विज्ञापन

सोने से महंगी बिकती है ये लकड़ी, इसकी खेती किसानों को बना सकती है मालामाल, जानें कितनी होती है कीमत

Union Budget 2026: बजट 2026-27 में अगरवुड (Agarwood) को बढ़ावा देने की घोषणा की गई है. अगरवुड एक खास लकड़ी होती है, जिसे ऊद भी कहा जाता है.

सोने से महंगी बिकती है ये लकड़ी, इसकी खेती किसानों को बना सकती है मालामाल, जानें कितनी होती है कीमत
क्यों खास है अगरवुड की लकड़ी?

Union Budget 2026: खेती को मुनाफे का सौदा बनाने के लिए सरकार लगातार नए विकल्प तलाश रही है. बजट 2026-27 में इसी सोच के तहत अगरवुड (Agarwood) को बढ़ावा देने की घोषणा की गई है, खासकर उत्तर-पूर्वी राज्यों में. अगरवुड एक खास लकड़ी होती है, जिसे ऊद भी कहा जाता है. बता दें कि कई बार इस लकड़ी की कीमत सोने से भी ज्यादा हो जाती है. ऐसे में अगर किसान सही जानकारी के साथ इस लकड़ी की खेती कर लें, तो ये उनके लिए आमदनी का बड़ा जरिया बन सकती है. आइए जानते हैं कैसे- 

How to Check Your CIBIL Score Online: अपना सिबिल स्कोर कैसे चेक करें?

क्यों खास है अगरवुड की लकड़ी?

अगरवुड एक्विलेरिया प्रजाति के पेड़ों से बनती है. जब यह पेड़ किसी फंगल संक्रमण या चोट का सामना करता है, तो खुद को बचाने के लिए इसके अंदर एक खास तरह की सुगंधित राल बन जाती है. यही राल धीरे-धीरे लकड़ी को गहरे रंग की, भारी और बेहद खुशबूदार बना देती है. इसी वजह से अगरवुड इतनी कीमती मानी जाती है.

कितनी होती है कीमत?

कीमत की बात करें, तो अच्छी गुणवत्ता वाली अगरवुड की लकड़ी बेहद महंगी होती है. मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, एक किलो उम्दा अगरवुड की कीमत लाखों रुपये तक पहुंच सकती है. वहीं, इससे निकाला जाने वाला ऊद का तेल और भी कीमती होता है. हाइड्रो-डिस्टिलेशन प्रक्रिया से तैयार इस तेल का इस्तेमाल इत्र बनाने में किया जाता है और इसके एक ग्राम की कीमत हजारों रुपये तक बताई जाती है. इसे अकेले या चंदन, कस्तूरी, केसर और एंबर जैसी दूसरी खुशबुओं के साथ मिलाकर इस्तेमाल किया जाता है. इसके अलावा चीन, भारत और अरब देशों में इसका इस्तेमाल पारंपरिक दवाओं में भी लंबे समय से होता आ रहा है.

कहां होती है अगरवुड की खेती?

भारत में अगरवुड प्राकृतिक रूप से असम, अरुणाचल प्रदेश, नागालैंड, मणिपुर, मिजोरम, त्रिपुरा और मेघालय जैसे राज्यों में पाया जाता है. असम में इसे जासी या सांची भी कहा जाता है. अब इसकी वैज्ञानिक और जैविक खेती देश के दूसरे हिस्सों में भी शुरू हो रही है. केरल, महाराष्ट्र और गुजरात जैसे पश्चिमी तटीय इलाकों की जलवायु और मिट्टी भी इसके लिए अनुकूल मानी जा रही है. यह पेड़ आमतौर पर 20 मीटर से ज्यादा ऊंचा होता है और इसका तना सीधा और मजबूत होता है.

ऐसे में अगर आप भी किसान हैं और इन जगहों पर रहते हैं, तो अगरवुड की खेती पर विचार सकते हैं. ये एक ऐसा ऑप्शन है जिसमें समय लगता है, लेकिन सही तकनीक और बाजार की समझ के साथ किस्मत बदल सकता है. 

NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं

फॉलो करे:
Listen to the latest songs, only on JioSaavn.com