि ऐसा करना सिर्फ अनुशासनहीनता नहीं, बल्कि कानून के तहत एक संज्ञेय अपराध भी है.

Holi 2026: होली पर पुलिस वाले पर जबरन रंग डालने की क्या सजा होती है? एडवोकेट ने बताया किन धाराओं में लग सकता है केस
होली 2026
File Photo

Holi 2026: होली रंगों और खुशियों का त्योहार है, लेकिन कई बार यह उत्साह लापरवाही में बदल जाता है. ऐसी ही गलती लोग तब कर बैठते हैं, जब सड़क पर ड्यूटी कर रहे पुलिसकर्मियों पर जबरन रंग डाल देते हैं. आपकी जानकारी के लिए बता दें, कि ऐसा करना सिर्फ अनुशासनहीनता नहीं, बल्कि कानून के तहत एक संज्ञेय अपराध भी है. पुलिसकर्मी सरकारी ड्यूटी पर होते हैं, इसलिए उन पर जबरन रंग डालना सरकारी कार्य में बाधा डालने, हमला करने या मर्यादा भंग करने जैसी धाराओं के तहत गंभीर केस दर्ज करा जा सकता है. इसी मुद्दे पर NDTV से खास बातचीत में दिल्ली हाई कोर्ट के एडवोकेट दीपक ठुकराल ने ऐसी धाराओं के बारे में बताया है, जिसके तहत आरोपी पर केस हो सकता है. आइए जानते हैं...

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1. सरकारी कार्य में बाधा (Obstruction of Duty)

पुलिसकर्मी जनता की सुरक्षा के लिए 24 घंटे ड्यूटी पर तैनात रहते हैं, इसलिए यदि कोई व्यक्ति ड्यूटी के दौरान किसी पुलिस अधिकारी पर जबरन रंग लगाता है, तो इसे सरकारी कार्य में बाधा डालना माना जाता है. भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 221 (जो पहले IPC की धारा 186 थी) के तहत ऐसे कृत्य के लिए जुर्माना और कारावास दोनों का प्रावधान है. यानी होली की मस्ती में पुलिसकर्मियों पर जबरन रंग डालना सीधे‑सीधे कानूनी अपराध की श्रेणी में आता है. 

2. लोक सेवक पर हमला या आपराधिक बल

यदि रंग लगाने के दौरान छीना‑झपटी हो जाए, वर्दी फट जाए या किसी पुलिसकर्मी का कॉलर पकड़ लिया जाए, तो मामला और भी गंभीर हो जाता है, क्योंकि वर्दी का अपमान कानून की नजर में एक बड़ा अपराध माना जाता है. ऐसे मामलों में यह लोक सेवक पर हमला या आपराधिक बल प्रयोग की श्रेणी में आता है. भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 132 (जो पहले IPC की धारा 353 थी) के तहत ड्यूटी पर मौजूद किसी भी लोक सेवक पर हमला करना गैर‑जमानती अपराध माना जाता है और इसके लिए सख्त कानूनी कार्रवाई का प्रावधान है.

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3. महिला पुलिसकर्मी के साथ दुर्व्यवहार

महिला पुलिसकर्मी के साथ जबरन होली खेलना उनकी गरिमा को ठेस पहुंचाने और शारीरिक उत्पीड़न का गंभीर मामला माना जाता है. ऐसी हरकत सीधे तौर पर यौन उत्पीड़न और छेड़छाड़ की श्रेणी में आती है, जिसके लिए भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 74 और 75 (पुरानी IPC 354 और 354A) के तहत कड़ी सजा का प्रावधान है. इन धाराओं में आरोपी की तुरंत गिरफ्तारी भी संभव है.

4. शांति भंग और निवारक गिरफ्तारी

यदि पुलिस को यह लगता है कि आपकी हरकतों से सार्वजनिक शांति भंग हो सकती है या माहौल बिगड़ने का खतरा है, तो वे आप पर निवारक कार्रवाई (Preventive Action) कर सकते हैं. भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 126 और 170 (जो पहले CrPC की धारा 107 और 151 थीं) के तहत पुलिस को यह अधिकार है कि वे किसी भी व्यक्ति को शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए बिना वारंट के हिरासत में ले सकती है. ऐसे मामलों में यह कार्रवाई पूरी तरह वैधानिक होती है और इसका उद्देश्य किसी भी अनहोनी को रोकना और सार्वजनिक सुरक्षा बनाए रखना होता है. 

'होली है' कहकर नहीं हो सकता है बचाव

'होली है' कहना या त्योहार का हवाला देना किसी भी तरह का कानूनी बचाव नहीं देता. कानून के अनुसार, उत्सव के नाम पर किसी के साथ जबरदस्ती रंग लगाना, बदसलूकी करना, छेड़छाड़ करना, या सार्वजनिक व्यवस्था भंग करना अपराध माना जाता है. चाहे होली हो या कोई और त्योहार, किसी भी व्यक्ति- खासतौर पर ड्यूटी पर तैनात पुलिसकर्मी या महिला—के साथ अनुचित व्यवहार करने पर वही कानूनी कार्रवाई होती है, जो आम दिनों में लागू होती है.

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