भारतीय रेलवे अब हाथियों को ट्रेन हादसों से बचाने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और ऑप्टिकल फाइबर केबल तकनीक का इस्तेमाल कर रहा है. इस नई व्यवस्था का नाम 'गजराज सुरक्षा' रखा गया है. इसके तहत रेलवे ने इंट्रूजन डिटेक्शन सिस्टम (IDS) लगाया है, जो रेलवे ट्रैक के पास आने वाले हाथियों का पता लगा लेता है. जैसे ही कोई हाथी ट्रैक के करीब पहुंचता है, सिस्टम तुरंत रेलवे अधिकारियों को अलर्ट भेज देता है, जिससे समय रहते ट्रेन की रफ्तार कम की जा सकती है या अन्य जरूरी कदम उठाए जा सकते हैं.
रेलवे ने यह कदम इसलिए उठाया है क्योंकि पिछले 10 वर्षों में करीब 200 हाथियों की ट्रेन से टकराने के कारण मौत हो चुकी है. नई तकनीक का उद्देश्य हाथियों की जान बचाना और मानव-वन्यजीव संघर्ष को कम करना है. भारतीय रेलवे AI और पहले से मौजूद ऑप्टिकल फाइबर नेटवर्क की मदद से ट्रेन यात्राओं को सुरक्षित बनाने के साथ-साथ हाथियों की जान बचाने की कोशिश कर रहा है. यह नई तकनीक उन इलाकों में खासतौर पर मदद करेगी, जहां हाथियों का ट्रेनों से टकराने का खतरा अधिक रहता है.
गजराज सुरक्षा कैसे काम करती है?
गजराज सुरक्षा सिस्टम रेलवे ट्रैक के पास चल रहे हाथियों के कारण पैदा होने वाले कंपन यानी वाइब्रेशन और प्रेशर वेव्स को पहचानता है. ट्रैक के किनारे बिछी ऑप्टिकल फाइबर केबल इन संकेतों को पकड़ लेती है और हाथियों की मौजूदगी का पता लगा लेती है.
यह सिस्टम हाथियों को ट्रैक तक पहुंचने से करीब 200 मीटर पहले ही पहचान सकता है. इसके बाद इंट्रूज़न डिटेक्शन सिस्टम (IDS) तुरंत नजदीकी स्टेशन मास्टर को अलर्ट भेजता है. स्टेशन मास्टर लोको पायलट को सूचना देता है, जिससे वह समय रहते ट्रेन की रफ्तार कम कर सके या जरूरत पड़ने पर ट्रेन रोक सके. रेलवे का दावा है कि यह सिस्टम 99.5% तक सटीकता के साथ संभावित दुर्घटनाओं का पता लगा सकता है.
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