Uber Shuttle Service: कैब सेवा देने वाली कंपनी उबर ने दिल्ली‑एनसीआर में अपनी शटल सेवा बंद करने का फैसला किया है. इससे पहले पिछले साल मुंबई और हैदराबाद में भी उबर ने यही सेवा बंद कर दी थी. कंपनी ने इसके पीछे कम सवारी (लो राइडरशिप) और ज्यादा खर्च को वजह बताया है. उबर ने यात्रियों को ई‑मेल भेजकर बताया कि हम आपको सूचित करना चाहते हैं कि आपके शहर में उबर शटल सेवा 27 मार्च के बाद बंद कर दी जाएगी. इसके बाद शटल की सवारी उपलब्ध नहीं होगी. उबर शटल के तहत लोग पहले से तय रूट पर चलने वाली बस सेवाओं को पहले से बुक कर सकते थे. इसका इस्तेमाल मुख्य रूप से नई दिल्ली, गुरुग्राम और नोएडा के बीच रोज ऑफिस आने‑जाने वाले लोग करते थे. उबर ने कहा कि दिल्ली-एनसीआर आखिरी शहर था, जहां उसकी शटल सेवा अभी तक चल रही थी. हालांकि, कंपनी अब इस सेवा को बंद कर रही है, क्योंकि वह भारत में अपने अगले बड़े बिजनेस के तौर पर ऑफिस आने‑जाने (कॉरपोरेट कम्यूट) से जुड़ी सेवाओं पर ज्यादा ध्यान देना चाहती है.
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उबर की शटल सेवा की बंद
उबर के एक प्रवक्ता के मुताबिक, उबर शटल सेवा से कंपनी को बड़ी संख्या में ऑफिस जाने वाले यात्रियों को समझने में मदद मिली और ज्यादा लोगों को एक साथ ले जाने वाली परिवहन सेवाओं का अच्छा अनुभव मिला. अब उबर इस अनुभव का इस्तेमाल एम्प्लॉई ट्रांसपोर्टेशन सर्विस (ETS) पर ध्यान देने के लिए कर रही है, जो एक तेजी से बढ़ता कॉरपोरेट ट्रैवल सेक्टर है. इसमें मांग पहले से तय रहती है और गाड़ियों का बेहतर उपयोग होता है. उबर ने इस साल की शुरुआत में ETS सेवाएं शुरू की हैं. कंपनी का कहना है कि ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स, बैंक और आईटी कंपनियों में कर्मचारियों की संख्या बढ़ने के कारण इस सेक्टर में मांग तेजी से बढ़ रही है. अनुमान है कि कॉरपोरेट मोबिलिटी सर्विस का बाजार 2030 तक 13 अरब डॉलर तक पहुंच सकता है.
कंपनी के मुताबिक, ETS के तहत कंपनी की जरूरत के हिसाब से अलग‑अलग तरह की गाड़ियां उपलब्ध कराई जाएंगी. उबर इंडिया में ETS की प्रमुख लिखिता गौड़ ने कहा कि ETS भारत में उबर के लिए बड़े ग्रोथ सेक्टर में बना रहेगा. उन्होंने बताया कि जैसे उबर पूरी दुनिया में लोगों की यात्रा को बेहतर बनाने की कोशिश कर रही है, वैसे ही कंपनी कॉरपोरेट कर्मचारियों के सफर को भी बेहतर बनाने पर काम कर रही है. इस बीच, भारत में ट्रांसपोर्ट सेवाओं की मांग बढ़ने से मोबिलिटी सेक्टर में प्रतिस्पर्धा भी तेज हो गई है. इसी को देखते हुए उबर की पैरेंट कंपनी ने हाल ही में अपनी भारतीय इकाई में करीब 3,000 करोड़ रुपये का निवेश किया है.
उबर इंडिया की वित्तीय स्थितिआर्थिक मोर्चे पर देखें तो वित्त वर्ष 2024‑25 (FY25) में उबर इंडिया का शुद्ध घाटा करीब 15 गुना बढ़कर 1,511 करोड़ रुपये हो गया. पिछले साल यह घाटा 89 करोड़ रुपये था. हालांकि, कंपनी की कुल आय (जिसमें राइड से मिलने वाला कमीशन शामिल है) 2,604 करोड़ रुपये पर स्थिर रही.
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